लघुकथा - सती शाम का समय, मलिकपुर गांव में मातम पसरा था। गांव वाले दीनू के घर की ओर चुपचाप चले जा रहे थे। घर के हर कोने में खुसर - फुसर करते पांच - सात लोगों का झुंड आगे क्या करना है के बारे में योजना बना रहे थे। 35 साल का दीनू सिंह फटकार के कारण पुले उतार दिया गया। दीनू सिंह की पत्नी रमा और उसके दो बेटे बेसुध थे। अच्छे खासे घर की पोल के भींटके लग गए। बड़ा बेटा कल्याण सिंह दस और छोटा नारायण सिंह सात साल के थे। खेत में पालीदारों को संभालने गए दीनू सिंह को अचानक ओपरी छाया ने तोड़ डाला। बड़े बुजुर्ग जवान विधवा बहु को देख - देख कराह रहे थे। गांव के ठाकुर मालम सिंह ने परिवार के सब से बुजुर्ग राधे सिंह के कान में कुछ कहा और राधे सिंह ने गर्दन हिलाते हुए स्वीकृति दे दी। मालम सिंह ने पांच - सात युवाओं पोल के बाहर बुलाकर और बड़े गांव के सेठ की दुकान से सामान लाने के कहा। ठाकुर मालम सिंह गांव का सब से होशियार और समझदार आदमी है। अंग्रेज बहादुर के लिए माल उगाने का काम वही करता है। जमींदारों और जागीरदारों के झगड़े सुलझाना उस का मुख्य काम है। अंग्र...