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झालावाड़ स्कूल दुर्घटना

झालावाड़ स्कूल हादसा और इसका सत्य -
राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलोद (लवाड़ा) गांव में एक राउमावि में दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। सुबह की प्रार्थना सभा चल रही थी तभी स्कूल की बिल्डिंग की छत अचानक भरभराकर गिर पड़ी। जिससे पूरे स्कूल परिसर में हड़कंप मच गया। इस दर्दनाक घटना में अनुमान है कि 60 से ज्यादा बच्चे मलबे में दब गए इन में 27 गंभीर घायल है। पायल, हरीश और कुंदन सहित चार छात्रों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई तीन ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
आज सुबह अध्यापक बच्चे अपनी कक्षाओं में बैठकर पढ़ रहे थे, तभी अचानक एक कक्षा की छत नीचे आ गिरी। विभाग ने तुरंत कार्यवाही करते हुए चार शिक्षकों को निलंबित कर दिया।
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घटना - 
सरकारी विद्यालयों में सरकारी शिक्षकों, नेता, अफसर और धनवान लोगों के बच्चे नहीं पढ़ते और गरीब बच्चों की हत्या उन्हें विचलित नहीं करती पक्के सबूतों के साथ यह हत्या है जिसमें कोई भ्रम नहीं। इस हत्याकांड में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री, निदेशक माध्यमिक शिक्षा, जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, ADPC समसा, अभियंता समसा, सरपंच ग्राम पंचायत एवं प्रधानाचार्य दोषी हैं। सजा मिली चार अध्यापकों को जो भाग्य से मरते - मरते बचे। विद्यार्थियों के खून से सना फर्श चीख - चीख कर हमसे कह रहा है यह हादसा नहीं हत्या है। 
इस से पहले केरल में एक स्कूल भवन में आग लगने से सैकड़ों नौनिहाल अपनी जीवन लीला समाप्त करवा चुके हैं। इन्हीं बच्चों के दम पर सरकार के अभियंता, अधिकारी और नेता सुख सुविधाओं का भोग करते हैं, AC गाड़ी, AC दफ्तर और आरामदायक कुर्सियां, जर्जर विद्यालय भवनों की सुध लेने का समय किस के पास है। 
सवाल यह नहीं कि छत क्यों गिरी ? सवाल यह है कि जर्जर भवनों को क्यों नहीं ढहाए गया।
इस हत्याकांड की समस्त जिम्मेदारी शासन - प्रशासन की है। यदि आपने बस्तों के साथ मलबे में दबे बच्चों की लाशें देखी हैं तो आंखें में आंसुओं की जगह अंगारे बरसने चाहिए। चुप रहने का अर्थ इन लोगों का समर्थन करना है। सरकार में बैठे लोगों से पूछा जाना चाहिए हमारे बच्चों का हत्यारा कौन ? 
इस हत्याकांड के दोषियों पर क्या कार्यवाही हुई? 
गुरुजी, नेताजी, अफसर साहब! यदि आपका बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़ता है तो यह सवाल आपको भी सोचने पर मजबूर कर देते। जर्जर एवं अपर्याप्त भवन, खराब मिडडे मील, न्यूनतम से कम स्टाफ, गिरता नामांकन, बिजली, पानी, शौचालय और स्वच्छता के सवाल। क्या यह शिक्षा के प्रति आपकी असंवेदनशीलता नहीं है?
दयनीय और दर्दनाक स्थिति यह है कि एक तिहाई स्कूल ही नहीं सरकारी भवन ऐसे हैं, जो जर्जर हैं। राजस्थान में हजारों स्कूलों भवनों को सर्वे के बाद गिराने के आदेश होने के बावजूद यहां कक्षाएं लगाने का दोषी कौन?  ग्रामीण क्षेत्रों में तो यह स्थिति इस से भी घटिया है। अध्यापक एवं विद्यार्थी प्रतिदिन मौत को गले लगाकर कक्षाओं में बैठते हैं। सिस्टम के इस कलंकित आतंक और अत्याचार पर न कोई अंकुश है ना ही कोई इसकी जिम्मेदारी लेने वाला। 
लश्कर उल्फा या LTTE से भी गंभीर अपराधी हैं यह लोग जो हत्या के बाद भी जिम्मेदारी लेने के स्थान पर प्रशासनिक एवं राजनैतिक भ्रमण कर इतिश्री कर लेते हैं। क्रोध से आंखों की नसें फट रही हैं, इसका जिम्मेदार कौन ? 
इस शासन - प्रशासन की आंखों में करुणा, रगों में गर्म खून इसलिए नहीं दौड़ता कि इन सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे गरीब तबके के हैं। 
क्या मोटी तनख्वाह, भ्रमण के नाम पर मोटा TA बिल, AC गाड़ी में चलते समय इनको शर्म नहीं आती ?
हम भी इतने असहाय हैं कि समाज और सरकार का यह सड़ा हुआ अंग हमारे शरीर से चिपक कर कैंसर का रूप ले चुका की सर्जरी नहीं करवा पा रहे हैं। हमारी चुप रहने की दुर्बलता आगे चलकर भयानक और खतरनाक रूप लेने वाली है। 
सुलगता सवाल यह है कि सरकारी स्कूलों की यह भयावह स्थिति शिक्षा मंत्री को क्रोधित नहीं कर रही है। हर बात में धार्मिक पुट ढूंढने वाले मदन दिलावर को सचिन, पायल और हरीश किस धर्म के नजर आ रहे हैं। नए-नए पाठ्यक्रम बदल कर हर बार कमिशन की बड़ी चांदी काटने वाले अधिकारियों नेताओं को जरा भी लाज नहीं आती। 
अभिभावकों को स्कूलों के प्रति आक्रामक होना होगा, कल राजनैतिक पर्यटन पर गए नेताओं का विरोध इस बात का द्योतक है कि आग लग चुकी है, धुंआ उठ रहा है, अब चिंगारी उठने की देर है।
इन नेताओं को माला पहनाने के स्थान पर बहिष्कार किया जाए, इन भ्रष्ट अधिकारियों को जूते मारना ही शेष बचा है। 
मोटी तनख्वाह के बावजूद कमीशन और दलाली से जिनका पेट नहीं भरता उनके पेट में सुलगते अंगारे भर दिए जाने चाहिए।
स्कूल ही नहीं, बिजली (ऊर्जा), पानी (phed), PWD, आबकारी, नगरपालिका, पंचायत एवं अन्य सरकारी बिल्डिंग कमीशन की भेंट चढ़ चुके हैं। स्वीकृत राशि का 40% कमीशन और 60% भवन निर्माण में लगेगा तो क्या हाल होगा यह हम सब भली प्रकार से जानते, समझते और देखते हैं। पुरानी बिल्डिंग, दरकती-गिरती दीवारें, छत के नाम पर सर पर लटकती मौत के जिम्मेदार कलक्टर, SDM, तहसीलदार, सहित संबंधित विभाग के अधिकारी हैं, इस के साथ ही उगाही करने आने वाले प्रभारी मंत्री भी इसके समान रूप से जिम्मेदार हैं। निरंकुश तंत्र की ईंट से ईंट बजाने का समय आ गया है।हम हादसों के बाद जागते हैं, शांति काल में निश्चिंत रहते हैं, जर्जर बिल्डिंगों की छत पर पानी भरा रहता है, दीवारों में दरारें सामने रहती हैं, इन भवनों में बैठने वाले भयभीत रहते हैं, सुधार की मांग करने के बावजूद लेटलटिफी आड़े आ रही है। यह अनदेखी हमें बहुत महंगी पड़ने वाली है। भारत माता के एक - एक बच्चे का जीवन मूल्यवान है, जिसका कोई प्रतिदान नहीं, निर्लज, निर्दयी बेशर्म तंत्र के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता।माननीय न्यायालय को स्वतः संज्ञान ले कर सभी जिम्मेदारों पर सामूहिक हत्या का मुकदमा दर्ज करना चाहिए।
इन 7 बच्चों में से ना जाने कौन विवेकानंद होता, अब्दुल कलाम होता या हरगोविंद खुराना होता, कोई भाभा होता या कल्पना, देश के भविष्य की हत्या करने वालों की इसी तरह शव यात्रा निकले जिस तरह स्कूल से उन मासूमों की निकली है। हर वर्ष भवन सुरक्षा प्रमाण पत्र देने वाले अभियंताओं के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही जब तक नहीं होगी, स्थिति नहीं बदलेगी, यह तय है सरकार कोई कार्यवाही नहीं करेगी, जो करना है, आम जनता को करना है।
छोटी - छोटी बातों पर श्रेय लेने वाले मुख्यमंत्री जी क्या, इस हादसे की जिम्मेदारी लेंगे।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री निवास पर, झालावाड़ जिले के पिपलोदी ग्राम के राउमावि लवाडा में हुए हादसे पर उच्च स्तरीय बैठक ली। उन्होंने विभागीय अधिकारियों एवं वीसी से जुड़े समस्त जिला कलक्टर्स को सरकारी भवनों विशेष रूप से स्कूलों, आंगनबाड़ियों , अस्पतालों और अन्य राजकीय भवनों का तत्काल निरीक्षण कर, प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कार्य करवाने के निर्देश दिए। साथ ही, इसकी तत्काल रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को भिजवाने के लिए भी, निर्देशित किया। बैठक में पिपलोदी हादसे पर 2 मिनट का मौन रख, दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी गई।
स्कूल में घायलों से मिलीं वसुंधरा राजे ने कहा - यदि शिक्षा विभाग के अधिकारी प्रदेश के ऐसे स्कूलों को पहले ही चिन्हित कर लेते और बच्चों को अन्यत्र किसी सुरक्षित भवन में शिफ्ट कर देता तो हमारे ये बच्चे काल का ग्रास नहीं बनते.
शिक्षा विभाग प्रदेश के सभी स्कूलों का सर्वे करवाएं, जहां भी स्कूल जर्जर अवस्था में हैं. ऐसे स्कूलों से बच्चों को अन्यत्र सुरक्षित भवन में शिफ्ट करें। ऐसी घटनाओं से बच्चों और अभिभावकों में भय का वातावरण बनता है।
झालावाड़ के सामुदायिक भवन में चल रहे अस्थाई चिकित्सालय पहुंचे शिक्षा मंत्री मदन दिलावर।
लोगों ने सुनाई खरी खोटी।
अस्पताल के बाहर धरने पर बैठे लोगों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। लोगों में भारी गुस्सा।
लोगों की चार अध्यापकों को निलंबित करने पर प्रतिक्रिया - 
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट, 26.07.25
घटना के तुरंत बाद PCC अध्यक्ष गोबिंद सिंह डोटासरा ने अपने विधानसभा क्षेत्र में सरकारी भवनों की मरम्मत हेतु राशि स्वीकृत की।
डेगाना नागौर में गिरी स्कूल की छत।
डीईओ ने विद्यालय शिक्षकों को किया निलंबित।
यूपी के हापुड़ के भमेंडा गांव में स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में लेंटर का मलबा गिरने से 4 बच्चे घायल। बच्चे कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे तभी लेंटर का मलबा उनके ऊपर गिर गया. आनन-फानन में घायल बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना थाना बाबूगढ़ छेत्र के गांव 
झालावाड़ हादसे में जीवन गंवाने वाले बच्चों का पुराने टायर डालकर किया अंतिम संस्कार।
जैसलमेर - 
जैसलमेर से दर्दनाक खबर।
पूनमनगर के राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय का जर्जर प्रवेशद्वार गिरा।
9 वर्षीय छात्र अरबाज खान की मौके पर मौत।

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शमशेर भालू खां सहजूसर 
जिगर चूरूवी 
26.07.2025

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