Skip to main content

झोड़ झगड़ा चूरू

01. शुरुआत में निजाम खान की कोई गलती नहीं रही।
2. जमीन के मामले में लोग इकट्ठे हुए, मामला सुलझाया, 50000 अयुब खां के जुर्माना किया। दोनों पक्षों की सहमति हुई।
3. खेत की पातीं निजाम खान के खेत के लगती दी, निजाम खान पहले सहमत थे, परन्तु बाद में इंकार कर दिया।
4. याकूब खान की बात सही, मुस्ताक खान पुत्र अलीम खान परंतु 50000 रुपए तय नहीं हुए।
5. निजाम खान नूरे खान ने बात की तब निजाम खान आलिया ने स्वीकार किए।
6. मुस्ताक खान अलीम खान के अनुसार निजाम खान के विरुद्ध पुलिस में सभी गवाही देने गए, अयुब खां ने कहा जमीन की बात नहीं, जहां चाहें वहां ले लें। निजाम नूरे खान ने मुस्ताक खान से पूछा कि अब आप सुलझाव करते हैं तो निजाम खान आलिया की जिम्मेदारी कौन लेगा, मुस्ताक खान ने कहा मैं जिम्मेदारी लेता हूं। मुस्ताक खान ने कहा जमीन वही ओर लगा खर्चा अयुब खां देगा, सब ने मंजूर किया, पुलिस में लिख कर दिया, मुकदमा वापस लिया गया। थाने में रकम दी वो निजाम ने दिए। मुस्ताक खान ने कहा अयुब खां से मैने कहा वो पैसे दे कर सलटा दो। इलियास मानत खान ने कहा बात हुई। अल्लादीन खान ने निजाम नूरे खान से पुलिस वालों को खर्चा देने का कहा, अयुब खां ने अभी तक रकम तय नहीं हुई।
7. याकूब खां ने पूछा कल क्यों लड़े,  
8. राजीनामा हो गया परन्तु ट्रैक्टर वाले से राजीनामा नहीं हुआ, ट्रैक्टर वाले के माफी मांगने पर सहमत नहीं हुआ। ट्रैक्टर वाला गिरफ्तार हो गया जिसे निजाम खान आलिया साथ थाने ले कर गए थे।
9. निजाम खान को मारने गए, खेत बताया पर खेत में से रास्ता रोक दिया, निजाम खान आलिया ने कहा, मेरा फैसला करवा दो रास्ता ले लो। विवाद हुआ। 
10. निजाम खान ने खेत ठेके पर दिया, गाड़ी स्कॉर्पियो पीछे लगा रहे हैं लगभग तीन दिन से, यासीन खान सहित गाड़ी पीछे दी। खेत बा ने गए तब पहले दोनों तरफ से पाइप निकाले, दिलशाद (अब्दुल्ला) ने मुंह से हल्की बात की, मैने उसे रोका, उसे मैने थप्पड़ मारा, तब दिलशाद ने स्टिक से मारा।
11. 35000 रुपए दे दो और ट्रैक्टर वाले को छुड़वा लो निजाम खान आलिया।
12. लड़ाई खेत में नहीं खेतानी खेतानी जोहड़ी में हुई।
13. थाने का खर्चा देने की रकम तय नहीं हुई।
14. इस्पाक ओर दिलशाद के चोट आई
15. ट्रैक्टर की टक्कर से स्कोर्पियो तोड़ी।
अयुब खां 
17. खेत में किसी को जाने नहीं देते। पड़ोसी को भी, रास्ते के अलावा।
18. दाउदसर के आदमी को खेत बताया, पर खेत नहीं जोतने दिया।
19. ट्रैक्टर वाले को गिरफ्तार करवाने के बाद सब बातें खत्म।
20. रतनगढ़ में गुलाम नबी के अनुसार असल जमीन देने के बाद निजाम खान आलिया ने पैसे लेने से मना किया।
20. अयुब खां आदि ने जमीन निजाम खान आलिया के नाम करवा दी, तरमीम करवा दी।
21. रफीक खान और गुलाम नबी के अनुसार खर्चे की बात नहीं हुई।

#निजाम खान आलिया के आदमी
इनायत खान आजम खान
हनीफ खान सलेम खान
मुस्ताक अलीम खान
रमजान भीखन खान
हबीब खान सांवत खान
निजाम नाजिर खान

#अयुब खां पक्ष - 
गुलाम नबी खान पुत्र पिरु खा
निजाम खान नूरे खान
मुमताज खान यासीन खान
अरशद मोहब्ब अली खान
याकूब खान भादर खान
रफीक खान मजीद खान
बात चीत रात आठ बजे शुरू हुई। सभी पक्ष के 12+ अयुब खां, निजाम खान और मजीद खान राणासर, नवाब खान ब्रजंगसर, अजीज खान शिमला, अजीम खान चूरू, नवाब खान चुरू व शमशेर भालू खां सहित 20 आदमी बैठे।
निजाम खान आलिया ने शुरू किया - 
1. Kgn स्टोन का वर्ष 2010 से 2015 तक 2% कमिशन रकम 179 लाख का कुल 360000 रुपया बकाया।
2. खेत बुआई के 35000 खर्च के हिसाब
3. वहीं जमीन जो हनीफ से खरीदी लूंगा।
4. मेरे खेत में से रस्ता देने हेतु तैयार।
शेष क्रमांक 2 से 4 तक सभी राजी परन्तु पहली शर्त पर बैठे हुए लोगों में से कोई राजी नहीं हुआ। इस तरह सुबह के चार बज गए।अयुब खां ने सभी शर्त बिना अन्य शर्त के स्वीकार कर लीं।
सभी ने स्वीकारोक्ति पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए। 
बात हुई थी कि इन लिखित लोगों के अलावा कोई नहीं आयेगा परन्तु निजाम खान आलिया के 6 - 7 लड़के बाहर पूरी रात मौजूद रहे, जो गलत था।
थोड़ी देर में निजाम खान मुस्ताक अलीम खान को घर से बुलाने गया, वापस आकर कहा मुझे कोई बात मान्य नहीं। सऊदी से मेरे बेटे आयेंगे वो ही फैसला करेंगे।
सुबह पांच बजे तक वापस आ गए।
निचोड़ - निजाम खान आलिया 100% गलत, बेटों के बस में, अयुब खां की गलती यह रही कि उसने परिवार पर द्यान नहीं दिया।
लिखा - पढ़ी 

Comments

Popular posts from this blog

बासनपीर मामले की हकीकत

इस ब्लॉग और मेरी अन्य व्यक्ति से हुई बातचीत पर मंहत प्रतापपुरी का बयान जीवनपाल सिंह भाटी की आवाज में सत्य घटना सद्भावना रैली बासनपीर जूनी पूर्व मंत्री सालेह मुहम्मद का बयान बासनपीर जूनी के सत्य एवं जैसाने की अपनायत की पड़ताल -  पिछले कुछ दिनों से जैसलमेर के बासन पीर इलाके का मामला सामने रहा है। कहा जा रहा है कि पूर्व राज परिवार की जमीन पर बासनपीर गांव के लोगों द्वारा कब्जा किया जा रहा है। नजदीक से पड़ताल करने पर हकीकत कुछ ओर निकली। जिसके कुछ तथ्य निम्नानुसार हैं - रियासत काल में सन 1662 में बीकानेर और जैसलमेर रियासत के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध में जैसलमेर सेना के दो वीर योद्धा सोढ़ा जी और पालीवाल जी शहीद हो गए। युद्ध के बाद बासन पीर (युद्ध स्थल) तालाब की तलहटी पर शहीदों की स्मृति में छतरियां बनवाई हैं। जैसलमेर के चारों और 120 किलोमीटर इलाके में 84 गांव पालीवाल ब्राह्मणों ने बसाए जिनमें से एक गांव बासनपीर जूनी भी था। पालीवाल ब्राह्मण समृद्ध किसान और व्यापारी थे, रियासत के दीवान सालिम सिंह से अनबन के कारण सन् 1825 में सभी गांव खाली करने को मजबूर हो गए। पालीवाल...

✍️कायम वंश और कायमखानी सिलसिला सामान्य इतिहास की टूटी कड़ियाँ

कायमखानी समाज कुछ कही कुछ अनकही👇 - शमशेर भालू खां  अनुक्रमणिका -  01. राजपूत समाज एवं चौहान वंश सामान्य परिचय 02. कायम वंश और कायमखानी 03. कायमखानी कौन एक बहस 04. पुस्तक समीक्षा - कायम रासो  05. कायम वंश गोत्र एवं रियासतें 06. चायल वंश रियासतें एवं गोत्र 07. जोईया वंश स्थापना एवं इतिहास 08. मोयल वंश का इतिहास 09. खोखर वंश का परिचय 10. टाक वंश का इतिहास एवं परिचय  11. नारू वंश का इतिहास 12 जाटू तंवर वंश का इतिहास 13. 14.भाटी वंश का इतिहास 15 सरखेल वंश का इतिहास  16. सर्वा वंश का इतिहास 17. बेहलीम वंश का इतिहास  18. चावड़ा वंश का इतिहास 19. राठौड़ वंश का इतिहास  20. चौहान वंश का इतिहास  21. कायमखानी समाज वर्तमान स्थिति 22. आभार, संदर्भ एवं स्त्रोत कायम वंश और कायमखानी समाज टूटी हुई कड़ियां दादा नवाब (वली अल्लाह) हजरत कायम खां  साहब   नारनौल का कायमखानीयों का महल     नारनौल में कायमखानियों का किला मकबरा नवाब कायम खा साहब हांसी,हरियाणा   ...

✅इस्लाम धर्म में व्यापार, ब्याज एवं मुनाफा

अरब व्यापारी हर देश में हर देश का हर एक सामान खरीदते और बेचते थे। अरब में व्यापार -  किसी भी क्षेत्र में सभी सामान उपलब्ध नहीं हो सकते। हर क्षेत्र का किसी ना किसी सामान के उत्पादन में विशेष स्थान होता है। उपलब्ध सामग्री का उत्पादन, भंडारण, परिवहन एवं विपणन ही व्यापार कहलाता है। क्षेत्र अनुसार इसके अलग - अलग नाम हो सकते हैं। इस्लाम धर्म का उदय अरब में हुआ। अरब क्षेत्र में तीन प्रकार की जनजातियां रहती थीं। बायदा - यमनी  अराबा - कहतानू (मिस्र) मुस्ता अराबा - अरबी (इस्माइली) यह जनजातियां खेती, व्यापार एवं अन्य कार्य करती थीं। हजारों सालों से इनका व्यापार रोम, चीन एवं अफ्रीका के देशों से रहा। अरब व्यापारी पश्चिम में अटलांटिक महासागर से लेकर पूर्व में अरब सागर तक, अरब प्रायद्वीप तक व्यापार करते थे। अरब नील से ह्यांग्हो तक व्यापार करते थे। अरब प्रायद्वीप कई व्यापार मार्गों के केंद्र में स्थित था, जिसमें दक्षिण पूर्व एशिया, भूमध्य सागर और मिस्र शामिल थे। यहां मुख्य सभ्यताएं रहीं -  - सुमेरियन एवं बेबीलोन  सभ्यता (मेसोपोटामिया/इराक) (दजला फरात) की सभ्यता। - फ...