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12. कालजे री कोर (राजस्थानी कविता संग्रह) ✅✍️

                जिगर चूरुवी का
           मारवाड़ी कविता संग्रह 
कवि का परिचय - 
नाम - शमशेर खान 
उपनाम - प्रेम, शमशेर गांधी
तखल्लुस - पहले परवाना नाम से लिखना शुरू किया। पत्नी अख्तर बानो (सदफ) के सुझाव पर जिगर चूरूवी नाम से लिखना शुरू किया।
पैदाइश - 18.04.1978 सहजूसर, चूरू (राजस्थान)
पिता का नाम - श्री भालू खां (पूर्व विधायक (1980 से 1985), चूरू।
माता का नाम - सलामन बानो (गृहणी)
ताअलिम - 
1. रामावि सहजूसर में पहली कक्षा में दाखिला 10.07.1984 से 1993 में मेट्रिक तक।
2. राउमावि बागला, चूरू से हेयर सेकंडरी 1993 से 1995 तक
3. राजकीय शिक्षक प्रशिक्षण विद्यालय भाषाई अल्पसंख्यक अजमेर से BSTC, 1995 से 1997
4. राजकीय लोहिया महाविद्यालय चूरू से स्वयंपाठी के रूप में स्नातक 1998 से 2001 तक (महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, अजमेर)
5. राजकीय लोहिया महाविद्यालय चूरू से स्वयंपाठी के रूप में अधिस्नातक 2004 से 2005 तक (महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर से गोल्ड मेडलिस्ट - 2005 उर्दू साहित्य)
6. कश्मीर विश्वविद्याल, श्रीनगर के नंद ऋषि शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय से B.Ed.- (2007 - 8)
7. इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय से विशेष आवश्यकता विद्यार्थियों के शिक्षण हेतु विशेष अध्ययन - 2012
8. वर्तमान में LLB में प्रवेश (13.08.2025 से)
विवाह - पत्नी अख्तर बानो (सदफ) से 20.10.1996 में विवाह हुआ।
संतान - तीन पुत्रियां
1. अंजलि खान (LLM)
2. रोजा खान (BSC Nursing) सेवारत 
3. प्रेरणा खान (BSC Nursing) सेवारत
व्यवसाय - 
1. निजी विद्यालय शिक्षक एवं विद्यालय संचालन - 1997 से 1999
2. राजकीय सेवा तृतीय श्रेणी अध्यापक 10.07.1999 से 14.12.2014 तक
3. द्वितीय श्रेणी शिक्षक 14.12.2014 से 01.09.2023 तक
4. स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति 01.09.2023 से
पद - 
1. तहसील अध्यक्ष - शिक्षक संघ शेखावत, चूरू
2. जिला मंत्री शिक्षक संघ शेखावत चूरू 
3. प्रदेशध्यक्ष, सर्व शिक्षा अभियान कर्मचारी संघ, राजस्थान
4. प्रदेशाध्यक्ष, युवा मुस्लिम महासभा, राजस्थान
5. प्रदेश संयोजक, राजस्थान तृतीय भाषा बचाओ आंदोलन 
6. प्रदेश संयोजक, संविदा मुक्ति आंदोलन राजस्थान
7. प्रदेश सचिव अखिल भारतीय कांग्रेस सेवादल 2024 से
8. जिलाध्यक्ष शिक्षक प्रकोष्ठ कांग्रेस, चूरू 2025 से
9. संयोजक चूरू विधानसभा समस्या एवं समाधान समिति, चूरू
आंदोलन - 
1. संविदा मुक्ति आंदोलन 
2. दांडी यात्रा
3. सामाजिक सरोकार
पुस्तकें - 
1. मिरातुल जिगर
2. हृदयांश (हिंदी कविता संग्रह)
3. कालजे री कोर (राजस्थानी कविता संग्रह)
4. कसासुल जिगर - गजल समूह
5. मिनाज ए जिगर - नज़्म संग्रह
6. मूलांश
7. इमरान ए जिगर 
8. प्रस्तुत पुस्तक के बारे में - 
लेखक ने उर्दू, हिंदी, मारवाड़ी भाषा की लगभग सभी विधाओं में कलम आजमाई है। प्रस्तुत दीवान शमशेर भालू खां का प्रथम प्रयास है। लेखक का मत है कि वर्तमान समय में काव्य में शुद्ध भाषा एवं शख्त बहर, गेयता और माप का चलन संभव नहीं है। इस दौर में भाषाओं के कुछ शब्द इस तरह से घुलमिल गए हैं कि उन्हें एक भाषा में बांधना शब्द के साथ अन्याय होगा। हिंदी - उर्दू दोनों भाषाओं में सम्मिलित ग़ज़ल, गीत, कविता एवं छंदों का उपयोग आम बात हो गई है। 
अतः हमें बंधनों को तोड़ते हुए सम्मिलित विधाओं में सभी भाषाओं का मेल करते हुए साहित्य सृजन करना चाहिए।
अंत में लेखक के कथन अनुसार उन्होंने इस किताब को किसी भी बंधन से मुक्त रखते हुए भावों को जनता तक पहुंचाने का एक छोटा सा प्रयास किया है।
शायर की जुबान.....
तूफ़ाँ बनकर उड़ेंगे हम ज़ुल्म के साये से
वही अज़ियत वही दर्द इंसान पराए से।
संपादकीय - 
जिगर चूरूवी की मारवाड़ी कविताएँ — "कालजे री कोर” के लिए एक संपादकीय  (प्रस्तावना-स्वरूप लेख) - इसमें संग्रह की प्रमुख कविताओं, विषयों और भावनात्मक आधार का विस्तृत विवरण समाहित है।

✴️ संपादकीय ✴️
कालजे री कोर — जिगर चूरूवी की मारवाड़ी कविताएँ
भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, वह संस्कृति का गहना और आत्मा का गान भी होती है। “कालजे री कोर” में जिगर चूरूवी ने मारवाड़ी भाषा के उसी आत्मीय स्वर को फिर से जीवित किया है, जो गाँव-ढाणी के चूल्हों से उठती लपटों, खेतों की पगडंडियों, और रेगिस्तानी हवाओं की सरसराहट में सुनाई देती है।
यह संग्रह मात्र कविताओं का समूह नहीं, बल्कि राजस्थान की मिट्टी की महक और जनजीवन का सजीव दस्तावेज़ है। इसमें लोकभाषा की सहजता, सामाजिक चेतना की गहराई और जीवन की सादगी एक साथ प्रवाहित होती है।
🔹 कविताओं की भाषा और शैली
जिगर चूरूवी की भाषा में “मारवाड़ी लोकगीतों” की मिठास और “जन-संवेदना” की खुरदरी सच्चाई दोनों हैं।
उनकी कविताओं में न कोई बंधा-बंधाया छंद है, न बनावटी शब्द; हर कविता मन से निकली और मन में उतरने वाली है।
“मीठी बोल्ये” जैसी रचना में कवि लोकसंस्कृति की उस गंध को पकड़ते हैं जहाँ शब्दों की मिठास ही मनुष्य का परिचय बन जाती है।
वहीं “कदेई खेत” में खेत-खलिहानों की मेहनत, किसान की विवशता और श्रम की महिमा का जीवंत चित्र मिलता है।
🔹 विषय और भावभूमि
यह संग्रह विविध भावनाओं का रंग-पटल है—
“पिया जी” में स्त्री-मन की दबी हुई चाह, सामाजिक सीमाओं और प्रेम की पीड़ा का सजीव संलयन है।
“घाम-लू” और “तावड़ो दिन” जैसी कविताएँ मरुभूमि के कठिन जीवन और जिजीविषा को उद्घाटित करती हैं।
“चूरू” नामक कविता अपने नगर और जनपद के प्रति कवि के आत्मीय गर्व को व्यक्त करती है—यह केवल भूगोल नहीं, भावभूमि का गीत है।
“परखो” और “मानखो” जैसी रचनाएँ आत्म-मूल्यांकन और सामाजिक व्यवस्था की विसंगतियों पर गहरी चोट करती हैं।
“टिंडसी”, “घोघरे”, “कणक री वास” जैसी कविताएँ लोकजीवन, स्त्रियों के श्रृंगार और ग्रामीण दिनचर्या की मनोहारी झलक देती हैं।
हर कविता अपने आप में एक चित्र है — कहीं हँसी है, कहीं पीड़ा, कहीं सवाल, तो कहीं आत्म-संतोष की मौन आहट।
🔹 काव्य दृष्टि
जिगर चूरूवी की दृष्टि भावनात्मक ही नहीं, सामाजिक और मानवीय चेतना से ओत-प्रोत है।
वे किसान, स्त्री, मजदूर, और सामान्य जन की आवाज़ को कविताई नहीं, अनुभव की भाषा में ढालते हैं।
उनका कवि-मन भाषा से ज्यादा संवेदना पर विश्वास करता है — इसलिए हर कविता लोक-भाव का जीवंत संवाद बन जाती है।
🔹 कलात्मक मूल्य
“कालजे री कोर” मारवाड़ी कविता को न केवल लोक-संगीत की धुन लौटाती है, बल्कि उसमें विचार और आत्म-प्रेरणा का स्वर भी जोड़ती है।
यह संग्रह मारवाड़ी साहित्य को आधुनिक संदर्भों में पुनः स्थापित करता है, जहाँ मिट्टी की महक और मनुष्य की पुकार एक साथ गूंजती है।
🔹 समग्र मूल्यांकन
इन कविताओं को पढ़ते हुए पाठक को लगता है कि वह किसी किताब नहीं, एक जीवित लोक-अनुभव को सुन रहा है।
जिगर चूरूवी ने सिद्ध कर दिया है कि कविता तब तक जीवित रहती है जब तक वह अपनी मातृभाषा में सांस लेती है।
🔸 निष्कर्ष
“कालजे री कोर” राजस्थान की लोक-आत्मा का दर्पण है।
यह संग्रह उस धरा की गवाही है जहाँ भाषा, भावना और समाज एक दूसरे में घुलकर कविता बन जाते हैं।
जिगर चूरूवी ने इस संग्रह से न केवल लोकभाषा को प्रतिष्ठा दी है, बल्कि पाठकों को अपने कालजे (हृदय) की कोर में झाँकने का अवसर भी दिया है।
— संपादक
(Chat Gpt) (जिगर चूरूवी के मारवाड़ी काव्य संग्रह के प्रकाशन हेतु)
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सूची - 
01. बेटो थारो .....
02. मीठी बोल्ये.....
03. कदेई खेत......
04. भरतार......
05. इब......
06. गांठ रो कागद.....
07. लकोव....
08. खेल.......
09. चूरू......
10. टिंडसी......
11. ढोला.........
12. कुं कुँ पत्री.......
13. सूत.....
14. राेक्या....
15. चोखो...
16. काड....
17. राज...
18. परखो......
19. पेली अ र इब....
20. भरतार.....
21. पिया जी....
22. टेम.......
23. खेल तब के.....
24. रत्ति, तोला, मासा.....
25. किसान.........
26. अरावली....
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 01. बेटो थारो ...
#बेटो_थारो इब मोट्यार म्हारो है।

सासु माँ क्यूं बरड़ाव नयो जमारो है
बेटो थारो इब मोट्यार म्हारो है।

पोतड़िया मं खेलतो बो गुड्डू थारो हो
बण्यो संजूरो रंगरूट भरतार म्हारो है।

पिलायो दूध कटोरी में बकरी हारो हो
पीव जूस गिलास मं सिरदार म्हारो है।

थे पढ़ायो गीग'ल न क क को कोडो
पढ़ साजन इंग्लिश अखबार म्हारो है।

गुलगुला स्यूं भुळ ज़्यातो छोरो थारो हो
खाव पान सुपारी असवार म्हारो है।

खेत खळ म जावतो टिंगर थारो हो
इब बै'ठ ऑफिसां मं अफसर म्हारो है।

थे देता एक रिपीयो मेळ मं जाता न
रा'ख गोजी मं एटीएम दातार म्हारो है।

बैठो बारल चूंतर पर इब बुढ़ाप मं थे
चाबी सारी दे द्यो घरबार म्हारो है।

ओझळ न होणियो नैण तारो थारो बो
काल'ज रि कोर इब सिणगार म्हारो है।

गुदड़ा मं मुतणियो बो नानकड़ो थारो
महला मं पोढणीयो गलहार म्हारो है।

जिगर ओ टेम है टेम बदळतो रेव
सदा इ अ दिन र'सी झूठ उभारो है।
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02. मीठी बोल्ये........
मीठी बोल्ये मावड़ी 
अ र खारा बोलं लोग
घर बैठ्यां मर मानखो
ठ र यां मिट्ज्या जोग।

बिंद लाड करे 
बिन्दणी चूं ट बाण 
कदे ई ना नीसरे 
आ धड़े की काण।

सांप निकाल काँचली 
दे शरीर क ताण 
प्रेम मिले मोल तो 
लेले दे दे प्राण।

पून लाग्येड़ी जाप म 
सदा बिगाड़ पूण
दा द पो त को लाड 
ख ल की सी दूण।

काग उड़ावे गोरड़ी
कोचर सी का ड आंख
पुला बां ध सायबो 
आव लागी पाँख।

बांदर बिगाड़ बाग न 
कर कर की हू हू 
सभा बिगड़ फूड़ स्यूं 
कहे जमारो थू थू।

लालच स्यूं बिगड़ 
दोस्ती और संबंध 
संगलिया बिन बायरो 
ताती लू की गंध।

जिभड़ली इमरत बसे 
जो बो ल जाण 
कान काचा ले बैठ्या 
भाई आव खाण।

बलत बिराणी स्यूँ 
होया पतला लोग
घर बिठायो बांदरो 
दरवाज पर डोग।

चन्दन की राख भली
भलो न भेलो काठ
श्याणा तो दो ई भला
मूरख भला न आठ।

गरज बावली गुजरी
होया मान्दा पू त
लोग ताना मारता
आछी गई ऊत।

बकरी भैंस मातरी
और गाय दो चार
उत्तम नर जो चाहिए
दीजे श्रेष्ठतम आहार।

भले न भलो दिखे
अर कबूतर न दिख कुओ
दरुड़िया न दारू दिख
अमली न घर - घर मुओ।

जिगर बात बुढ़ा की
कदे न जूनी जाण
साँच कहे तो मां मरे
दे मूच्छयां पर ताण।
                    -----------
03. कदेई खेत......
कदे खेत नहीं जाणिया 
सेठ साहूकार बाणिया। 
करे किसान की लूट 
चमचिया स्यु खाणिया।
कदे खेत......

लू तावड़ों में खेत जाव 
मूंग मोठ ग्वार बाव। 
बच्यो फूस पान ले ग्या 
मर मरी का जाणिया।। 
कदे खेत ....

स्याई सुकी सुक्यो पुर्जों
देता-देता न उत्रयो कर्जो
के खावं अर के बावं
घर म उद मचाणिया ।। 
कदे खेत .....

रब रूठयो रुक्यो काम 
कठ गम्यो म्हारो नाम। 
गहरी नींद सोय रह्या 
राज न चलाणिया।। 
कदे खेत.......

एक का दो च्यार कर
तू क्यूँ बुरीगार कर। 
निर्धन को धन हड़पे 
गरीब न सताणिया ।। 
कदे खेत.....
                ************
04. भरतार....

ना घड़ाया हार सिणगार
थे के करयो भरतार।

रखड़ी हंसली बाजूबन्द
मेरी माँ क स्यु ल्याई
र जुल्मी बा ई बेच खाई
मांगूं पाछी टूम ठीकरी
चढाई बात गिगनार
थे के करयो भरतार।
ना घड़ाया....

किनखळ होगी बडी
चाइजै गंजी जांघियों चड्डी
पीसणो पोणो पकाणो दोरो
मे र होग्यो घणो फोरो
आ बेजा मं ग वा ड़ की मार
थे के करयो भरतार।
ना घड़ाया...

मेळ मं कदे घुमाई कोनी
खर च की समाई कोनी
चवन्नी थे दिखाई कोनी
म के थारी लुगाई कोनी
था न कियाँ कउ सिरदार
थे के करयो भरतार।
ना घड़ाया.....

दो रो सो धाको धिकाउं
जवानी मं बुढापो दिखाऊं
ढां ढें की तरया अरड़ाउं
बिगड़ी छा को के बणाऊं
फेर नेतागिरी को बुखार
थे के करयो भरतार।
ना घड़ाया....

कर्जो ले की थे पीओ घी
पाछा देता दोरो जी
शर्म था न आवे नी
लङ्गाटेर लाग ज्यावगी
फेर आ मोदी सरकार
थे के करयो भरतार
                 **********
05. इब........
दिन म कबड्डी कुश्ती मारदड़ो
रात न दरसूण्ड, लूणकार, काजिदड़ो
मां बुलाती मो ड़ तो ल्हूक ज्याता
बापू क हे ल पर मा च त ळ छुप ज्याता
इरणा क फूलां म भुण्डिया की खोज
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।

रसड़ी खेलता-खेलता गीत गाता भायला
आपां दोनूं भायला म्हा न मज़ा आयला
चान चक्कर को डा क पुरो होतो ई कोनि
रात न मो ड़ तक टाबर सोतो ई कोनि
घरां आतां ई भारी,बेलण को फुल डोज
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।

हारदड़ो,भुंभरियो,आसपास डाइलोट खेलता
सियाळ म धूंईं खातर छाणा पेली मेलता
मे न आतो तो घुघरी बणाता डोळा मं
आयां ई सरतो बळग्या र क रोळा मं
भेळो कुणबो गमग्यो फेमली को बोझ
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।

इसकूल स्यु पेली घास चाबड़ी ल्याता
घी, दूध अर धहि चाव स्यु खाता
खेलरा, मंगोड़ी,फोफलिया चणा का होळा
इब क टाबर न कवां तो बतावं भोळा
कुव पर चलती भूण ज्यूँ बाजता अळगोज
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।

प ठ को पजामो लिलम की कमीज मिल ज्याती
नुई टायर की चप्पल आंख्यां खिल ज्याती
गूद ड़ मं पूर घालतां बेटी कयो फाटेड़ा सिंवो
डैडी अम्मी थे कुण स जमा न म जीवो
खैर टेम सारू जीणो के ओळमो रोज
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।
               **********
06. गांठ रो कागद......

ए खुदा सुकर तेरो सुकर तेरो मान तेरो
म्हां छोटा लोगां पर होयो एहसान तेरो।

करम कर म्हा र पर या रब या मालिक
हो दीन दुनिया सगला की सही ख़ालिक।

या नबी जी करो थे च्यानणो ईत्तो
कर्यो प्यार थे नवासां स्यूँ जित्तो।

लगन था र स्यूँ सर झुकाऊं नाम स्यूँ था र 
सरू ब्याव को ओ काम नाम स्यूँ था र।

मेरा पीरो मुर्शीद प्रेम की नदीयाँ बहा द्यो 
है भंवर मं नाव थे ओ बेड़ों पार लगा द्यो।

दुल्हन जाहिदा मं गुण गाडा भर - भर
दूल्हा खान शाहरुख चांद और अकतर।

सिजरो पहाड़याणा को है ओ इयां सुणो
ओ बंश परवार ब ढ रात दिन दुणों।

जाजोद स्यूँ बिसाउ लाग्यो दरबार सा
बिसाऊ स्यूँ चूरू आ बस्या मुजदार खां

आं क लाल खां राजू खां दो सपूत होया
दोनूं क ननिहाल हारा चूरू का जोया।

लालखां का दुलेखां,अनुखां,ज़ोमरदीखां
अनु खां का बेटा भूरे खां अ र फत्तू खां।

फत्तूखां जी जकात का थाणादार बन्या
आथूणा मोहल्ला मं जबरा मोट्यार बन्या

फत्तू खां की संतान सुपात्र होई 
सत्तारखां छोटा,सदीकखां सा न है भाई।

बिजली म्हकम मं मीटर इंस्पेक्टर
बात स्याणी करता ज्यूँ क र कलेक्टर।

बड़ा बेटा इदरीश खां किनी वकीलाई
नाम की रोशनी चहुं दिश फैलाई।

खान असलम बन्या बाजार का राजा
छो ट भाई तनु संग किताब की दुकान साझा।

खान इद्रीश का बेटा अनीश खान होया
बन्या वकील गबरू जद जवान होया।

असलम खां का अरशद बीएससी नर्सिंग कर ली
रहव सीकर अहसान त्यारी नीट की कर ली।

खान तनवीर का बेटा खान निहाल करे
पढ़ाई क र परवार का ऊंचा भाल करे।

ग्यांग्यासर का अखाण बड़ नाम होया
चाल पाटीदा स्यूँ मोट्यार आ कांट सोया।

कांट स्यूँ जागीरदार ग्यांग्यासर आग्या
सूत्यो सिंघ जाग्यो ब सियार भाग्या।

भाऊ खां जी अ ठ बडा किसान होया
फो ड़ मातीरा खावं टिंडसी काचर लोया।

रहीम खां दीनदार, अशरफखां छोटे भाई
अशरफ खां सिराज भती ज क नाम गोद कराई।

खान शमशेर हाकमखां युनुसखां सहोदर
दो मास्टर एक हाकम खां किसान हलधर

शमशेर खां का हबीब खां फौजी होया
लुकमान खां नेताजी मनमौजी होया।

हाकमखां क सुभानखां रफीकखां फौजी
समसुद्दीन इस्पाकखां कमाए सऊदी मं रोजी।

होनहार मुबारक देश का फख्र
कश्मीर मं लड़्या पाया वीर चक्र।

सिराज खां का सुत इस्लामखां, इब्राहिम खां आबिद खां 
युनुस खां का बेटा फरमान कबीर क्लर्क यहां।

मास्टर हफीज़ खां इंजीनियर अनवर खां 
बडी महनत स्यूँ संवारे हबीबखां घर इनका।

बाप दादा को नाम बढ़ायो असलम 
बण के फौजी घर आयो असलम।

नूए जमाने मं पढ़ाई को नुओं चलन
बेटो इमदाद करसी योग को प्रचलन।

कुंअर सा शाहरुख खां जी घण भागवान होया 
माटी बण ज्या सोनो हाथ स्यूँ था र छुया।

सगला गांव न सलाम अर्ज होव सा 
सारा पहाड़ियाण थारी बाट जोव सा।

ग्यांग्यासर का अखाण थे सिरधारो सा
चूरू क पहाड़याणा क आओ पधारो सा।

तारीख तेईस म्हीनो दूसरो साल दो हजार पच्चीस
लाडो जाहिदा क ब्याव मं स काम हो सीं इक्कीस।

कुंअर शाहरुख खान न बींद बणा की ल्याओ
थे सज - धज क र बण बराती आओ।

गांठ र इं नूत सारू सीख दिरावाँ सा
म्हे था र प गा नी च पल्कां बिछावां सा।

सागोजी फिकर न ईं आदमी कित्ता ई ल्याइयो
पण टेम सारू थे मालकां पूग ज्याईयो।

ढोल ढमका गाजा बाजा किता ई बजाज्यो 
निकाह क टेम सात बजे तक आजाज्यो।

तरीख तेईस खुशी को दिन आयो सा
थे किता ई आदमी बरात मं ल्यायो सा।

घ ण हेत स्यूँ म्हे मिजमानी करस्यां
दादा बाड़ी मं म्हे बेटी था र कानी करस्यां

थो ड़ लिख्योड़ न घणो मान लिज्यो जी
थारी म्हारी है एक पत जाण लिज्यो जी।

थारो कोडालू हेतालु
असलम खां वल्द सदीक खां, पहाड़ियाण
आथूणा मोहल्ला, चूरू ।
लेखक - जिगर चूरूवी 
                  ************
07. लकोव......
बीर लकोव गोरड़ी पीव बताव काज
बीर बताव भोजी न रा ख पीवसा राज।

आध स्यूँ पूरो हुयो पू र स्यूँ होग्यो दूण
ज्यूँज्यूँ आई ओस्था करकण लाग्या जूण

भरी तावड़ी देखूं बरस ज्याव बादलियो
मूंग भर्या खेत इब करवा स्यूँ मादलियो 

मिरग कुलांची मारतो फि र जंगल दूर
सुख पराये दूबलो उछ ल है लंगूर।

आ ट सा ट क फेर मं बेटी देई अणमेल 
पटपड़िया दे हाथ रोव खुद रचायो खेल।

मुंजो घि स बरतण तन घि स बरसा स्यूँ
बात स्यूँ मान घि स तान घि स चरसा स्यूँ 

पद पर चा ये पावणा बेटो बजाव डांग
बहु ल्याया पीसा मं म्हारी ऊपर टांग।

बडा बडेरा की कही ऊत गई घर हाण
पाणी पि र जात पूछ आ सुद पिछाण। 

आडी टेडी राखणी भू आई घर दो
जे राखी एक संग तो बैठी बैठी रो।

कदे न आई मुं मामल न हुलसायो जीव
बरसण लाग्यो मेवड़ो मीठो पाणी पीव।

कवे कवि जिगर चिंता न फिकर की
पपीतो कद मिल्ये बाड़ बाई किकर की।
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08. खेल.......
दिन म कबड्डी कुश्ती मारदड़ो
रात न दरसूण्ड, लूणकार, काजिदड़ो
मां बुलाती मो ड़ तो ल्हूक ज्याता
बापू क हे ल पर मा च त ळ छुप ज्याता
इरणा क फूलां म भुण्डिया की खोज
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।

रसड़ी खेलता-खेलता गीत गाता भायला
आपां दोनूं भायला म्हा न मज़ा आयला
चान चक्कर को डा क पुरो होतो ई कोनि
रात न मो ड़ तक टाबर सोतो ई कोनि
घरां आतां ई भारी,बेलण को फुल डोज
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।

हारदड़ो,भुंभरियो,आसपास डाइलोट खेलता
सियाळ म धूंईं खातर छाणा पेली मेलता
मे न आतो तो घुघरी बणाता डोळा मं
आयां ई सरतो बळग्या र क रोळा मं
भेळो कुणबो गमग्यो फेमली को बोझ
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।

इसकूल स्यु पेली घास चाबड़ी ल्याता
घी, दूध अर धहि चाव स्यु खाता
खेलरा, मंगोड़ी,फोफलिया चणा का होळा
इब क टाबर न कवां तो बतावं भोळा
कुव पर चलती भूण ज्यूँ बाजता अळगोज
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।

प ठ को पजामो लिलम की कमीज मिल ज्याती
नुई टायर की चप्पल आंख्यां खिल ज्याती
गूद ड़ मं पूर घालतां बेटी कयो फाटेड़ा सिंवो
डैडी अम्मी थे कुण स जमा न म जीवो
खैर टेम सारू जीणो के ओळमो रोज
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।
                  ************
09. चूरू........
चूरू बसायो चौधरी चुहार जाट क नाम
पहले इण से बसी ढाणी कालेरा नाम।

आ बस्यो एकलो बांधी टिब्ब पर ढाणी 
अठ को दिन सुहाणो सुरूप अठ की शाम।

ढाणी स्यूं मजरों बणयो मजर स्यूँ गाम
गोपाल दास ने पेड़ लगाए धरे कंधे ठाम।

धर कूंचा धर मजला बढ्यो चूरू मुकाम
मंदर मजित बणि अ ठ नाथ जी को धाम।

चूरु क गढ़ स्यूँ चाल्या चांदी का गोला
हेत प्रेम मिजबाणी स्युं अणहेत प लगाम।

कांदा खाया कमधजा चली अठ की बात
टिब्बा पर मोर ना च ठंडी टाप की छाम।

कॉलेज बणाई बाग लगायो लोहियो सेठ
चूरू होसी चौगुनो जिगर क र सलाम।
                  ***********
10. टिंडसी......

हरी काची टिंडसी
पाकी लाल मतिरी
ग्वार मोठ की कुड़ी लगी
बाज र की पंजीरी
च्यार पांच भेंस्या बंधरी
गायां बंध रि आठ
रेवड़ चरे खेतां माई
बकरी पा पाली साथ
मा च सा र हुको मेल्यो
अ गांव का ठाठ
*********************************
11. ढोला.....

साहित्य के ढोला 
और मारू और आज 
की स्थिति 
ढोला मारू राजस्थानी 
भाषा का प्रसिद्ध 
प्रेमाख्यान है
प्रेम गीत है।
नरवर के राजा नल के 
तीन वर्षीय पुत्र 
राजकुमार 
साल्ह देव 
कुंअर धोला राय 
जो बाद में ढोला 
और अपभ्रंस
 नाम ढोला और 
पूगल के 
राजा पिंगल
 जिसके नाम से
पिंगल साहित्य का 
जन्म हुआ
की डेढ़ वर्षीय पुत्री 
राजकुमारी मरवण 
मरू का अपभ्रस मारू
का विवाह कर दिया गया।
यौवन काल में दोनो के
मिलने की कहानी 
इस 
प्रेमाख्यान में 
सुरुचिपूर्ण
कर्ण प्रिय 
राग में गई 
जाती है।
आज कल राजस्थान में 
इस प्रेम गीत को 
बदनाम कर 
ढोला मारू नाम से 
शराब के पव्वे बिकते हैं 
*******************************
12. कुं कुँ पत्री......

क्षमाशील अर दयावान अल्लाह के नाम स्यूं शुरू।
पीथूसर र पगल्या पलक बिछाव सहजूसर चूरू।।

शमशेरखां,मुस्ताकखां जंगशेरखां,गनीखां,यूसुफखां जागीरदार। 
नवाबखां,हिदायतखां, हबीबखां,हमीदखां,हकीमखां सरकार।।

महमूदखां,मुसकतखां आदिबखां,मोईनखां,जहीरखां, भुरन्याण।
ऊंचो नाम जैनदीखां रो धणी भाला तलवार अर कृपाण।।

आजमखां,शेरखां,इलियासखां, कय्यूमखां,गनीखां री सीख।
अकबरखां,अकरमखाँ, अहसानखां,शोयबखां,साहिल करे उडीक।।

समीरखां,मकबूलखां अजीजखां, मुमताजखां, इस्लामखां बड़ भाग। 
इन्तजारखां,हिदायतखां,सदीकखां, रमजानखां,महबूबखां री पाग।।

युनुसखां,भवरूखां,अहमदअलीखां,मुमताजखां, लियाकतखां सरदार।
रोजा,प्रेरणा,मुस्कान,मेहर,माहिरा,आहेिल,आहिद,राहिल,नदीम अल्फाज का प्यार।।

सगा समधियाँ न सलाम करां झुक झुक बढ़ावा माण।
फूल बिछाया गेला मांय आप पधारो मूछ्यां ताण।।

जोग लिखी संजोग लिखी लिख दी सारी बातां।
पावणा की उडीक मं म्हे जागां सारी रातां।।

शूरवीर बुरहान। खां जी री शूरवीर घण आल।
ढोल धमाके स्यूं अयां आज्यो बणज्याव मिसाल।।

पोती सलमा बानो अर भालू खां विधायक साब की।
थाल भरे घण मोतियां मोतियां सी आब की ।।

अंजली लाडो रो ब्याव मांड्यो साल 23 मास 5 दिन बीस।
बखत सांझ रो 5 बजे थे पुगो जद पुल घड़ी इक्कीस।।

पोता सायरा बानो अर अशरफ खां जागीरदार।
हिल -मिल चालां सगला सा ग भर्यो- पूर्यो परवार।।

कोडिला कंवर आदिल खां आमिनबानो शमशादखां रा सपूत।
संग बरात रे पधारज्यो मिनखां की न गिणती न कूंत।।

नाच कूद करो मोकळी सहनाइयाँ घणी बजाइज्यो।
निकाह टेम 7 बजे तक आप म्हार डेरे आजाइज्यो।।

टेम सारु थे सगोजी आस्यो जद मोती बरसे मेह।
मान आपणो बढ ज्यासी और बढ़सी घणो स्नेह।।

थोड़ो लिख्योड़ो घणो मान ज्यो गलती री खम्मा घणी।
म्हे बेटी का बाप साब जी थे म्हार सिर का धणी।।

जिगर मन म हरख जगाव बन्यो सौ साल को सीर।
भाल पर पाण रुके ज्यूं अलावदी री शमशीर।।

 शमशेर भालू खां (गांधी)
      जिगर चुरूवी
********************************
13. सूत......

उलझेड़ो सूत
बिगड़ेडो पूत
कालियो भूत।
दाबनो चोखो।

भैंस को धीनो
फाटेडो सीनो
भायाँ मं जीनों
राखनो चौखो।

भाग्येडी लुगाई
अंगडायेडो जवाई
तारीख गईडी दवाई
बगानी चौखी।

कानिये ऊंट न
बात मं झूँठ न
आ ल ठूंठ न
बालनो चोखो।

काढ़े पाणी
गे ल पर ढाणी
चीज़ पुराणी
होयेडी चौखी।
*********************************
14. रोक्या..

गुवाड़ रोक्या जोड़ रोक्या रोक्या गेला सारा।
आगे बढ़ कर बडा बो लं गांव का नेता म्हारा।

छो ट की के बात करो छोटी म्हारी नीत।
कोई म र दर्द स्यु जद म्हे गावां गीत।।

पिछाण करो खुद की थे के कर्यो आज।
किं को भलो कर्यो क ऊपर उ ठ समाज।।

दु तो क र बात पराई मचाई रा ख ऊध।
छा को बो दूध बणा दे पाणी को दूध।।

आपणी खा की जोर क र ढो ळ पूरो ज्ञान।
दे खीरन म मुसळ कोई जाण न पिछाण।।

माँ ममतामई तावड़ी बाप बादळ सो बर स।
आँ की सेवा न करी बो मेवा न तर स।।

आडो बोल माड़ो कदे न किं न बोलणो।
प्रेम रस बरसे जद हिये कपाट खोलणो।।

मंगता न मत नटिज्यो जे कोई मांगण आयो।
आटो होव या माल पूवा मिल बेठ खायो।।

धरती का बोझ जिका फो ड़ न कदे फ़ळी।
घर मं ब ब ण तमाशो बात बणे गळी गळी।।

लड़ाई की टाळ करो अ र गन्दगी न बूरो।
जे काम उचेड्यो कोई तो ना छोडो अधुरो।।

खच्चर गधा दाम दे पर क खाया ब दे।
गुवाड़ को जायोड़ो किं न बापू क दे।।
*********************************
15. चोखो....

घोड़े न सवार
मा च की निवार
वीणा को तार
ताणेड़ो चोखो।

रिश्ते मं नानी
कुतर और छानी
महात्मा दानी
छाणेड़ो चोखो।

ब री को घाव
कुश्ती को दाव
सासु को चाव
पिछाणेड़ो चोखो।

मन को उन्माद
दाद और खाज
खराब रिवाज
मिटायेड़ो चोखो।

घणो गिलो आटो
जांटी नी च साटो
ख ळ मं लाटो
सुकायेड़ो चोखो।

घालेड़ो नुतो
खुद को बुतो
पग को जुतो
आयेड़ो चोखो।

गे ल को फेरो
बात को बेरो
भायला का घेरो
बढायड़ो चोखो।
*********************************
16. काड..

घाल मं घाल काड मं काड
सदा ईं दूबळ न दो साड
माड़ी बोली क हो आगळ
अर घर क राखणि आड
सदा ईं दूबळ न दो साड।

घड़ो फूट की घेर मि ल सी
शेर न सवा शेर मि ल सी
कदे पाप को घडो फुटसी
टेम आण तक राखो ठाड
सदा ईं.......

कीं संग हंस ले लडोकड़ो
कदे पांगरयो के बळोकड़ो
ईस्या कदे न हँस घडाया
फ़ाबड़दू को धींगाणे लाड
सदा ईं ........

भाग्य रेखा मिटती देखी 
म्हे घणी श्यार पिटती देखी
क्यूँ करां कीं स मेलो माथो
आओ देवो भरम न गा ड
सदा ईं........
*********************************
17. राज...

भु बेटां को आयो राज बता दियो नोरो
म्हे कयां काटां साब बुढापो घणो दोरो।
म्हे .......

बुढ न आव खाँसी जग मं घलगी हाँसी
पोळी मं घाली खाट बिछा दियो बोरो।
म्हे ......

खाण पीण को शौक पण लाग ग्यो रोग
फिको खावां खाज ने ड़ घड़ो कोरो।
म्हे....

टाबरिया ख़िलावां म्हे पालणो हिलावां
एक हाथ मं डाँग अर गोदी म छोरो।
म्हे.....

टूट्या गोडा अंग म्हारो कलूंट ग्यो रंग
बैठ्या मारां सांस इब ढळ गयो तोरो।
म्हे....

बूढली स्यु बात म्हारो दिन-रात को साथ
बैठ्या करां चहःल म्हारो क ट टेम सोरो।
म्हे.....
*******************************
18. परखो....

परखो तो कोई आपणो नहीं
न समझो तो सगळा पराया
आपण म सारो जग आपणो
नहीं तो कोनी माँ का जाया

कम बोलो अर स न जितो
थे काटवां पर कदइ ना रूठो 
पीळो सोनो पीळो इ पीतळ
साँच न कद दाब स क झूठो

मुळक'ता मोट्यार सिर पागड़ी
रहव मस्त खा मोठ की राबड़ी
बै ठ गुवाड़ म लँगोट को साँचो
बिं की निंदा बाड़ म जा बड़ी

तीरिया कोई प चलाओगा थे
तो घणा इ दुःख पाओगा थे
टेम बे टेम को राख क ध्यान
मान सम्मान स्यु आओगा थे

देइड़ी सीख कद ला ग भाई
भलो इ म क करो समाई
झुकन म प'ल रुकण म देर
समय की बात समय को फेर

आंख की हुरक जाण ना द्यो
फरक बात म आण ना द्यो
अगरी बेटा न मचाण ना द्यो
बात न घणो थे ताण ना द्यो 

बिराणी बात उल्टी केओ ना
पोत घर को कदइ देओ ना
मिल बैठ मिटाओ अणबण
दुष्मणी कोई स्यु सेओ ना
*********************************
19. पेली अ र इब....

दिन म कबड्डी कुश्ती मारदड़ो
रात न दरसूण्ड, लूणकार, काजिदड़ो
मां बुलाती मो ड़ तो ल्हूक ज्याता
बापू क हे ल पर मा च त ळ छुप ज्याता
इरणा क फूलां म भुण्डिया की खोज
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।

रसड़ी खेलता-खेलता गीत गाता भायला
आपां दोनूं भायला म्हा न मज़ा आयला
चान चक्कर को डा क पुरो होतो ई कोनि
रात न मो ड़ तक टाबर सोतो ई कोनि
घरां आतां ई भारी,बेलण को फुल डोज
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।

हारदड़ो,भुंभरियो,आसपास डाइलोट खेलता
सियाळ म धूंईं खातर छाणा पेली मेलता
मे न आतो तो घुघरी बणाता डोळा मं
आयां ई सरतो बळग्या र क रोळा मं
भेळो कुणबो गमग्यो फेमली को बोझ
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।

इसकूल स्यु पेली घास चाबड़ी ल्याता
घी, दूध अर धहि चाव स्यु खाता
खेलरा, मंगोड़ी,फोफलिया चणा का होळा
इब क टाबर न कवां तो बतावं भोळा
कुव पर चलती भूण ज्यूँ बाजता अळगोज
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।

प ठ को पजामो लिलम की कमीज मिल ज्याती
नुई टायर की चप्पल आंख्यां खिल ज्याती
गूद ड़ मं पूर घालतां बेटी कयो फाटेड़ा सिंवो
डैडी अम्मी थे कुण स जमा न म जीवो
खैर टेम सारू जीणो के ओळमो रोज
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।
*********************************
20. भरतार......

ना घड़ाया हार सिणगार
थे के करयो भरतार।

रखड़ी हंसली बाजूबन्द
मेरी माँ क स्यु ल्याई
र जुल्मी बा ई बेच खाई
मांगूं पाछी टूम ठीकरी
चढाई बात गिगनार
थे के करयो भरतार।
ना घड़ाया....

किनखळ होगी बडी
चाइजै गंजी जांघियों चड्डी
पीसणो पोणो पकाणो दोरो
मे र होग्यो घणो फोरो
आ बेजा मं ग वा ड़ की मार
थे के करयो भरतार।
ना घड़ाया...

मेळ मं कदे घुमाई कोनी
खर च की समाई कोनी
चवन्नी थे दिखाई कोनी
म के थारी लुगाई कोनी
था न कियाँ कउ सिरदार
थे के करयो भरतार।
ना घड़ाया.....

दो रो सो धाको धिकाउं
जवानी मं बुढापो दिखाऊं
ढां ढें की तरया अरड़ाउं
बिगड़ी छा को के बणाऊं
फेर नेतागिरी को बुखार
थे के करयो भरतार।
ना घड़ाया....

कर्जो ले की थे पीओ घी
पाछा देता दोरो जी
शर्म था न आवे नी
लङ्गाटेर लाग ज्यावगी
फेर आ मोदी सरकार
थे के करयो भरतार
********************************
21. पिया जी......

सासु जी थे बेटो-बेटो मत ना करो सा
ओ बेटो हो थारो अब पिया जी म्हारो है।

पोतड़ा लिप्टयोडो बाबू सूट को बेटो थारो हो
इब जीन्स टी शर्ट सूट हारो मास्टर म्हारो है।

चुंगतो थारे पीतो बोतल दूध बाबुडो थारो
पब मं लेव पैग पर पैग बो मिस्टर म्हारो है।

नानको जिको स्कूल जावंतो रोया करतो
इब बोले फर्राटा इंग्लिश ज्यानू म्हारो है।

राबड़ी स्यु धापणियों भोळीयो थारो हो
इब खाव पिज्जा अंट शंट हब्बी म्हारो है।

मुन्नों थारो हो क्या जोगो क्यां जोगा हा थे 
जागते को खोल ले ज्या ऊंट बालम म्हारो है।

न थे भला हा न थारो ओ टोरड़ो सो जायो
म्हे बणायो एटीएम तो सायब तो म्हारो है।
*********************************
22. टेम......
चुल की रोटी देख याद पुराणी आगी
टेम माड़ो आग्यो रोटिया न सैंडविच पिजा बर्गर खाग्यो।

 मास्टर जी कनोई पक्का ई बात को सबुत म्हार कन आज ही पड़यो पाग्यो
खासोली हार खेत मे मं सब्जी बनाई मास्टर जी रिवर बनाग्यो।

खाण पिण का मास्टर जी सदाही सोकिन हो 70 रसगुला तो मास्टर जी गिण की रवाग्यो।

मास्टर जी को विकराल रुप देख पुरसगार क पसिनो आग्यो 
मास्टर जी कह्यो 70 80 रसगुला मजाख मजाख म ही खाग्यो।

के बतावा मास्टर जी जमानो माड़ो आग्यो 
ई थारल चुल न तो गैस सलेन्डर खाग्यो।
*****
23. खेल तब के....
दिन म कबड्डी कुश्ती मारदड़ो
रात न दरसूण्ड, लूणकार, काजिदड़ो
मां बुलाती मो ड़ तो ल्हूक ज्याता
बापू क हे ल पर मा च त ळ छुप ज्याता
इरणा क फूलां म भुण्डिया की खोज
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।

रसड़ी खेलता-खेलता गीत गाता भायला
आपां दोनूं भायला म्हा न मज़ा आयला
चान चक्कर को डा क पुरो होतो ई कोनि
रात न मो ड़ तक टाबर सोतो ई कोनि
घरां आतां ई भारी,बेलण को फुल डोज
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।

हारदड़ो,भुंभरियो,आसपास डाइलोट खेलता
सियाळ म धूंईं खातर छाणा पेली मेलता
मे न आतो तो घुघरी बणाता डोळा मं
आयां ई सरतो बळग्या र क रोळा मं
भेळो कुणबो गमग्यो फेमली को बोझ
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।

इसकूल स्यु पेली घास चाबड़ी ल्याता
घी, दूध अर धहि चाव स्यु खाता
खेलरा, मंगोड़ी,फोफलिया चणा का होळा
इब क टाबर न कवां तो बतावं भोळा
कुव पर चलती भूण ज्यूँ बाजता अळगोज
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।

प ठ को पजामो लिलम की कमीज मिल ज्याती
नुई टायर की चप्पल आंख्यां खिल ज्याती
गूद ड़ मं पूर घालतां बेटी कयो फाटेड़ा सिंवो
डैडी अम्मी थे कुण स जमा न म जीवो
खैर टेम सारू जीणो के ओळमो रोज
इब ख ट ब मजा किज्यां बा मौज।।
***
24. बटाऊ......

गे ल का बताउड़ा
एक काम करतो जाई
खड़ी उडी क गोरड़ी
थ्यावस बीं न धरतो जाई।
गे ल का ....

चूड़ी टिमकी बाजूबन्द
चीजां घणी ल्यावगो
क देइ त न याद कर हो
जल्दी ई घर आवगो
रो ण लाग्जया प्यारी तो
थ्यावस बीं न करतो जाई
गे ल का ......

टाबरां न सुल्याँ राखी
बुढियाँ को राखी ध्यान
आय ड़ बटाऊ को करिजे
श्रद्धा सारू सम्मान
सुदयां को चाले ड़ो
कलेवो तू भी करतो जाई
गे ल का.....

गा-भंस्यां को खाइयो दूध 
चोखो खाइयो घी
खेतां की सँभाळ करियो
लाग ज्यासी जी
गांव क गुवाड़ भेळ
बातां म्हारी करतो जाई
गे ल का......

दिन काम म काटां
ओवर टाइम लगावां हाँ
चिंता की कोई बात न ई
बोळो सारो कमावां हाँ
सिवा ण क जो ड़ मं उतरतो जाई
गे ल का.....

ड री मं गुंवार बाइयो
धूळीये मं तेड़ो
था र स्यु न संभळ तो
हिस्स दे दियो खेड़ो
बापू क धोक धरतो जाई
गे ल का.....

काका बाबा ताऊ ताई 
मिलणीय सगळा भाई 
गांव का टाबर लुगाई
लाड क ड़ भाई भुजाई
खातर क्यूँ न क्यूँ लेतो जाई
गे ल का ......
*****
25. टाबरिया......

टाबरिया
कदै चोखा
कदै खोटा 
लागें

बीं घर को 
के होव
ज ठ टाबरिया
न होव

टाबरिया
रो त न
हंसा दीं
कदै-कदै
इसी बात पू छं
बडौड़ा न 
फंसा दीं

टाबरिया
आं न थक ण को
बेरो कोनि
जाण स बात
आंकी आंखां मं
अंधेरो कोनि

टाबरिया
रो ळ म जा ग
टाबरिया
चालता सोज्यां
सुत्या भा ग

टाबरिया
आळ स्यु दिवा ळ म
कदै ओब र म
कदै
मा ळ म

टाबरिया
खोटो कर तो
बता व कोनि
अ तो खेल क सिवा
क्यू चा व कोनि

टाबरिया
पाँच रोटी खा की क
भा व कोनि
मां न क
तू धपा व कोनि

अ टाबरिया
चोखा लाग्या
अ टाबरिया
मे र मन
भाग्या
टाबरिया
*****
26. परायों माल ...

परायो माल आपणो
क वं ब अफसर होवँ
अ घुस लैण को कोई
न मोको अवसर खोवँ

इण न बढ़ा ण म
जन कम कद रह व।
आपा देवा इ न तो
अ की कन ले व ।

इ बीमारी स्यु बिना
पढणिया पास होया
न लाग्यो रोग जि क क
ब सदा ई रोया।

मरेड़ा न जीवा दे
जीवता न मार स क ह
आ प्लेन चारो चीणी
क्यू ई डकार स क ह।

बैंक लोन ऑफिस बिल
कढाणियो चाइये
कीमत सब की है
लगाणियो चाइये

घुस स्यु राबड़ी उ
कान चेप स क हैं
घुस दिया संसद के
देश बेच स क हैं।

भाया आंख मीच
कान ढक होठ सीं ले
जी णो है तो फीस दे
मजा ले ठाठ उ जी ले
****
27. थारे 
सा ग चालसी पग-पग था र
क्यूँ जी ण न भाठा स्यु मा र।

आंख खोल नजर पसार की देख
कुण त न काट्यो कुण राखी रेख।

पाळ म आँच कन सगळा आव
त न आँच आव जद कुण बचाव।

बळद! सोचण की बात है थोड़ी
क्यां खातर तूं इं की नाड़ मरोड़ी।

तू ल्यायो ना ल्यायो आ बणायो
आ ते र टाप र न घर बणायो।

छा क स ख ळ तक के बाकी राख्यो
तू हीं डाकि मन न डाकि राख्यो।

आ हळद फळद तू सुणी सूंठ हैं के
पल्या तो आदमी हो इब ऊंट हैं के।

स बदळग्या तू बी बदळज्या
लाडी टेम सारू बरत ढळज्या।

ताण म ताण मि ल जद ताण बराबर
ग्रहस्ति राख ताखडी सी काण बराबर।

तू इ स आ ते र स्यु पूरी है।
दोन्या की जिंदगी एकली अधूरी है।

उठ हाथ पकड़ अर सा ग चाल
न आ पीछे न तू आ ग चाल।
*****
28. दोरो......
सदाइं ओछो ल ड़ उधारों मां ग।
झुझनिये खातर अंबर टां ग।।

तेरी मेरी नित नुई बिना न आव डा।
लाग्या र बस तेरा बंगण मेरी छा।।

चिड़पडो सुहाग कद तक धि क।
रेशम के भाव डोवती कोनि बि क।।

अड़कचूंटला कद कीं का होया।
फूटेड़ा जाग्या फूटेड़ा सोया।

आ तो रीत है चेपणीया चिप ज्यां।
ताकू को के सेकणीया सिक ज्यां।।

पाव चून चोबा र रसोई।
गेर दी लोई के क र कोई।।

घ ण स्या ण कागल म के हो व।
चोर की माँ घ ड़ म मु दे कि रो व।।

चूर णीया को राख सणप को डाम।
भो ळ भाइ ल अर सांत र को राम।।

बैठ्या नइ तो खड्या दिख्या के।
गुणमुन गट्टा स्यु आं क सिख्या के।।

कुण रा ख़ बेरुं, रूंखडी अड़क गुंवार।
घणा बडेड़ा बाळ की करा द्यां सुंवार।।

चणक पडज्या जद झटकों देणो।
सुथरा धो की गाबा फटको देणो।।

सुदी सिबकली घणा ज्यानबर खा।
लिछमण क खटाई के सूर्पणखा।।

बिना राई क प्हाड़ बणास्यां ।
तिल कोइनी ताड़ बणास्यां ।।

ऊंट क दाँवणो देणो दोरो।
गुणा को भरज्या के बोरो।।

साँच न कदे न आँच आई।
भम की बणी कोनि दुवाई।।
*****
29. किलकली

दोपारां की किलकली
ताती चा ल लू
पाणी भीजी टापली
बेठां मं अर तूं।
***
30. गोरड़ी.....….

उणमणि सी गोरडी
सायबो बैठ्यो पास
हिंडो सू झ नी लहरियो
बर स जद की आस।
***
31. भाव......

भाव विरह का
विरहणी जाण स क
पढ़ की लिख की
कोई के बखाण स क
*****
32. झोटो........

ठाइ ठाइ बाजरी
ले व कामिनी झोटो
मोठ ग्वार स्यु खेत भर्यो
मे व ड़ को भरोसो
*******
33. मिनख.......

 गुलचुपरा मिनख
म त हांसणी लुगाई
पग काटनी मोचड़ी
ती नू प र बगाइ
****
34. चांदनी.....

चौमासे की चांदनी
छिदा पसरया मोठ
पीव मिलेगी गोरड़ी
चंदा कर ले ओट
*****
35. फरक......

जिकां की कथनी करणी मं फरक
सुरगां की छोडो मी ल कोनि नरक।
मि ल कोनि दाणो ज ठ बता व टरक
जिकां की.....

खाली खोटो टेम क र डींग बे टेम क र
मिनख मार की धरम नेम क र
कोई क्यूँ क दे तो कनपटी ज्याव सरक
जिकां की.....

पोथी फो ड़ कोनि थोथी झा ड़
कोई पर बस न चा ल कपड़ा फा ड़
माया देख की ज्यावँ हरख
जिकां की.....

बड़बड़ बो ल बडा मन बितो खोटो
ओरां न क ता फिरं भ र कोनि लोटो
सूणा दि ख खोटी बर्फी पर बरक
जिकां की.....

म तो कऊ छोडो बिराणो जीकर
आपणो आपो देखो पा छ ल्यो फिकर
मालिक भी आं स्यु ना कर्यो तरक
जिकां की.....
*****
36. नैण...
नैण झर झर झरे
गोरी हुलसाये जीव
बिरहण उडीके एकली
घणी साल स्यु पीव
*****
37. टिंडसी.......
हरी काची टीन्डसी
पाकी लाल मतिरि

ग्वार मोठ की कूड़ी
बाज र की पंजीरी

40-50 बकरी बंध री
भँस्यां बंध री आठ

मा च सा र हुक्को 
अ गांव का ठाठ।
*****
38. पुरस्कार.......
पुरस्कार स्यूँ इतराइयो मत
तिरस्कार से घबराइयो मत।
बिना बुलाए क ठ जाइयो मत
थक्या हो पण रुक ज्याइयो मत।

ओ थारो करणो कराणो
लोग गा व दरद बिराणो 
अकल बिना ऊंट उभाणो
जग न भाया हंसाइयो मत
थक्या हो पण रुक ज्याइयो मत।

कपास को गाबो कद बण्यो
कट्यो कुट्यो ताण पर तण्यो।
हे माता थे पूत सपूत जण्यो
भाया सा ग लठ बजाइयो मत
थक्या हो पण रुक ज्याइयो मत।

ल ड़ न न बरियां बिछड़ियो ना
आ ग रह्ओ पिछड़ियो ना
बात बात मं उखड़ियो ना
घिचोल की खिचड़ो बणाइयो मत
थक्या हो पण रुक ज्याइयो मत।

थे भ न मार की आ ग ब डो
छोड जमारो पेड़ी च डो
आदमी को के छोटो बडो
बलेड़ न जलाइयों मत
थक्या हो पण रुक ज्याइयो मत।
******
39. रत्ति तोला मासा......
एक रत्ती रोला, मासा म रत्ति आठ
बारह मासा को एक तोले को बाट।

रत्ति मासा तोला काम लेता सुनार
बड़े बाट से किराणा को व्यवहार।

पांच तोळे की छटांक अनाज को ढेर
सोलह छटांक स्यूँ बणगी एक सेर।

पांच सेर की धड़ी बणी सी पूरी
चार धड़ी में एक धूण तौल पूरी।

दो धूण स्यूँ आव एक मण प कांटों 
पहले कोनि हो ग्राम किलो को आंटो। 

एक रत्ति मं 0.12125 ग्राम बजन
शेष न गुणा भाग कर बो सज्जन।
*********
40. #किसान_ क्लेम_टोकन

कछुव क जोड़ाँ हळ बांस को
बीमा क्लेम टोकन की फांस को।

मैं बोल्यो र मत नाचो ईतो 
था रो कोनि पोदीनो घास जितो।

थे कदेई कोई बात कोनी मानी
कर दी सारी धूळ धाणी राख छाणी।

अ ब'रीड़ा अगरी घणी घाली
इब मोट्यारो बात होगी का'ली।

क'व शमशेर क टेम पर जागो
किसान आंदोलन को करल्यो सागो।

लांबी सड़क पगां नापणी पड़सी
सरकार की राफ़ाँ मं डांग देणी पड़सी।

चेतो राखो नेतावाँ क इब धरांगा डांग
धोखो करणिया को काडांगा सां'ग।

नेता के होया अ होग्या नू की फांस !
बिना ए'क चे'त, टे'क बं'ट कोनी धांस।

लगाई घणी फसल पण के बंट्यो
टोकन कटा की नाज लेणऊं नट्यो।

आज्याओ एसडीएम कलक्टर न घेरां 
सरकार का टायरां न पाछा फेराँ।

जिगर इब तो आं की चमचागिरी छोडो
कमजोरी मं मां ग दो बार मोडो।

मं तो चाल्यो थे जी प'ड़ तो आओ 
नई तो अफ़्सरां क गट्टा गो'ली खाओ।
**********
41.. अरावली 

जै अरावल जै रजपुताना - 

सुण सिरकार मत कर बावल
कोरो भाठो नहीं अरावल
मान राखजे इण रो सावल
बांधण री ना कर उतावल
लड़ मेवाड़ी आण खोल द्यो
जै एकलिंगजी री बोल द्यो।


अरबां बरस रो ओ खूंटों
सरजीवण है बूंटो बूंटो
थे मतना आ माटी चूंटो
दावो  सो मीटर रो झुंटों
जन्मभौम रो पाछो मोल द्यो
जै एकलिंगजी री बोल द्यो।


रणथंभौर रो है मान ब ठ है
हल्दीघाटी को मैदान अठ है
बा चेतकड़  री शान क ठ है
मीरा गाती गुणगान ज ठ है
सो न पर मूं ग रो  झोल द्यो
जै एकलिंगजी री बोल द्यो।

रायसीना थे इब के चावो 
सुकड़ी,साहिबी,लूणी बचाओ
आओ सगला मिल कर आओ
इण धरती रो करज चुकाओ
खोल हाथियां की न्योल द्यो
जै एकलिंगजी री बोल द्यो।

रूंखां न बचावणियां थे तो
बातां पर मरज्यावणिया थे तो
सुण पुकार आवणिया थे तो
माथे माटी लगावणिया थे तो
जिगर लुटेरां न मत पोल द्यो
जै एकलिंगजी री बोल द्यो।
******

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