Skip to main content

लघुकथा - रिश्वत

     चौधरी चरण सिंह की कहानी
लघुकथा - रिश्वत
उत्तर प्रदेश के एक गांव में चौधरी चरण सिंह के पास कुछ किसान रिश्वतखोर थानेदार की शिकायत ले कर आए। चरण सिंह जी को इस पर विश्वास नहीं हुआ। एक दिन सुबह - सुबह मैले कुचैले कपड़े पहन कर चरण सिंह जी थाने आए। 
बाहर खड़े सिपाही ने घुड़कते हुए कहा "क्या काम आए हो।" सिपाही की तरेरती आँखें उन्हें चुभ रही थीं पर चुपचाप अंदर चले गए।  अन्दर थानेदार जी सिपाहियों से ठिठोली कर रहे थे।
राम - राम हुकुम, मासूमियत से झुक कर चरण सिंह जी ने थानेदार का अभिवादन किया।
हां, राम - राम, क्या हुआ, सुबह - सुबह और कोई काम नहीं है क्या, मुंह उठाया और चले आए थाने में, घुड़कते हुए थानेदार ने जवाब दिया।
साहब, मेरे खेत में चोरी हो गई। दस बोरी गेहूं चुरा ले गए चोर।
खेत में गेहूं क्यों रखा था, घर क्यों नहीं ले गए, कोई गवाह है चोरी का? थानेदार ने सवालों की झाड़ी लगाई।
साहब, आधी गेहूं की ढुलाई कर ली थी, आधी देर हो गई इसलिए खेत में रह गई। सुबह खेत गया तो पाया वहां गेहूं नहीं था, साहब रिपोर्ट लिख कर चोर को पकड़िए, मैं गरीब आदमी क्या खाऊंगा।
ठीक है, ठीक है, जाओ मुंशी को रिपोर्ट लिखवा दो। यह कहते हुए थानेदार अपने केबिन में चला गया।
हमें चोर को पकड़ने का क्या मिलेगा मुंशी ने रजिस्टर के पन्ने उलट - पलट करते हुए तिरछी आंखों से किसान की ओर देखा। 
साहब मैं गरीब आदमी हूं, मेरे पास क्या है देने के लिए ? किसान ने उदास हो कर कहा।
देखो, यहां कुछ भी मुफ्त में नहीं होता, जीप का तेल कौन भरवाएगा, रस्ते में खर्चा होगा, वो अलग।
साहब मैं गरीब आदमी हूं, मेरे पास देने के लिए कुछ नहीं है, किसान ने गिड़गिड़ाते हुए अपनी बात दोहराई।
कुछ नहीं, सौ रुपए देते होतो रिपोर्ट लिख दूंगा, नहीं तो यहां से चलते बनो, मुंशी ने डांटते हुए कहा।
साहब इतने पैसे नहीं हैं मेरे पास, मैं तो गरीब आदमी हूं, इस पर चोरी, मैं बर्बाद हो जाऊंगा, गिरियाते हुए किसान ने बात दोहराई।
अरे सुनो, बाहर निकलो इसे, सुबह - सुबह माथा खाने आ जाते हैं, बाहर निकलो। 
एक सिपाही किसान का हाथ पकड़ कर बाहर निकालने लगता है।
किसान हाथ जोड़ कर रिपोर्ट लिखने की विनती करता है, पर मुंशी का दिल नहीं पसीजता, पान की पीक थूकते हुए फिर कहता है, कितने दे सकते हो।
किसान चोले की जेब से प्लास्टिक की थैली से मुड़े - तुड़े तीन दस - दस के नोट और पांच खुले रुपए निकाल कर मुंशी की ओर बढ़ा देता है। 
मुंशी पैसे जेब में रख कर रिपोर्ट लिखने लगता है। रिपोर्ट लिखने के बाद मुंशी ने पूछा, अंगूठा लगाओगे या दस्तखत करोगे।
दस्तखत करूंगा, किसान ने कहा पर अंगूठे वाली स्याही भी चाहिए।
वो क्यों, मुंशी ने खीजते हुए कहा।
आप दीजिए तो सही साहब, मैं अंगूठा ओर दस्तखत दोनों करूंगा।
ठीक है तुम्हारी मर्जी, कहते हुए मुंशी ने पैड किसान की ओर सरका दिया।
चरण सिंह ने रिपोर्ट पर लिखा - 
यह थाना रिश्वत खोर है, इसलिए पूरे थाने को बर्खास्त किया जाता है, और जेब से मोहर लगा कर कागज मुंशी की ओर बढ़ा दिया।
मुंशी ने जैसे ही चरण सिंह के दस्तखत देखे गिड़गिड़ाने लगा।
चरण सिंह बिना कुछ कहे बाहर आ निकले।
शिक्षा - बुरे काम का बुरा नतीजा।

जिगर चूरूवी (शमशेर भालू खां)

Comments

Popular posts from this blog

बासनपीर मामले की हकीकत

इस ब्लॉग और मेरी अन्य व्यक्ति से हुई बातचीत पर मंहत प्रतापपुरी का बयान जीवनपाल सिंह भाटी की आवाज में सत्य घटना सद्भावना रैली बासनपीर जूनी पूर्व मंत्री सालेह मुहम्मद का बयान बासनपीर जूनी के सत्य एवं जैसाने की अपनायत की पड़ताल -  पिछले कुछ दिनों से जैसलमेर के बासन पीर इलाके का मामला सामने रहा है। कहा जा रहा है कि पूर्व राज परिवार की जमीन पर बासनपीर गांव के लोगों द्वारा कब्जा किया जा रहा है। नजदीक से पड़ताल करने पर हकीकत कुछ ओर निकली। जिसके कुछ तथ्य निम्नानुसार हैं - रियासत काल में सन 1662 में बीकानेर और जैसलमेर रियासत के बीच युद्ध हुआ। इस युद्ध में जैसलमेर सेना के दो वीर योद्धा सोढ़ा जी और पालीवाल जी शहीद हो गए। युद्ध के बाद बासन पीर (युद्ध स्थल) तालाब की तलहटी पर शहीदों की स्मृति में छतरियां बनवाई हैं। जैसलमेर के चारों और 120 किलोमीटर इलाके में 84 गांव पालीवाल ब्राह्मणों ने बसाए जिनमें से एक गांव बासनपीर जूनी भी था। पालीवाल ब्राह्मण समृद्ध किसान और व्यापारी थे, रियासत के दीवान सालिम सिंह से अनबन के कारण सन् 1825 में सभी गांव खाली करने को मजबूर हो गए। पालीवाल...

✍️कायम वंश और कायमखानी सिलसिला सामान्य इतिहास की टूटी कड़ियाँ

कायमखानी समाज कुछ कही कुछ अनकही👇 - शमशेर भालू खां  अनुक्रमणिका -  01. राजपूत समाज एवं चौहान वंश सामान्य परिचय 02. कायम वंश और कायमखानी 03. कायमखानी कौन एक बहस 04. पुस्तक समीक्षा - कायम रासो  05. कायम वंश गोत्र एवं रियासतें 06. चायल वंश रियासतें एवं गोत्र 07. जोईया वंश स्थापना एवं इतिहास 08. मोयल वंश का इतिहास 09. खोखर वंश का परिचय 10. टाक वंश का इतिहास एवं परिचय  11. नारू वंश का इतिहास 12 जाटू तंवर वंश का इतिहास 13. 14.भाटी वंश का इतिहास 15 सरखेल वंश का इतिहास  16. सर्वा वंश का इतिहास 17. बेहलीम वंश का इतिहास  18. चावड़ा वंश का इतिहास 19. राठौड़ वंश का इतिहास  20. चौहान वंश का इतिहास  21. कायमखानी समाज वर्तमान स्थिति 22. आभार, संदर्भ एवं स्त्रोत कायम वंश और कायमखानी समाज टूटी हुई कड़ियां दादा नवाब (वली अल्लाह) हजरत कायम खां  साहब   नारनौल का कायमखानीयों का महल     नारनौल में कायमखानियों का किला मकबरा नवाब कायम खा साहब हांसी,हरियाणा   ...

✅पाकिस्तान परस्त कौन

नापाक परस्त कौन -  👉 नापाक पसंद भाजपा - एक विश्लेषण 🔥# ऑपरेशन_सिन्दूर के बाद भारतीय सेना के आक्रमण में यदि #मोदी (भाजपा) सरकार ने दुश्मन से हमदर्दी न दिखाई होती और अमेरिका की व्यापार नहीं करने धमकी में ना आए होते तो भारतीय सेना नापाकिस्तान के नक्शे के चार टुकड़े कर चुकी होती। थोड़े समय के लिए सेना को फ्री हैंड मिल जाता, विदेश राज्य मंत्री पाक सरकार को हमले की पूर्व जानकारी ना देते और शहबाज़ शरीफ़ के प्रति प्रेम न छलकाते तो आज तस्वीर दूसरी होती। आख़िर भाजपा इतनी पाकिस्तान परस्त क्यों है, आईए जानते हैं,  1. 👉 वर्ष 1999 का फरवरी महीना दिनांक 19.02.1999 -  🔥 वाजपेई की लाहौर यात्रा और कारगिल युद्ध -             दिल्ली से लाहौर बस  लाहौर पहुंचे प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाक PM नवाज शरीफ से भेंट की। तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बस द्वारा बाघा बॉर्डर होते हुए लाहौर में नवाज शरीफ को गले लगाने पहुंचकर लाहौर घोषणा- पत्र जारी करते हैं। इधर वाजपेयी शरीफ के गले मिल कर मेहमाननवाज़ी का मजा ले रहे थे उधर नापाक स...

👤 शमशेर भालू खान

📍 कायमखानी बस्ती सहजुसर ,चूरू राजस्थान Pin :-331001

💬 Chat on WhatsApp

© 2026 ShamsherBhaluKhan.com | Designed & Managed by Shamsherbhalukhan