Skip to main content

युनुस खान भारु झुंझुनू हत्या/आत्महत्या प्रकरण

युनुस खान भारु हत्या/आत्महत्या प्रकरण 
नाम - युनुस खान
आयु - 49 वर्ष
पिता का नाम - कैप्टन सुगन खान (आर्मी रिटायर्ड)
निवासी - फरीद खान की ढाणी के पास
हेतमसर रोड, भारु 
व्यवसाय - 
01. 2008 से 2015 तक पहले bsc नर्सिंग, एएनएम, जीएनएम कॉलेज का संचालन
02. 2015 से जयपुर में कंप्यूटर सेंटर का संचालन
03. 2024 से मंडावा रोड़ झुंझुनू पर जेंट्स एवं लेडीज पार्लर का संचालन

आत्महत्या/हत्या - 
 दिनांक 21.07.2025 को हेतमसर से झुंझुनू की ओर जाने वाले मार्ग पर अर्द्ध निर्मित पुलिया पर

घटनाक्रम - 
युनुस खान के पिता सुगन खान रिटायर्ड आर्मी कैप्टन हैं, भाई सलीम खान विदेश में रहते हैं। पुत्र साहिल (शाहरुख) खान महाराष्ट्र में व्यवसाय/नौकरी करते हैं। युनुस खान शौकीन और खुश मिजाज व्यक्ति थे। पिता के लाडले होने के कारण 30 वर्षों से गाड़ी से नीचे पैर ना रखते थे। अभी थोड़े दिन पहले इन्होंने होंडा गाड़ी खरीदी थी।
युनुस खान ने सब से पहले चूरू, झुंझुनू और बुहाना में पंजाब की किसी कॉलेज से संबंधता लेते हुए BSC नर्सिंग, एएनएम, जीएनएम की कक्षाएं लगाईं। इनके साथ वर्तमान सदर थाना झुंझुनू में कार्यरत हवलदार राजेश गोठवाल, पीथीसर के याकूब अली भी इसी काम में लगे थे।
इनके काम में काफी मुकदमे बाजी हुई, लगभग सुलझ गए।
इसके थोड़े दिन बाद जयपुर में रहमान खान के साथ मिलकर कंप्यूटर सेंटर शुरू किया। इन्हीं के समानांतर अब्दुल खान बरजांगसर भी अपना कंप्यूटर सेंटर चलाते थे। कुछ दिनों बाद यह काम घाटे का सौदा रहा जिसे बंद कर दिया।
वर्ष 2024 की शुरुआत में मंडावा मोड़ झुंझुनू पर झाँझोत के किसी व्यक्ति की दुकान किराए पर ली। इस दुकान में ऊपर के माले में लेडीज और नीचे के माले में जेंट्स पार्लर खोला।
यह काम चल निकला। यहां पर निशा तंवर (राजपूत) नाम की एक युवती ने यहां महिला ब्यूटीशियन के रूप में काम शुरू किया। कुछ दिन पहले युनुस ने एक विवाह में वधू के मेकअप के लिए उक्त युवती को भेजा, परन्तु उक्त युवती ने अपने स्थान पर किसी अन्य महिला को भेज दिया। इस पर पार्लर मालिक भड़क गए, ओर युवती को काम से हटा दिया।
युवती ने इस पर युनुस को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। युवती के भाई, मां, झुंझुनू में कार्यरत SI यूसुफ खान और सुरेश गोठवाल ने मिलकर युनुस को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। 18 जुलाई को युवती ने उनके विरुद्ध सदर थाना झुंझुनू में मुकदमा दर्ज करवा दिया।
20 जुलाई को युवती, उसके भाई और मां ने 22 जुलाई को होने वाले बयानों से मुकरने के लिए पंद्रह लाख रुपयों की मांग की (सुसाइड नोट के अनुसार) जिसमें पुलिस वाले भी शामिल रहे।
घटना के कुछ दिन पहले यह युवती कुछ लोगों के साथ उनके घर पहुंच गई। घर में लगभग तीन दिन तक झगड़ा चलता रहा। युनुस ने महाराष्ट्र में रह रहे अपने बेटे को बुला लिया।
घर के झगड़े से परेशान युनुस ने सुसाइड नोट लिखना शुरू किया। 21 जुलाई की शाम को घर वालों से अब झगड़े को सुलझाने बात कह पार्लर की ओर प्रस्थान किया। पूरे दिन यहां बैठ कर सुसाइड नोट लिखा। शाम को भाई और बेटे को बुला कर गाड़ी उन्हें दे दी, और मोटर साइकल उनसे ले ली।
दिनभर घूमे - फिरे और शाम को पार्लर पर गए। वहां कपड़े बदले, चप्पल, नाइटी टी शर्ट पहनी, ठंडा खरीदा, साथ में दो सिगरेट पैकेट, लाइटर, दो फ्रूटी (पोते - पोतियों के लिए) खरीदे।
इसके बाद मोटर साइकल से झुंझुनू से हेतमसर की ओर चल पड़े।
यहां लोगों के कहे अनुसार कुछ गाड़ियां आईं और गईं। यह पुलिया जहां घटना घटी है पर अक्सर शराबी लोग पार्टी आदि करते रहते हैं।
युनुस के पास दो बड़े एक छोटा कुल तीन मोबाइल थे, एक बैगपैक, एक छोटा अटैची जैसा बैग था। उनके पास यह सब समान नहीं मिला। उनकी पीठ के नीचे तेज धार वाला चाकू मिला।
घटना के अनुसार युनुस के दाहिने हाथ की नशे दो जगह से गहरे कट लगने से खून बहा और 2 से 3 बजे के बीच युनुस की मृत्यु हो गई।
पुलिस ने प्रथम दृष्टया आत्महत्या माना, परन्तु प्राप्त फोटोग्राफ एवं क्राइम सीन के आधार पर यह कयास लगाए जा सकते हैं कि युनुस के सर पर चश्मा लगा था, किसी तरह की कोई चोट के निशान नहीं थे, कपड़ों पर या कहीं ओर अन्य निशान भी नहीं पाए गए। कहीं मौत से दम घुटने, पैर आदि रगड़ने का कोई निशान। चप्पल जैसे पहनी थी वैसे ही पहन रखी थी।
दस पेज का सुसाइड नोट उनके पास पड़े एक कपड़े के थैले में मिला।
प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत नहीं हो रहा है।
अभी तक विसरा रिपोर्ट
एफएसएल रिपोर्ट प्राप्त होना बाकी।
सुसाइड नोट, FIR copy एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त हो गईं है।
पुलिस पर अपने विभाग के लोगों को बचाने हेतु प्रयास के आरोप लग रहे हैं।

जांच अधिकारी - 
सुभाष चंद्र सामोता 
थाना - सदर, झुंझुनू 
मोबाइल नंबर - 94139 36358

सुसाइड नोट - 
दैनिक भास्कर रिपोर्ट/आरिफ भारु - इम्तियाज भाटी झुंझुनू
फोटो ग्राफी
01
02
03
04
05
06
,07
08
09
10
11
12
Fir copy 
01
02
03

पोस्टमार्टम रिपोर्ट 
01
02
03
जनता की मांग

आवश्यकता है पुलिस एवं जांच दल द्वारा बिना लाग पाट के ईमानदारी से दूध का दूध और पानी का पानी करने की।
मैने स्वयं घटना स्थल का निरीक्षण किया है।

शमशेर भालू खां 
9587243963

Comments

Popular posts from this blog

बासनपीर मामले की हकीकत

इस ब्लॉग और मेरी अन्य व्यक्ति से हुई बातचीत पर मंहत प्रतापपुरी का बयान जीवनपाल सिंह भाटी की आवाज में सत्य घटना सद्भावना रैली बासनपीर जूनी पूर्व मंत्री सालेह मुहम्मद का बयान बासनपीर जूनी के सत्य एवं जैसाने की अपनायत की पड़ताल -  पिछले कुछ दिनों से जैसलमेर के बासन पीर इलाके का मामला सामने रहा है। कहा जा रहा है कि पूर्व राज परिवार की जमीन पर बासनपीर गांव के लोगों द्वारा कब्जा किया जा रहा है। नजदीक से पड़ताल करने पर हकीकत कुछ ओर निकली। जिसके कुछ तथ्य निम्नानुसार हैं - रियासत काल में सन 1662 में बीकानेर और जैसलमेर रियासत के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध में जैसलमेर सेना के दो वीर योद्धा सोढ़ा जी और पालीवाल जी शहीद हो गए। युद्ध के बाद बासन पीर (युद्ध स्थल) तालाब की तलहटी पर शहीदों की स्मृति में छतरियां बनवाई हैं। जैसलमेर के चारों और 120 किलोमीटर इलाके में 84 गांव पालीवाल ब्राह्मणों ने बसाए जिनमें से एक गांव बासनपीर जूनी भी था। पालीवाल ब्राह्मण समृद्ध किसान और व्यापारी थे, रियासत के दीवान सालिम सिंह से अनबन के कारण सन् 1825 में सभी गांव खाली करने को मजबूर हो गए। पालीवाल...

✍️कायम वंश और कायमखानी सिलसिला सामान्य इतिहास की टूटी कड़ियाँ

कायमखानी समाज कुछ कही कुछ अनकही👇 - शमशेर भालू खां  अनुक्रमणिका -  01. राजपूत समाज एवं चौहान वंश सामान्य परिचय 02. कायम वंश और कायमखानी 03. कायमखानी कौन एक बहस 04. पुस्तक समीक्षा - कायम रासो  05. कायम वंश गोत्र एवं रियासतें 06. चायल वंश रियासतें एवं गोत्र 07. जोईया वंश स्थापना एवं इतिहास 08. मोयल वंश का इतिहास 09. खोखर वंश का परिचय 10. टाक वंश का इतिहास एवं परिचय  11. नारू वंश का इतिहास 12 जाटू तंवर वंश का इतिहास 13. 14.भाटी वंश का इतिहास 15 सरखेल वंश का इतिहास  16. सर्वा वंश का इतिहास 17. बेहलीम वंश का इतिहास  18. चावड़ा वंश का इतिहास 19. राठौड़ वंश का इतिहास  20. चौहान वंश का इतिहास  21. कायमखानी समाज वर्तमान स्थिति 22. आभार, संदर्भ एवं स्त्रोत कायम वंश और कायमखानी समाज टूटी हुई कड़ियां दादा नवाब (वली अल्लाह) हजरत कायम खां  साहब   नारनौल का कायमखानीयों का महल     नारनौल में कायमखानियों का किला मकबरा नवाब कायम खा साहब हांसी,हरियाणा   ...

✅इस्लाम धर्म में व्यापार, ब्याज एवं मुनाफा

अरब व्यापारी हर देश में हर देश का हर एक सामान खरीदते और बेचते थे। अरब में व्यापार -  किसी भी क्षेत्र में सभी सामान उपलब्ध नहीं हो सकते। हर क्षेत्र का किसी ना किसी सामान के उत्पादन में विशेष स्थान होता है। उपलब्ध सामग्री का उत्पादन, भंडारण, परिवहन एवं विपणन ही व्यापार कहलाता है। क्षेत्र अनुसार इसके अलग - अलग नाम हो सकते हैं। इस्लाम धर्म का उदय अरब में हुआ। अरब क्षेत्र में तीन प्रकार की जनजातियां रहती थीं। बायदा - यमनी  अराबा - कहतानू (मिस्र) मुस्ता अराबा - अरबी (इस्माइली) यह जनजातियां खेती, व्यापार एवं अन्य कार्य करती थीं। हजारों सालों से इनका व्यापार रोम, चीन एवं अफ्रीका के देशों से रहा। अरब व्यापारी पश्चिम में अटलांटिक महासागर से लेकर पूर्व में अरब सागर तक, अरब प्रायद्वीप तक व्यापार करते थे। अरब नील से ह्यांग्हो तक व्यापार करते थे। अरब प्रायद्वीप कई व्यापार मार्गों के केंद्र में स्थित था, जिसमें दक्षिण पूर्व एशिया, भूमध्य सागर और मिस्र शामिल थे। यहां मुख्य सभ्यताएं रहीं -  - सुमेरियन एवं बेबीलोन  सभ्यता (मेसोपोटामिया/इराक) (दजला फरात) की सभ्यता। - फ...