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लघु कथा - हानि किस की

लघु कथा - हानि किस ki

एक गांव में कोरस नमक व्यक्ति का खुशहाल परिवार रहता था। परिवार के लोग खेती बाड़ी की बजाय नौकरी - पेशा पर ज्यादा ध्यान देते थे। इस परिवार में छोटे बच्चों में चाचा अजू के दो भतीजे कनी और नाजी में बड़ा प्रेम था। अपने से छोटे चाचा अजू का दोनों भतीजे बहुत लाड़ रखते। अजू भी अपने भतीजों की ढाल बन कर रहता। तीनों की उमर में ज्यादा अंतर नहीं था। बचपन से साथ रहे, खेले, पढ़े और बड़े हुए। चाचा पढ़ाई में होशियार भतीजे चाचा के पहरेदार, तीनों की तिकड़ी लोगों के सर चढ़ कर बोलती।
तीनों के आपसी प्रेम की कोई सीमा नहीं थी
अजू, कनी और नाजी एक साथ सोते, उठते, खाते और स्कूल जाते। समय बीतता गया, कनी के पिता पाले सेना में नौकरी करते थे। एक दिन संदेश आया कि सीमा पर सैनिक कार्यवाही में जवान पाले शहीद हो गए। पूरा गांव शोक में डूब गया। 35 साल का पाले सब का चहेता, खुश मिजाज और मिलनसार था। अब भतीजे कनि के लाड़ और ध्यान में चाचा अजू ज्यादा ध्यान देने लगा। उम्र में छोटा होने के बावजूद उसने कभी कनि को यह आभास नहीं होने दिया कि उसके पिता नहीं हैं। कनि भी समझदार और होशियार था। तीनों बड़े हुए, कनि पिता की जगह सेना में लग गया। नाजी छोटे - मोटे ठेके लेने लगा। नाजु गांव में ही परचून की दुकान चलाने लगा। समय के साथ तीनों का काम बहुत अच्छा चला और धनवान हो गए। तीनों के बच्चे बड़े हो कर सरकारी नौकरी लग गए। अब तीनों काम में इतने व्यस्त हो गए कि महीनों मिलने का समय नहीं मिलता। जब कभी मिलते तो खूब धूम करते। वास्तविकता यह थी कि इन के बारे अंजान यह नहीं कह सकता था कि यह सगे भाई नहीं हैं।
तीनों ही में जितना प्रेम था, उनके बच्चों में उतनी ही अनबन और प्रतिस्पर्धा। वो एक दूसरे को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। काम में व्यस्तता के कारण तीनों अपनी संतान को प्रेम का वो पाठ नहीं पढ़ा सके जो खुद उन्होंने पढ़ा था। खुद ओर भतीजों की संतान आपस में व दूसरे से लड़ने लगे। अपशब्द और गालियां उनके लिए राबड़ी रोटी हो गए। अजू व्यापार में इतना रम गया कि खुद की संतान को भी नहीं संभाल सका।
अब परिवार बिखर गया, तीनों की सामाजिक गतिविधियों अलग - अलग होने लगीं। चाचा उत्तर में जाए तो भतीजे दक्षिण में और भतीजे पूर्व में जाएं तो चाचा पश्चिम में। विरोध के स्वर मुखर होने लगे। अविश्वास ने पांव पसार लिए, अब खुलकर बगावत शुरू हो गई।
आपसी खींचतान में बारिश का मौसम आ गया। जमीन के बंटवारे को लेकर लड़ाई शुरू हो गई। अजू लोगों के घरों में पंचायती करता था, अब अपने घर में पंचों के सामने वादी के रूप में सर झुकाए खड़ा था और सामने खड़े थे भतीजे।
एक दिन खेत जोतने के नाम पर परिवार में मामूली कहा सुनी हुई जिसे गांव के लोगों ने सुलझा दिया और फिर से ना लड़ने की चेतावनी भी दे डाली।
लेकिन दोनों तरह परिवार के गर्म खून वाले लड़कों पर खून सवार था। 
एक दिन दोनों गुट हथियारों से लैस हो कर खेत में पहुंच गए। उलाहना, शिकायत और कहासुनी में बात बढ़ती गई। इतने में किसी ने किसी को थप्पड़ मार दिया। बात बढ़ी और लाठियां, सरिए, गंडासे, हॉकी और रॉड निकल आए। 
इस रण में पांच जवान पार्थिव देह में बदल गए। तीनों चाचा, भतीजा सर पीटकर रो रहे थे। 
घटना स्थल पर पहुंचे मीडिया कर्मी रिपोर्ट कर रहे थे, आज गांव में हुई लाठी - भाटा जंग में कोरस परिवार के पांच युवाओं की मौत चार गंभीर घायल। मृतकों का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं और गंभीर घायलों को बड़े अस्पताल रेफर कर दिया गया है। पुलिस ने मौके पर काम में लिए गए हथियारों सहित इसी परिवार के आठ अभियुक्तों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
शिक्षा - संपत्ति नहीं प्रेम ही धन है।
जिगर चुरूवी (शमशेर भालू खां)

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