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संविधान में संशोधन में अब तक के संशोधन

CONSTITUTION AMENDINGS 
                      ACTS 
      संविधान में संशोधन ऐक्ट्स :-
संशोधन का नाम अंग्रेजी में 
The Constitutional (......Amendment) Act, .........
आद्याक्षर विवरण - 
W.e.f. - With effect from (से लागू)

विशेष - दिसंबर 2025 तक 131 संविधान संशोधन सदन में रखे जा चुके है, परन्तु लागू अभी 106 ही हुए हैं। शेष अभी पारित नहीं हुए हैं। अंतिम 106 वाँ संशोधन महिला आरक्षण हेतु पारित हुआ जो 2027 में लागू होगा।
01. नेहरू जी        - 01 से 17 तक
02. गुलज़ारी लाल नंदा - 0 शून्य 
03. लाल बहादुर शास्त्री - 0 शून्य 
इंदिरा जी (1) - 18 से 42 तक- 25
मोरारजी देसाई - 43 से 44 तक - 02
इंदिरा जी - 45 से 51 तक - 07 
(इंदिरा जी 25+7=32)
राजीव गांधी - 52 से 63 तक - 12
विश्वनाथ प्रताप सिंह - 

जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के संविधान संशोधन की तुलना - 
🔥संशोधनों की संख्या - 
नेहरूजी - कुल तीन कार्यकाल में सत्रह संशोधन।
इंदिराजी - कुल तीन कार्यकाल में उनतीस संशोधन।
🔥 फोकस - 
नेहरूजी- भूमि सुधार, संघीय ढांचा, राज्यों का पुनर्गठन।
इंदिराजी- सत्ता का केंद्रीकरण, सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन।
🔥विषय - 
नेहरूजी - भूमि सुधार, 7वाँ संशोधन (राज्य पुनर्गठन)।
इंदिराजी - 42वाँ संशोधन (Mini Constitution)।
🔥मौलिक अधिकार - 
नेहरूजी - सामाजिक न्याय हेतु सीमाएँ
इंदिराजी - कुछ अधिकार सीमित, कानून के राज की ओर झुकाव
🔥न्यायपालिका
नेहरूजी - संतुलन बनाए रखने का प्रयास।
इंदिराजी - न्यायिक शक्ति सीमित करने के प्रयास।
🔥लोकतांत्रिक दृष्टि- 
नेहरूजी - व्यावहारिक और संतुलित।
इंदिराजी - सशक्त कार्यपालिका, कानून के राज की ओर झुकाव।
🔥ऐतिहासिक छवि - 
नेहरूजी - संविधान को स्थिर-व्यवहारिक बनाना।
इंदिराजी - संविधान में गहरे एवं व्यापक परिवर्तन।
🙏 राजीव गांधी द्वारा किए गए संविधान संशोधन—
✔️ राजनीतिक स्थिरता
✔️ राष्ट्रीय एकता
✔️ संघीय संतुलन
✔️ युवा सशक्तिकरण
✔️ सामाजिक न्याय
✔️ क्षेत्रीय विविधता का सम्मान
✍️ अंतिम मूल्यांकन
राजीव गांधी का संविधान संशोधन काल ‘सुधार + संतुलन + संवेदनशीलता’ का काल था। वे न तो संविधान को कठोर बना रहे थे, न ही अस्थिर—बल्कि उसे समय, समाज और राष्ट्र की जरूरतों के अनुरूप ढाल रहे थे।

🙏प्रधानमंत्री - स्वर्गीय जवाहरलाल नेहरू 
के काल खंड के संविधान संशोधन - 
(जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्रित्व काल में भारत के संविधान में कुल 17 संशोधन किए गए।)
01. प्रथम   
वर्ष - 1951
लागू - 18/06/1951
🔔 मौलिक अधिकारों और सामाजिक-आर्थिक सुधारों को स्पष्ट व मजबूत करना। 
👉मुख्य बिंदु —
A .अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर युक्तियुक्त प्रतिबंध
अनुच्छेद 19(2) में संशोधन कर
राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों से मैत्रीपूर्ण संबंध, सार्वजनिक व्यवस्था आदि के आधार पर
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था की गई।
इसका उद्देश्य प्रेस और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग रोकना था।
B .भूमि सुधार कानूनों को संरक्षण
अनुच्छेद 31A और 31B जोड़े गए।
ज़मींदारी उन्मूलन जैसे भूमि सुधार कानूनों को
मौलिक अधिकारों की चुनौती से सुरक्षा दी गई।
C. नवीं अनुसूची (Ninth Schedule) का निर्माण
नवीं अनुसूची जोड़ी गई।
इसमें डाले गए कानूनों को
न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) से बाहर रखा गया।
शुरुआत में 13 भूमि सुधार कानून इसमें शामिल थे।
D. समानता के अधिकार में स्पष्टीकरण
अनुच्छेद 15 और 16 की व्याख्या को स्पष्ट किया गया,
ताकि सामाजिक पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधानों का मार्ग प्रशस्त हो।
E. संपत्ति के अधिकार में परिवर्तन
अनुच्छेद 31 में संशोधन कर
राज्य को न्यायसंगत मुआवज़े के साथ संपत्ति अधिग्रहण का अधिकार दिया गया।

02. द्वितीय 
वर्ष - 1952 -   
लागू - 01/05/1953
🔔न्यायालय को सुदृढ़ता प्रदान करना👉मुख्य बिंदु - 
A. इस संविधान संशोधन द्वारा न्यायालय को अधिक मजबूत करते हुए उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि की गई।
B. अनुच्छेद 224 में संशोधन किया गया।
प्रत्येक उच्च न्यायालय (High Court) में
न्यायाधीशों की अधिकतम संख्या बढ़ाने का प्रावधान किया गया जो पहले संसद द्वारा कानून के माध्यम से तय की जा सकती थी। राज्यों की जनसंख्या और मुकदमों की संख्या के अनुसार अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति संभव हुई। इससे संघीय ढांचे में न्यायिक संतुलन मजबूत हुआ।

03. तृतीय 
वर्ष - 1954
लागू - 22/02/1955
🔔 कालाबाज़ारी, जमाखोरी और महंगाई पर नियंत्रण - 
👉 मुख्य बिंदु - 
A. समवर्ती सूची (Concurrent List) में संशोधन
सातवीं अनुसूची (Seventh Schedule) की (समवर्ती सूची) की प्रविष्टि संख्या 33 में संशोधन किया गया।
B. आवश्यक वस्तुओं पर केंद्र को अधिक अधिकार - संशोधन के बाद निम्न वस्तुएँ राज्य सूची से समवर्ती सूची में स्पष्ट रूप से शामिल की गईं - 
. खाद्यान्न (Foodstuffs)
ख. पशुओं का चारा (Cattle fodder)
. कच्चा कपास और कपास के बीज
. कच्चा जूट (Raw jute)
👉 इन वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण और मूल्य नियंत्रण पर
अब केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते थे।
C. आवश्यक वस्तु अधिनियम को संवैधानिक आधार
इस संशोधन से
D. Essential Commodities Act जैसे कानूनों कोमज़बूत संवैधानिक समर्थन मिला।

04. चतुर्थ    1955 - 27/04/1955
🔔 भूमि सुधार कानूनों को मजबूत कर संपत्ति के अधिकार पर न्यायालयों के हस्तक्षेप को सीमित करना।
👉मुख्य बिंदु - 
A .संपत्ति के अधिकार पर न्यायालयी सीमा लगा दी गई। अनुच्छेद 31(2) में संशोधन किया गया। मुआवज़े की पर्याप्तता पर अब न्यायालय प्रश्न नहीं उठा सकते अर्थात, कोर्ट यह नहीं पूछ सकती कि दिया गया मुआवज़ा पर्याप्त है या नहीं
B.भूमि सुधार कानूनों को और संरक्षण
अनुच्छेद 31A के दायरे का विस्तार करते हुए इसमें - 
. ज़मींदारी उन्मूलन
. जोतों की सीमा तय करना
. कृषि भूमि का पुनर्वितरण
C. नवीं अनुसूची का विस्तार कर और अधिक भूमि सुधार कानून जोड़े गए। इससे संपत्ति का अधिकार मौलिक अधिकारों की चुनौती से बाहर हो गए।
D. राज्य के अधिग्रहण अधिकार को मजबूती - 
राज्य को यह अधिकार मिला कि वह
जनहित में संपत्ति अधिग्रहण कर सकते हैं 
और उस पर न्यायिक हस्तक्षेप सीमित हो।
✨  यह संशोधन - 
सामाजिक न्याय और समाजवादी नीतियों की दिशा में बड़ा कदम था। इससे स्पष्ट हुआ कि मौलिक अधिकार भी सामाजिक आवश्यकता के अधीन हैं। इसने बाद के कई भूमि सुधार कानूनों की संवैधानिक वैधता सुनिश्चित की।

05. पांचवां  
वर्ष - 1955। 
लागू-  24/12/1955
🔔 राज्यों के निर्माण विघटन एवं सीमाओं से संबंधित संशोधन
👉 मुख्य बिंदु - 
A. राज्य की सीमाओं में परिवर्तन से संबंधित संशोधन हेतु अनुच्छेद 3 में संशोधन कर नए राज्य गठन या क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन केंद्र का अधिकार।
B. राज्य विधानमंडल को समय-सीमा में छूट देते हुए पहले यह अस्पष्ट था कि
(राज्य विधानमंडल को अपनी राय देने के लिए कितना समय मिलेगा) इस संशोधन द्वारा यह स्पष्ट किया गया को राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित समय-सीमा को बढ़ाया जा सकता है, अर्थात यदि राज्य समय पर अपनी राय न दे पाए तो केंद्र उसे अतिरिक्त समय दे सकता है।
C. राज्यों की सहमति अनिवार्य नहीं
संशोधन ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य विधानमंडल की राय बाध्यकारी नहीं है।
अंतिम निर्णय लेने का अधिकार संसद के पास ही रहेगा।
इस संशोधन द्वारा - 
. राज्यों के पुनर्गठन की पृष्ठभूमि में लाया गया।
ख. इससे केंद्र को प्रशासनिक रूप से लचीलापन मिला।
. संघीय व्यवस्था में केंद्र की प्रधानता और स्पष्ट हुई।

06. छठवां   
वर्ष - 1956  
लागू - 11/09/1956
🔔कर एवं व्यापारिक सुधार, इससे राज्यों के बीच कर विवाद कम हुए।
👉मुख्य बिंदु - 
A. अंतर्राज्यीय व्यापार पर कर का अधिकार अनुच्छेद 269 में संशोधन किया गया। अंतर्राज्यीय व्यापार या वाणिज्य में
माल की बिक्री/खरीद पर लगाया गया कर
अब केंद्र द्वारा लगाया और राज्यों में वितरित किया जाएगा।
B. बिक्री कर की संवैधानिक स्पष्टता हेतु
अनुच्छेद 286 में संशोधन करते हुए तय किया गया कि - 
क. कौन-सी बिक्री अंतर्राज्यीय मानी जाएगी।
ख. किन परिस्थितियों में राज्य बिक्री कर नहीं लगा सकते।
C. राज्य सूची की प्रविष्टि संख्या 54 में संशोधन करते हुए सातवीं अनुसूची बदली गई। राज्यों को स्पष्ट किया गया कि वे
अपनी सीमा क्षेत्र में होने वाली बिक्री पर ही कर लगा सकते हैं, अंतर्राज्यीय बिक्री पर कर लगाने का अधिकार राज्यों से हटा दिया गया।
D. इस संशोधन के परिणामस्वरूप केंद्रीय बिक्री कर कानून, (Central Sales Tax Act, 1956) लागू किया गया। इससे पूरे देश में बिक्री कर एक समान व व्यवस्थित हुआ।
इस संशोधन से
. बाजार की राष्ट्रीय एकता बनी।
. संघीय ढांचे व केंद्र–राज्य वित्तीय संतुलन मजबूत हुआ।
ग. आगामी कर सुधार प्रक्रियाओं (VAT, GST) की नींव इसी संशोधन से पड़ी।

07. सातवां 
वर्ष - 1956  
लागू - 01/11/1956
🔔राज्यों का पुनर्गठन 
👉 मुख्य बिंदु - 
A. राज्यों का पुनर्गठन करते हुए 
Part A
Part B
Part C
Part D 
राज्यों की व्यवस्था समाप्त करते हुए देश में दो श्रेणी के राज्य बनाए - 
⬜ प्रदेश (State)
🟨 केंद्रशासित प्रदेश (Union Territories)
B. केंद्रशासित प्रदेशों की नई व्यवस्था हेतु
अनुच्छेद 239 से 241 में संशोधन करते हुए केंद्रशासित प्रदेशों का प्रशासन
राष्ट्रपति के अधीन कर वहां प्रशासक/उपराज्यपाल की व्यवस्था की गई।
C.उच्च न्यायालयों के क्षेत्राधिकार व्यवस्था हेतु अनुच्छेद 214 में संशोधन कर एक ही उच्च न्यायालय को एक से अधिक राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के लिए अधिकार क्षेत्र देने का प्रावधान किया गया।
(पंजाब - हरियाणा उच्च न्यायालय)
D. राज्यपाल की नियुक्ति संबंधी प्रावधान हेतु अनुच्छेद 153 में संशोधन कर एक ही व्यक्ति को दो या अधिक राज्यों के राज्यपाल नियुक्त किए जाने की व्यवस्था की गई।
E. संसद और विधानसभाओं से जुड़े परिवर्तन करते हुए लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व से जुड़े प्रावधानों में संशोधन कर नई राज्य संरचना के अनुरूप व्यवस्था की गई।
F.पहली और चौथी अनुसूची में परिवर्तन कर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की नई सूची जोड़ी गई।
G.दूसरी अनुसूची में पदाधिकारियों के वेतन-भत्तों में संशोधन।
इस संशोधन द्वारा - 
. राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 लागू हुआ।
. भारत के संघीय ढांचे का भाषा व प्रशासनिक आधार पर पुनर्गठित हुआ।
. आधुनिक भारतीय संघ की
वर्तमान संरचना की नींव इसी संशोधन से पड़ी।

08. आठवां  
वर्ष - 1960  
लागू - 05/01/1960
A. आरक्षित सीटों की अवधि में वृद्धि करने हेतु अनुच्छेद 334 में संशोधन किया गया।
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में
अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) तथा आंग्ल-भारतीय समुदाय हेतु आरक्षण की समय-सीमा बढ़ाई गई।
B. आरक्षण की अवधि को 10 वर्ष और आगे बढ़ाते हुए (मूल संविधान के दस वर्ष तक के आरक्षण के प्रावधान) में संशोधन करते हुए आरक्षण 1970 तक रहेगा का प्रावधान किया गया।
✨  इस संशोधन से - 
क. सामाजिक न्याय की निरंतरता।
ख. इससे स्पष्ट हुआ कि संविधान में दिए गए आरक्षण प्रावधान स्थाई नहीं  परिस्थितिजन्य हैं जिसे इसी अनुच्छेद के अंतर्गत कई और संशोधनों द्वारा समय - समय पर सीमा बढ़ाई जाती रही है।

09. नौवां     
वर्ष - 1960
लागू - 28/12/1960
🔔भारत के क्षेत्रीय पुनर्गठन और सीमा परिवर्तन से जुड़ा संशोधन 
👉मुख्य बिंदु - 
A. भारत–पाकिस्तान सीमा समझौते को संवैधानिक मान्यता
यह संशोधन
भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सीमा समझौते (1958–59)
को लागू करने के लिए किया गया।
इसका संबंध
पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा से था।
B. भारत के कुछ क्षेत्रों का हस्तांतरण
समझौते के तहत
🔥भारत और पाकिस्तान ने कुछ क्षेत्रों का आदान प्रदान किया जिसे संवैधानिक वैधता प्रदान की गई।
C. पहली अनुसूची में संशोधन कर संबंधित राज्यों के क्षेत्रफल और सीमाएँ बदली गईं।
D. सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के सम्मान में यह संशोधन Berubari Union Case (1960) के निर्णय के बाद लाया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि भारत का कोई भी क्षेत्र संविधान संशोधन के बिना हस्तांतरित नहीं किया जा सकता।
यह संशोधन - 
. राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ा था।
. इससे यह सिद्ध हुआ कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों के लिए भी संविधान संशोधन आवश्यक हो सकता है।
. भारत की सीमाओं में परिवर्तन की संवैधानिक प्रक्रिया स्पष्ट हुई।

10. दसवां   
वर्ष - 1961 
लागू - 11/08/1961
🔔राष्ट्रीय सीमा परिवर्तन एवं दादरा नगर हवेली का भारत में विलय।
👉मुख्य बिंदु - 
A. दादरा और नगर हवेली का भारत में विलय कर इस संशोधन द्वारा
दादरा और नगर हवेली को औपचारिक रूप से भारत के संघ में शामिल किया गया।
B. दादरा और नगर हवेली को केंद्रशासित प्रदेश घोषित किया गया। इसका प्रशासन राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक के माध्यम से किया जाने लगा।
C.पहली अनुसूची में संशोधन कर दादरा और नगर हवेली को भारत के केंद्रशासित प्रदेशों की सूची में जोड़ा गया।
D. दादरा और नगर हवेली पहले पुर्तगाली उपनिवेश थे, 1954 में यह क्षेत्र पुर्तगाल से मुक्त हुआ, लेकिन 1961 के संशोधन से इसे संवैधानिक वैधता मिली।
इस संशोधन से
. भारत की क्षेत्रीय अखंडता मजबूत हुई।
. इससे स्पष्ट हुआ कि भारत में किसी नए क्षेत्र को शामिल करने के लिए
संविधान संशोधन आवश्यक है।
. यह औपनिवेशिक शासन के अंतिम अवशेषों के एकीकरण की दिशा में कदम था।

11. ग्यारहवां 
वर्ष - 1961 
लागू- 19/12/1961
🔔उपराष्ट्रपति चुनाव की वैधता से संबंधित।
👉 मुख्य बिंदु - 
A. उपराष्ट्रपति के निर्वाचन मंडल में
यदि कोई रिक्ति हो तो भी चुनाव अवैध नहीं माना जाएगा।
B. उपराष्ट्रपति के चुनाव से जुड़े विवाद
संशोधन द्वारा यह प्रावधान किया गया कि
उपराष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित सभी विवाद केवल सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तय किए जाएंगे अन्य किसी न्यायालय को इस पर अधिकार नहीं होगा।
C. उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया को
अधिक स्थिर और निर्विघ्न बनाया गया। तकनीकी कारणों से चुनाव रद्द होने की संभावना समाप्त हुई।
इस संशोधन से
क. संवैधानिक पदों की निरंतरता सुनिश्चित करता है।
ख. इससे चुनावी विवादों में
ग. न्यायिक स्पष्टता और एकरूपता आई।
संघीय व्यवस्था में
. संवैधानिक संस्थाओं की मजबूती बढ़ी।

12. बारहवां 
वर्ष - 1962 
लागू - 20/12/1961
🔥गोवा, दमन दीव का भारत संघ में विलय 
👉मुख्य बिंदु - 
A. गोवा, दमन और दीव का भारत संघ में औपचारिक विलय जो पहले पुर्तगाली उपनिवेश थे।
B. पहली अनुसूची में संशोधन कर गोवा, दमन और दीव को केंद्रशासित प्रदेश घोषित कर राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक के माध्यम से किया गया।
C. 1961 की सैन्य कार्यवाही के बाद पुर्तगाली शासन की समाप्ति को वैधानिक मान्यता प्रदान की गई।
इस संशोधन से 
क. औपनिवेशिक शासन के अंतिम अवशेषों का एकीकरण
. इससे भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता और मजबूत हुई।
. शांतिपूर्ण राष्ट्र–निर्माण की प्रक्रिया में
संविधान की भूमिका स्पष्ट हुई।

13. तेरहवां - 
वर्ष - 1962 
लागू - 01/12/1963  
A. संविधान में अनुच्छेद 371A जोड़ कर  नागालैंड राज्य को विशेष अधिकार प्रदान किए गए।
B. नागा सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं की सुरक्षा हेतु संसदीय प्रावधान तब तक लागू नहीं होंगे जब तक राज्य विधानसभा इसकी सहमति न दे।
इसमें नागाओं की धार्मिक और सामाजिक प्रथाएँ, नागा प्रथागत न्याय व्यवस्था,
भूमि और प्राकृतिक संसाधनों का स्वामित्व व हस्तांतरण इसके अंतर्गत तय किए गए।
C. नागालैंड राज्य के गठन की संवैधानिक पृष्ठभूमि 1963 में नागालैंड को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
D. इस संशोधन द्वारा नागा शांति समझौते (1960) के बिंदुओं की पालना की गई।
इस संशोधन से - 
. राष्ट्रीय एकता के साथ विविधता का उत्कृष्ट को बल मिला।
. इससे पूर्वोत्तर भारत में शांति और विश्वास निर्माण को बल मिला।
. भारतीय संघ के लचीले और समावेशी चरित्र को दर्शाता है।

14. चौदहवां1962- 
वर्ष - 1962 
लागू - 16/08/1962 व -28/12/1962
🔥पांडिचेरी और लक्ष्यद्वीप का भारत संघ में विलय 
👉मुख्य बिंदु - 
A. केंद्रशासित प्रदेशों का पुनर्गठन कर  पांडिचेरी (Puducherry) व लक्षद्वीप
को केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया।
B. फ्रांसीसी उपनिवेश पांडिचेरी का भारत में औपचारिक विलय किया गया।
C. लक्षद्वीप को मद्रास (तमिलनाडु) से अलग कर स्वतंत्र केंद्रशासित प्रदेश बनाया गया।
D. पहली अनुसूची में संशोधन कर नए केंद्रशासित प्रदेशों को सूचीबद्ध किया गया।
E. संविधान में अनुच्छेद 239A जोड़ा गया जिसके अंतर्गत कुछ केंद्रशासित प्रदेशों में
विधानसभा और मंत्रिपरिषद की व्यवस्था का प्रावधान किया गया।
इस यह संशोधन से 
. केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासनिक विकास का आधार।
. इससे भारत की औपनिवेशिक विरासत के पूर्ण एकीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
. संघीय ढांचे में प्रशासनिक लचीलापन आया।

15. पंद्रहवां
वर्ष - 1963 
लागू -  05/10/1963
A. अनुच्छेद 217 में संशोधन उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु में वृद्धि की गई।
 किया गया।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की
सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई।
B. सेवा शर्तों की सुरक्षा, न्यायाधीशों की
सेवा शर्तों और वेतन-भत्तों को उनके नियुक्ति के बाद प्रतिकूल रूप से नहीं बदला जा सकता यह स्पष्ट किया गया।
इस संशोधन से - 
. न्यायपालिका की स्वतंत्रता को मजबूती मिली।
. इससे उच्च न्यायालयों की कार्य कुशलता में सुधार हुआ।
ग. संशोधन ने सेवा की आयु सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों (65 वर्ष) और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों (62 वर्ष) के बीच का स्पष्ट अंतर स्थापित किया।

16. सोलहवां - 
वर्ष - 1963
लागू - 05/10/1963
🔥राष्ट्र की एकता और अखंडता को बल
👉मुख्य बिंदु 
A. अभिव्यक्ति एवं संगठनों की स्वतंत्रता के नए आधार मानते हुए अनुच्छेद 19(2), 19(3) और 19(4) में संशोधन किया गया। इन उपबंधों में भारत की संप्रभुता और अखंडता (Sovereignty and Integrity of India) को युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाने के नए आधार के रूप में जोड़ा गया।
⚖️ अब राज्य, या अन्य की कोई कार्य/अभिव्यक्ति भारत की संप्रभुता या अखंडता को नुकसान पहुँचाती है, तो उस पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
B. पहले प्रतिबंधों का दायरा मुख्यतः सार्वजनिक व्यवस्था था जिसे इस संशोधन से राष्ट्र की एकता और अखंडता को स्पष्ट संवैधानिक संरक्षण दिया गया।
C. तीसरी अनुसूची में संशोधन कर
सांसदों, विधायकों और संवैधानिक पदाधिकारियों की शपथ में भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखने की प्रतिबद्धता जोड़ी गई।
✨  इस संशोधन से - 
. अलगाववादी प्रवृत्तियों पर रोक।
. मौलिक अधिकार राष्ट्रीय हित के अधीन।
. संविधान के राष्ट्रवादी और एकतावादी चरित्र को मजबूत किया गया।

17. सतरहवाँ 
वर्ष - 1964 
लागू - 20/06/1964
🔥 भूमि सुधार कानूनों को और अधिक संरक्षण
👉 मुख्य बिंदु - 
A. अनुच्छेद 31A के दायरे का विस्तार कर एस्टेट (Estate)” की परिभाषा में
🟨 रैयतवाड़ी (Ryotwari) भूमि
🟨 अन्य प्रकार की कृषि भूमि को भी शामिल किया गया।
B. नवीं अनुसूची का विस्तार करते हुए इसमें 44 और भूमि सुधार कानून जोड़े गए। इन कानूनों को मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती।
C. ज़मींदारी उन्मूलन और भूमि सीलिंग को मजबूती प्रदान करने हेतु  राज्य सरकारों द्वारा बनाए गए
🟨 ज़मींदारी उन्मूलन कानून
🟨 भूमि जोत सीमा कानून
को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान की गई।
D. भूमि सुधार कार्यक्रमों पर न्यायालयों की दखलअंदाज़ी को सीमित कर दिया गया। इससे सरकार की समाजवादी और पुनर्वितरण नीतियाँ सुचारु रूप से लागू हो सकीं।
इस संशोधन से - 
क. ग्रामीण सामाजिक–आर्थिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम।
ख. इससे स्पष्ट हुआ कि संपत्ति का अधिकार सामाजिक हित के अधीन है।
. भूमि सुधारों के संदर्भ में यह 1st, 4th और 17th संशोधनों की कड़ी माना जाता है।

🙏PM - स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी 1966 से 1977, 1980 से 1984 - 
इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में कुल 29 संविधान संशोधन हुए।
प्रथम कार्यकाल - 1966–1977
(18वाँ से 42वाँ संशोधन तक) कुल - 25 संशोधन
द्वितीय कार्यकाल - 1980–1984
(45वाँ से 48वाँ संविधान संशोधन) कुल - 4 संशोधन हुए

18. अठारहवां
वर्ष - 1966
लागू - 27/08/1968
🔥अनुच्छेद 3 में संशोधन
👉 मुख्य बिंदु - 
संविधान के अनुच्छेद 3 में (राज्य की परिभाषा में केवल राज्य शब्द था में केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया) संशोधन किया गया। जिस में यह स्पष्ट किया गया कि राज्यों के साथ-साथ केंद्र शासित प्रदेशों के क्षेत्र, नाम और सीमाओं में भी परिवर्तन किया जा सकता है। संघ सरकार गठन, विलय, विभाजन या सीमा परिवर्तन कर सकती है।
👉 यह संशोधन विशेष रूप से पंजाब के पुनर्गठन (पंजाब, हरियाणा का गठन और चंडीगढ़ को केंद्र शासित प्रदेश बनाने) की संवैधानिक बाधा दूर करने के लिए किया गया।

19. उन्नीसवां 
वर्ष 1966 - 
लागू - 11/12/1966
🔥चुनाव याचिकाओं से संबंधित प्रावधान में बदलाव, अनुच्छेद 324 में संशोधन संबंध में।
A. चुनाव से जुड़े विवादों की सुनवाई चुनाव न्यायाधिकरणों द्वारा होती थी।
उन्नीसवें संशोधन द्वारा इन चुनाव न्यायाधिकरणों को समाप्त कर न्यायिक प्रक्रिया न्यायालयों को सौंप दी गई। चुनाव संबंधी विवादों की सुनवाई का अधिकार अब: उच्च न्यायालय (High Courts) और सुप्रीम कोर्ट को दे दिया गया।
B. न्यायपालिका की भूमिका सुदृढ़ हुई
चुनाव विवादों के निपटारे में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता मजबूत हुई।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता
इससे चुनाव संबंधी विवादों का निपटारा अधिक कानूनी, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया गया।
✍️ इस संशोधन से - 
उन्नीसवाँ संविधान संशोधन चुनाव न्यायाधिकरणों को हटाकर चुनाव याचिकाओं को सीधे न्यायालयों के अधीन लाने वाला महत्वपूर्ण संशोधन है।

20. बीसवां  
वर्ष - 1966  
लागू - 22/12/1966
🔥अनुच्छेद 233 और 235 में संशोधन (न्यायिक सेवाओं) के संबंध में।
👉मुख्य बिंदु
A. पिछली नियुक्तियों को वैध ठहराया गया
कुछ राज्यों में जिला न्यायाधीशों और अन्य न्यायिक अधिकारियों की नियुक्तियाँ संविधान की प्रक्रिया से अलग तरीके से की गई थीं।
B. इस संशोधन द्वारा ऐसी नियुक्तियों को संवैधानिक वैधता प्रदान की गई। नियुक्तियों पर उठे कानूनी विवाद समाप्त हुए और न्यायिक प्रशासन में निरंतरता बनी रही।
C. पिछली तिथि से प्रभावी (संशोधन पूर्व प्रभाव से लागू) होने के कारण पहले की गई नियुक्तियाँ अमान्य नहीं हुईं।
D. राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों के बीच न्यायिक नियुक्तियों से जुड़े टकराव को सुलझाया गया।
✍️ इस संशोधन से - 
इस संशोधन द्वारा न्यायिक अधिकारियों की अनियमित नियुक्तियों को वैध बनाकर न्यायिक व्यवस्था को स्थिरता प्रदान की गई।

21. इक्कीसवां
वर्ष - 1967 
लागू --10/04/1967
🔥आठवीं अनुसूची में संशोधन
👉मुख्य बिंदु
. इस संशोधन द्वारा आठवीं अनुसूची में परिवर्तन करसिंधी भाषा को संवैधानिक मान्यता दी गई।
✍️ सारांश
इक्कीसवाँ संविधान संशोधन सिंधी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल कर भाषाई विविधता और सांस्कृतिक सम्मान को संवैधानिक मान्यता दी गई।

22. बाइसवां  
वर्ष - 1969
लागू - 25/09/1969
🔥आदिवासी आधार पर मेघालय राज्य का गठन 
👉मुख्य बिंदु
A. नए राज्य का गठन – असम से अलग कर नए राज्य मेघालय का गठन किया गया।
छठी अनुसूची से संबंध
B. यह क्षेत्र पहले छठी अनुसूची के अंतर्गत आता था। आदिवासी स्वशासन की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए राज्य का गठन किया गया।
C. इससे पूर्वोत्तर भारत में प्रशासनिक सुविधा और राजनीतिक स्थिरता बढ़ी।
सांस्कृतिक और क्षेत्रीय पहचान को मान्यता दी गई। खासी, जयंतिया और गारो जनजातियों की भाषा, संस्कृति और पहचान को संवैधानिक संरक्षण मिला।
✍️ सारांश - 
बाईसवाँ संविधान संशोधन मेघालय को पूर्ण राज्य बनाकर पूर्वोत्तर भारत के संघीय ढांचे को मजबूत करने वाला है।

23. तेईसवां  
वर्ष - 1969  
लागू - 23/01/1970
🔥अनुच्छेद 330 (लोकसभा), अनुच्छेद 332 (राज्य विधानसभाओं) में एंग्लो-इंडियन समुदाय से संबंधित प्रावधानों में परिवर्तन, आरक्षण समाप्त करना।
मुख्य बिंदु - 
A. लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए सीटों के आरक्षण को समाप्त किया गया।
B. इससे पहले राष्ट्रपति/राज्यपाल को एंग्लो-इंडियन समुदाय के सदस्यों को नामित करने का अधिकार था। इस संशोधन द्वारा यह नामांकन व्यवस्था समाप्त कर दी गई।
C. अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण जारी रखा गया, इसमें कोई कटौती नहीं की गई।
👉इस संशोधन से - 
क. संविधान को सामाजिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाया गया।
.अब एंग्लो-इंडियन हेतु आरक्षित सीटों का अंत।

24. चौबीसवां 
वर्ष - 1971 
लागू - 05/11/1971
🔥sc/st आरक्षण के प्रावधानों में संशोधन।
👉 मुख्य बिंदु - 
A. अनुच्छेद 334 में संशोधन कर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में SC/ST हेतु आरक्षण की समय-सीमा से संबंधित प्रावधान बदल कर इस अवधि को 1970 से बढ़ाकर 1980 तक किया गया।
B. छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले जनजातीय क्षेत्रों में भी SC/ST का आरक्षण समाप्त किया गया। नागालैंड व असम के कुछ जनजातीय क्षेत्रों में राज्य में SC/ST आरक्षण समाप्त कर दिया गया।
जहां जनजातीय आबादी अधिक थी, वहाँ अलग से आरक्षण को अनावश्यक माना गया।
✍️ इस संशोधन से - 
क. SC/ST आरक्षण की अवधि बढ़ी।
ख नागालैंड और असम के कुछ जनजातीय क्षेत्रों में इसे समाप्त किया गया।

25. पच्चीसवां
वर्ष - 1971
लागू-  20/04/1972
🔥संपत्ति के अधिकार में बड़ा परिवर्तन
👉मुख्य बिंदु - 
A. अनुच्छेद 31(2) में प्रयुक्त शब्द मुआवज़ा (Compensation) को हटाकर राशि (Amount) कर दिया गया।
इससे सरकार को संपत्ति अधिग्रहण पर न्यायालय द्वारा मुआवज़े की मात्रा की समीक्षा से छूट मिल गई।
B. अनुच्छेद 31(C) जोड़ा गया
C. यदि कोई कानून नीति निदेशक तत्वों (अनुच्छेद 39(b) और 39(c)) को लागू करने के लिए बनाया गया हो, तो वह कानून मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 14, 19, 31) के उल्लंघन के आधार पर न्यायालय में चुनौती योग्य नहीं होगा।
D. अदालतें अब यह जांच नहीं कर सकती कि दी गई राशि पर्याप्त है या नहीं। इससे संसद की शक्ति बढ़ी और न्यायपालिका की भूमिका सीमित हुई।
E. समाजवादी नीतियों को लागू करने हेतु 
✨भूमि सुधार
✨संपत्ति का समान वितरण
✨आर्थिक असमानता कम करना।
👉इस संशोधन से - 
. इस संशोधन ने मौलिक अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों के बीच टकराव को स्पष्ट किया।
. बाद में केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) मामले में इस संशोधन की न्यायिक व्याख्या हुई।

26. छब्बीसवां
वर्ष - 1971
लागू - 28/12/1971
🔥राजशाही समाप्त
👉 मुख्य बिंदु - 
A. भारतीय संविधान से पूर्व रियासतों के शासकों (Princes) की संवैधानिक मान्यता समाप्त कर विशेष दर्जा खत्म किया गया।
B. प्रिवी पर्स (राजकीय भत्ता Privy Purse) समाप्त कर, अनुच्छेद 291 और 362 को हटा दिया गया।
C. अनुच्छेद 366 में संशोधन कर शासक (Ruler) की परिभाषा को अप्रभावी/निरस्त कर दिया गया।
D. इस संशोधन ने समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) को मजबूती दी गई जिसमें
संविधान में किसी भी व्यक्ति को जन्म या पद के आधार पर विशेषाधिकार न देने की भावना को सुदृढ़ किया गया है।
✍️इस संशोधन से - 
. लोकतांत्रिक और समाजवादी व्यवस्था  मजबूत हुई।
. राजशाही विशेषाधिकारों का अंत।

27. सत्ताइसवां
वर्ष - 1972 
लागू- 30/12/1971
🔥केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित संशोधन
👉मुख्य बिंदु - 
A. अनुच्छेद 239A में संशोधन किया गया। इसके अंतर्गत राष्ट्रपति को यह अधिकार मिला कि वे कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा, मंत्रिपरिषद या दोनों का गठन कर सकें।
B. इस संशोधन के माध्यम से पुडुचेरी में
निर्वाचित विधानसभा तथा मंत्रिपरिषद की व्यवस्था को संवैधानिक मान्यता मिली।
C. केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासक (Lieutenant Governor) की शक्तियों को स्पष्ट करते हुए स्पष्ट किया गया कि वह राष्ट्रपति की ओर से शासन करेगा।
D. छोटे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लोकतांत्रिक शासन प्रणाली को बढ़ावा देने का प्रयास।
✍️इस संशोधन से -
केंद्र शासित प्रदेशों को सीमित स्तर पर स्वशासन देना।
प्रशासन को अधिक व्यावहारिक और जनोन्मुख बनाना।

28. अट्ठाइसवां
वर्ष - 1972
लागू - 28/09/1972
🔥अनुच्छेद 314 का निरसन
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ संविधान के अनुच्छेद 314 को पूरी तरह हटा दिया गया। यह अनुच्छेद पूर्व रियासतों के सिविल सेवकों (ICS/IAS प्रकार की सेवाओं) से संबंधित था।
2️⃣ पूर्व रियासतों के अधिकारियों की विशेष सुरक्षा समाप्त इस अनुच्छेद के अंतर्गत, वेतन, सेवा शर्तें, पद की गारंटी
जैसी विशेष संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त थी।
संशोधन द्वारा यह विशेष संरक्षण समाप्त कर दिया गया।
3️⃣ पूरे देश में समान सेवा शर्तें लागू करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
अब पूर्व रियासतों और अन्य क्षेत्रों के अधिकारियों में कोई संवैधानिक भेद नहीं रहा।
4️⃣ समानता के अधिकार को बल
अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) की भावना को मजबूत किया गया।
जन्म या पूर्व शासकीय पृष्ठभूमि के आधार पर विशेषाधिकार समाप्त हुए।
इस संशोधन से -
✍️इस संशोधन से -
⚖️भारतीय प्रशासन को एकीकृत और लोकतांत्रिक बनाना।
⚖️रियासतकालीन अवशेषों को पूरी तरह समाप्त करना।

29. उनतीसवां
वर्ष - 1972 
लागू- 09/06/1972
🔥केरल भूमि सुधार कानून को संरक्षण
इस संशोधन द्वारा केरल भूमि सुधार अधिनियम, 1969
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ केरल भूमि सुधार (संशोधन) अधिनियम, 1971 को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया गया।
2️⃣ नौवीं अनुसूची में शामिल होने के कारण अब मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 14, 19, 31) के उल्लंघन के आधार पर न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
3️⃣ ज़मींदारी प्रथा का अंत करते हुए भूमिहीन किसानों को भूमि उपलब्ध कराना
सामाजिक-आर्थिक समानता बढ़ाने के प्रावधान की गई।
4️⃣ अनुच्छेद 31(B) के अंतर्गत नौवीं अनुसूची में डाले गए कानूनों को
संवैधानिक संरक्षण। 29वाँ संशोधन इसी अनुच्छेद के तहत किया गया।
5️⃣ यह संशोधन राज्य के नीति निदेशक तत्वों विशेषकर समान वितरण और सामाजिक न्याय की भावना को आगे बढ़ाता है।
✍️इस संशोधन से -
⚖️भूमि सुधारों को लागू करने में आने वाली न्यायिक बाधाओं को दूर किया गया।

30. तीसवां 
वर्ष - 1972   
लागू - 27/02/1973
🔥लोकसभा एवं विधानसभाओं चुनाव में याचिकाओं (Election Petitions) से संबंधित है।
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 329 में संशोधन कर यह व्यवस्था की गई कि लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं के चुनावों में, यदि निर्वाचन क्षेत्र का विलय/पुनर्गठन हुआ हो, तो निर्वाचन क्षेत्र के सीमा निर्धारण (Delimitation) को चुनाव याचिका के माध्यम से चुनौती नहीं दी जा सकेगी।
2️⃣ चुनाव प्रक्रिया के दौरान न्यायालयों के हस्तक्षेप को सीमित किया गया। इससे चुनाव प्रक्रिया को सुचारु और निर्बाध रखने का उद्देश्य था।
3️⃣ सीमा निर्धारण कानून को संरक्षण
संसद द्वारा बनाए गए सीमा निर्धारण अधिनियम को न्यायिक चुनौती से बचाया गया।
इस संशोधन से -
⚖️चुनावी प्रक्रिया में बार-बार होने वाले मुकदमों से बचाव।
⚖️निर्वाचन प्रक्रिया को समयबद्ध और स्थिर बनाना।

31. इक्कीसवां
वर्ष - 1973 
लागू - 17/10/1973
🔥लोकसभा की सीटों की संख्या में वृद्धि
इस संशोधन द्वारा लोकसभा के सदस्यों की संख्या बढ़ाई गई।
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣लोकसभा सदस्य संख्या अधिकतम 525 से बढ़ाकर 545 कर दी गई।
2️⃣ राज्यों के प्रतिनिधित्व में विस्तार
(जनसंख्या वृद्धि के आधार पर) करते हुए लोकसभा में अधिक प्रतिनिधित्व दिया गया।
3️⃣ अनुच्छेद 81 (लोकसभा की संरचना) में संशोधन किया गया। राज्यों के लिए आवंटित सीटों की संख्या बढ़ाई गई।
4️⃣ दिल्ली (केंद्र शासित प्रदेश) को प्रतिनिधित्व केंद्र शासित प्रदेशों, विशेषकर दिल्ली, के प्रतिनिधित्व को स्पष्ट और मजबूत किया गया।
इस संशोधन से -
⚖️बदलती जनसंख्या संरचना के अनुरूप
लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना।

32. बत्तीसवां 
वर्ष - 1973
लागू  - 01/07/1974
🔥सिक्किम से संबंधित विशेष संशोधन
(सिक्किम का भारत में विलय)
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ सिक्किम को भारत को 22वां पूर्ण राज्य बनाने का संवैधानिक आधार तैयार किया गया।
2️⃣ संविधान में नया अनुच्छेद 371F जोड़ा गया। इसके तहत सिक्किम को कुछ विशेष संवैधानिक प्रावधान दिए गए।
3️⃣ सिक्किम की मौजूदा विधानसभा संरचना और चुनाव व्यवस्था को विधिक मान्यता प्रदान की गई।
4️⃣ संसद को यह अधिकार मिला कि वह
किन केंद्रीय कानूनों को सिक्किम पर लागू किया जाए, यह तय कर सके।
5️⃣ विलय के बाद भी सिक्किम की स्थानीय परंपराओं, कानूनों व व्यवस्थाओं को संरक्षण दिया गया।
इस संशोधन से -
⚖️सिक्किम का भारत में शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित एकीकरण।
⚖️राष्ट्रीय एकता के साथ क्षेत्रीय विशेषताओं का सम्मान।

33. तेतीसवाँ
वर्ष - 1974
लागू - 19/05/1974
🔥सांसदों और विधायकों के इस्तीफे से संबंधित
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ यह संशोधन संसद और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों के इस्तीफे से जुड़ा है।
2️⃣ अनुच्छेद 101 (संसद), अनुच्छेद 190 (विधानसभा/परिषद) सदस्यता में संशोधन किया गया।
3️⃣ अब कोई भी सांसद या विधायक
लिखित रूप में, स्वेच्छा से, और स्पीकर/सभापति को संबोधित करके ही इस्तीफा दे सकता है।
4️⃣ स्पीकर या सभापति यह जांच कर सकता है कि इस्तीफा स्वेच्छा से और वास्तविक है या नहीं। यदि उन्हें लगे कि इस्तीफा दबाव या मजबूरी में है तो वे उसे अस्वीकार कर सकते हैं।
5️⃣ इस संशोधन का उद्देश्य जबरन इस्तीफों या राजनीतिक दबाव से जन प्रतिनिधियों को बचाना था।
इस संशोधन से -
⚖️विधायकों/सांसदों की स्वतंत्रता और गरिमा की रक्षा। संसदीय प्रणाली को अधिक स्थिर बनाना।

34. चौतीसवां
 वर्ष - 1974 
लागू - 07/09/1974
🔥भूमि सुधार कानूनों को संरक्षण
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ इस संशोधन द्वारा कई राज्यों के भूमि सुधार कानूनों को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया गया।
2️⃣ नौवीं अनुसूची में शामिल होने के कारण ये कानून मौलिक अधिकारों (विशेषकर अनुच्छेद 14, 19 और 31)
के उल्लंघन के आधार पर न्यायालय में चुनौती नहीं दिए जा सकते थे।
3️⃣ प्रभावित राज्य इस संशोधन में मुख्यतः केरल, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के भूमि सुधार कानून शामिल किए गए।
4️⃣ अनुच्छेद 31-B के अंतर्गत नौवीं अनुसूची में डाले गए कानूनों को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त होता है।
इस संशोधन से -
⚖️ज़मींदारी और बड़े भू-स्वामित्व को समाप्त करना।
⚖️भूमिहीन किसानों को भूमि उपलब्ध कराना।
⚖️सामाजिक और आर्थिक समानता स्थापित करने के प्रयास।
⚖️ समाजवादी विचारधारा को बढ़ावा
⚖️ नीति निदेशक तत्वों और समाजवादी राज्य की अवधारणा को मजबूत करना।
⚖️ भूमि सुधारों को लागू करने में न्यायिक बाधाओं को दूर किया गया।

35. पैंतीसवां 
वर्ष - 1974 
लागू - 01/03/1975
🔥सिक्किम को सह-राज्य (Associate State) का दर्जा
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ इस संशोधन द्वारा सिक्किम को भारत का सह-राज्य (Associate State) घोषित किया गया जो भारत के संवैधानिक इतिहास में एक अनोखी व्यवस्था थी।
2️⃣ संविधान में नया अनुच्छेद 2A जोड़ा गया। इसके अंतर्गत संसद को यह अधिकार मिला कि वह किसी क्षेत्र को सह-राज्य के रूप में भारत में सम्मिलित कर सके।
3️⃣ दसवीं अनुसूची संविधान में जोड़ी गई,
जिसमें सिक्किम के प्रशासन, शासन व्यवस्था और भारत से संबंधों का विवरण था।
4️⃣ सिक्किम को अपनी आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था, स्थानीय कानून, बनाए रखने की अनुमति दी गई।
5️⃣ भारत सरकार को रक्षा, विदेश नीति, संचार जैसे विषयों पर अधिकार दिया गया।
इस संशोधन से -
⚖️सिक्किम का भारत के साथ शांतिपूर्ण और चरणबद्ध एकीकरण।
⚖️क्षेत्रीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए लोकतांत्रिक समाधान।

36. छातीसवां
वर्ष - 1975
लागू - 26/04/1975
🔥सिक्किम को भारत का पूर्ण राज्य बनाया गया
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ इस संशोधन द्वारा सिक्किम को आधिकारिक रूप से भारत का 23वाँ राज्य घोषित किया गया।
2️⃣ सिक्किम को प्रथम अनुसूची में शामिल किया गया।
3️⃣ चौथी अनुसूची में संशोधन राज्यसभा में प्रतिनिधित्व हेतु सिक्किम को 1 सीट प्रदान की गई।
4️⃣ अनुच्छेद 371F को लागू किया गया जिसके तहत सिक्किम को विशेष प्रशासनिक, सामाजिक व कानूनी संरक्षण
दिया गया।
5️⃣ 35वें संशोधन में जोड़े गए अनुच्छेद 2A दसवीं अनुसूची को समाप्त कर दिया गया।
6️⃣ सिक्किम विधानसभा और कानूनों की मान्यता देते हुए सिक्किम की मौजूदा विधानसभा, स्थानीय कानून को संवैधानिक मान्यता दी गई।
इस संशोधन से -
⚖️सिक्किम का भारत में पूर्ण, स्थायी और लोकतांत्रिक विलय।
⚖️राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना।
⚖️भारत के संघीय ढांचे में एक नए राज्य का स्थायी समावेश हुआ।

37. सैंतीसवाँ
वर्ष - 1975  
लागू - 05/05/1975
🔥अरुणाचल प्रदेश से संबंधित संशोधन
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अरुणाचल प्रदेश को संघ शासित प्रदेश के रूप में विशेष संवैधानिक दर्जा दिया गया।
2️⃣ अनुच्छेद 239A के अंतर्गत अरुणाचल प्रदेश में विधानसभा, मंत्रिपरिषद की व्यवस्था का प्रावधान किया गया।
3️⃣ जनता की भागीदारी से शासन चलाने के लिए निर्वाचित सरकार का मार्ग प्रशस्त हुआ।
4️⃣ अरुणाचल प्रदेश का प्रशासन
राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त प्रशासक (लेफ्टिनेंट गवर्नर) के माध्यम से चलाया गया।
5️⃣ अरुणाचल प्रदेश को आगे चलकर
पूर्ण राज्य बनाए जाने की दिशा में
एक महत्वपूर्ण कदम था। बाद में 1987 में अरुणाचल प्रदेश पूर्ण राज्य बना।
इस संशोधन से -
⚖️दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्र में
लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था स्थापित करना।
⚖️प्रशासनिक सुविधा और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना।
⚖️पूर्वोत्तर भारत के प्रशासनिक विकास में अहम भूमिका।

38. अड़तीसवाँ 
वर्ष - 1975 
लागू - प्रभावी - (with retrospective effect भूतकाल से लागू होना। वर्तमान में बने नियम के भूतकाल की कार्रवाई पर पहले से घट चुकी घटनाओं पर भी प्रभावी।
🔥आपातकाल संबंधी प्रावधानों में परिवर्तन
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ यह संशोधन राष्ट्रीय आपातकाल और राज्य में राष्ट्रपति शासन से संबंधित है।
2️⃣ राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा को न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) से बाहर कर दिया गया। राष्ट्रपति द्वारा आपातकाल घोषित करने के निर्णय को
अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती थी।
3️⃣ राष्ट्रपति शासन (राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता) की घोषणा को भी
न्यायालय की जांच से मुक्त कर अनुच्छेद 356 में परिवर्तन किया गया।
4️⃣ वित्तीय आपातकाल की घोषणा को 
न्यायिक चुनौती से सुरक्षित करने हेतु अनुच्छेद 360 में संशोधन किया गया।
5️⃣ आपातकाल लगाने में राष्ट्रपति की संतुष्टि को अंतिम और निर्णायक माना गया।
6️⃣ कार्यपालिका (Executive) की शक्ति बहुत बढ़ गई और न्यायपालिका की भूमिका सीमित हो गई।
🎤इस संशोधन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि -
यह संशोधन आपातकाल (1975–77) के दौरान किया गया।
⚖️ बाद का घटनाक्रम - 
📝 बाद में 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा
📝38वें संशोधन के अधिकांश प्रावधान
हटा दिए गए और न्यायिक समीक्षा पुनः बहाल की गई।

39. उनचालीसवां 
वर्ष - 1975
लागू -10/08/1975
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के 🔥चुनाव से संबंधित
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ यह संशोधन राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष
के चुनाव विवादों से जुड़ा है।
2️⃣ इन उच्च पदों के चुनाव से जुड़े विवादों को न्यायालय की अधिकार-सीमा से बाहर कर दिया गया। अब ऐसे विवाद संसद द्वारा बनाए गए कानून के अनुसार तय होने थे।
3️⃣  संविधान में नया अनुच्छेद 329A जोड़ा गया। इसके तहत प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव को न्यायिक समीक्षा से मुक्त कर दिया गया।
4️⃣ इंदिरा गांधी के चुनाव को संरक्षण
यह संशोधन विशेष रूप से इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा इंदिरा गांधी के चुनाव को अवैध ठहराने के निर्णय (1975) के बाद लाया गया। संशोधन के जरिए उनके चुनाव को संवैधानिक संरक्षण दिया गया।
5️⃣ समानता के अधिकार पर आघात इस संशोधन से अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) की भावना को ठेस पहुँची क्योंकि कुछ व्यक्तियों को विशेष संरक्षण दिया गया।
6️⃣  यह संशोधन आपातकाल (1975–77) के दौरान पारित हुआ। कार्यपालिका की शक्ति अत्यधिक बढ़ गई।
इस संशोधन से  की पृष्ठभूमि -
इंदिरा नेहरू गांधी बनाम राज नारायण (1975) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने 39वें संशोधन के कुछ हिस्सों को संविधान की मूल संरचना के विरुद्ध मानते हुए अवैध घोषित कर दिया।

40. चालीसवां  
वर्ष - 1976  
लागू-  27/05/1976
🔥आपातकाल अवधि में बदलाव
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ यह संशोधन आपातकाल से संबंधित है। संशोधन के तहत राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) की अवधि को पहले 6 महीने से 1 वर्ष तक बढ़ाया गया।
2️⃣ संसद को यह अधिकार मिला कि वह आपातकाल को अनंतकाल तक बढ़ाने की व्यवस्था कर सके यदि राष्ट्रपति की घोषणा को पारित कानून के अनुसार बढ़ाया जाए।
3️⃣ अनुच्छेद 356 में संशोधन कर राष्ट्रपति शासन की अवधि राज्य में संवैधानिक विफलता की स्थिति में समय सीमा बढ़ाई गई।
4️⃣  38वें और 39वें संशोधन की तरह,
कुछ मामलों में न्यायपालिका की जांच की सीमा सीमित की गई। यह कार्यपालिका के अधिकार को बढ़ावा देने वाला कदम था।
इस संशोधन से -
⚖️ आपातकाल लागू होने पर कार्यपालिका को सशक्त और लचीला बनाया गया।
⚖️ आपातकाल (1975–77) के दौरान पारित
⚖️ संवैधानिक सुधारों में से एक महत्वपूर्ण कदम था।

41. इकतालीसवां
वर्ष - 1976
लागू - 07/09/1976
उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु में वृद्धि
उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु
👉 62 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी गई।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु
👉 पहले से ही 65 वर्ष थी, इसमें कोई परिवर्तन नहीं किया गया।
न्यायिक अनुभव का लाभ उठाने का उद्देश्य
इस संशोधन का उद्देश्य अनुभवी न्यायाधीशों की सेवाओं को अधिक समय तक प्राप्त करना था।
न्यायपालिका की निरंतरता और स्थिरता
बार-बार सेवानिवृत्ति से उत्पन्न रिक्तियों को कम करना।
न्यायिक कार्यों में स्थायित्व और निरंतरता बनाए रखना।
लागू होने की तिथि
यह संशोधन 7 सितंबर 1976 से प्रभावी हुआ।
प्रधानमंत्री का कार्यकाल
यह संशोधन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में पारित हुआ।
🔹 संबंधित अनुच्छेद
अनुच्छेद 217 (उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति व सेवानिवृत्ति)


42. बयालिसवां 
वर्ष - 1976
लागू  - 03/01/1977                                   - 01/02/1977
         - 01/04/1977
🔥प्रस्तावना (Preamble) में परिवर्तन
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ भारत को “सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न 
समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य” घोषित किया गया। समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द जोड़े गए।
राष्ट्र की एकता के स्थान पर राष्ट्र की एकता और अखंडता किया गया।
2️⃣ संविधान में नया भाग IV-A जोड़ा गया। अनुच्छेद 51A के अंतर्गत 10 मूल कर्तव्य नागरिकों के लिए निर्धारित किए गए।
3️⃣ संसद को संविधान संशोधन की व्यापक शक्ति दी गई। न्यायालयों की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्ति सीमित की गई।
4️⃣ न्यायपालिका की शक्तियों में कटौती
सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों की शक्तियाँ सीमित की गईं। कुछ मामलों में अदालतों को कानूनों की वैधता पर प्रश्न उठाने से रोका गया।
5️⃣ नीति निदेशक तत्वों को प्राथमिकता
मूल अधिकारों पर नीति निदेशक तत्वों को प्रधानता दी गई (अनुच्छेद 39(b), 39(c) आदि)।
6️⃣ लोकसभा और राज्य विधानसभाओं का कार्यकाल 👉 5 वर्ष से बढ़ाकर 6 वर्ष कर दिया गया।
7️⃣ आपातकाल के दौरान केंद्र सरकार की शक्तियाँ बढ़ाईं गईं।राज्यों पर केंद्र का नियंत्रण और अधिक मजबूत हुआ।
8️⃣ अखिल भारतीय सेवा का विस्तार।
केंद्र को राज्यों की प्रशासनिक मशीनरी पर अधिक नियंत्रण।
9️⃣ शिक्षा, वन और वन्यजीव संरक्षण को समवर्ती सूची में डाला गया।
🔟 संविधान की समाजवादी दिशा
आर्थिक समानता और सामाजिक न्याय को राज्य का प्रमुख लक्ष्य बनाया गया।

🙏प्रधानमंत्री - जनता पार्टी के मोरारजी देसाई 
(इनके नेतृत्व में दो संविधान संशोधन हुए 43वाँ व 44वां)
43. तेतालिसवां 
वर्ष - 1977 
लागू - 13/04/1978
न्यायपालिका की स्वतंत्रता की पुनर्स्थापना
42वें संशोधन द्वारा लगाए गए कई प्रतिबंध हटाए गए।
1️⃣  न्यायालयों की न्यायिक समीक्षा की शक्ति फिर से मजबूत की गई।
2️⃣ अनुच्छेद 31C में संशोधन, 42वें संशोधन द्वारा नीति निदेशक तत्वों को मूल अधिकारों पर जो असीमित प्रधानता दी गई थी, उसे सीमित किया गया। अब केवल अनुच्छेद 39(b) और 39(c) से संबंधित कानूनों को ही संरक्षण दिया गया।
3️⃣ संसद की संविधान संशोधन शक्ति पर न्यायिक नियंत्रण पुनः स्थापित किया गया।
4️⃣ उच्च न्यायालयों की शक्तियों की बहाली उच्च न्यायालयों को फिर से
👉 रिट जारी करने
👉 कानूनों की संवैधानिकता की समीक्षा
की पूर्ण शक्ति मिली।
5️⃣ आपातकालीन प्रभावों को कम करना
आपातकाल के दौरान न्यायपालिका को कमजोर करने वाले प्रावधानों को समाप्त किया गया।
6️⃣ लोकतांत्रिक संतुलन की पुनः स्थापना
विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका के बीच संतुलन को बहाल किया गया।

44. चवालीसवां 
वर्ष - 1978
लागू - 20-06-1979
🔥मौलिक अधिकारों की पुनर्स्थापना
अनुच्छेद 19 के मौलिक अधिकारों को राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी निलंबित नहीं किया जा सकता।
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ केवल युद्ध या बाहरी आक्रमण की स्थिति में ही अनुच्छेद 19 निलंबित होगा।
2️⃣ राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कठिन बनाई आपातकाल की घोषणा के लिए
👉 मंत्रिपरिषद की लिखित सिफारिश अनिवार्य की गई। राष्ट्रपति द्वारा घोषित आपातकाल के 1 महीने के भीतर संसद की स्वीकृति आवश्यक।
3️⃣ संसद की स्वीकृति उपरांत हर 6 महीने में आपातकाल को पुनः अनुमोदित किया जाएगा।
4️⃣ (अनुच्छेद 356) के आधार पर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की प्रक्रिया को अधिक लोकतांत्रिक और सीमित बनाया गया। मनमाने ढंग से राज्य सरकार बर्खास्त करने पर रोक।
5️⃣ संपत्ति का अधिकार अब मौलिक अधिकार नहीं, अनुच्छेद 31 हटाया गया।
संपत्ति का अधिकार अब कानूनी अधिकार बना (नया अनुच्छेद 300A)।
6️⃣ जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा अनुच्छेद 20 और 21 किसी भी आपातकाल में निलंबित नहीं किए जा सकते।
7️⃣ लोकसभा व विधानसभा का कार्यकाल पुनः 5 वर्ष किया गया(42वें संशोधन द्वारा बढ़ाया गया)।
8️⃣ प्रेस की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों को मजबूत किया गया।तानाशाही प्रवृत्तियों पर संवैधानिक रोक।

🙏 प्रधानमंत्री - इंदिरा गांधी (द्वितीय कार्यकाल (1980 से 1984)
45. पैंतालिसवां 
वर्ष - 1980 
लागू- 25/01/1980
🔥अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण की अवधि बढ़ाई गई।
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में
अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए सीट आरक्षण की अवधि 20 जनवरी 1980 से आगे बढ़ाई गई।
2️⃣ विशेष प्रतिनिधित्व की निरंतरता
यह संशोधन, अनुच्छेद 334 से संबंधित है।
आदिवासी वर्ग को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में निरंतरता आई।
3️⃣ संविधान में पहले से मौजूद आरक्षण की समय-सीमा को बढ़ाया गया, ताकि सामाजिक-राजनीतिक संतुलन बना रहे।
✍️इस संशोधन से - 
लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूती
जनजातीय क्षेत्रों की आवाज़, संसद और विधानसभाओं में बनी रहे, इसी उद्देश्य से यह संशोधन किया गया।

46.छियालीसवां 
वर्ष - 1982 
लागू - 02/03/1983
🔥अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण की अवधि बढ़ाई गई।
👉मुख्य बिंदु - 
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में
1️⃣ अनुच्छेद 334 में (SC) (ST) के लिए सीटों के आरक्षण की अवधि 10 वर्ष के लिए बढ़ाई गई। यह व्यवस्था 26 जनवरी 1990 तक जारी रखी गई।
👉 इस संशोधन से - 
जो आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व की समय-सीमा तय कर वंचित और कमजोर वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में निरंतरता देना।

47. सैंतालीसवां 
वर्ष - 1984
लागू - 26/08/1984
🔥अनुसूचित क्षेत्रों में भूमि सुधार कानून
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ न्यायिक समीक्षा से संरक्षण दिया गया।
2️⃣ नवीं अनुसूची में भूमि सुधार से संबंधित कानूनों को शामिल किया गया।
जिससे  मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर अदालत में चुनौती से सुरक्षित हो गए।
3️⃣ आदिवासियों की भूमि गैर-आदिवासियों को जाने से रोकने वाले कानूनों को मजबूत किया गया।
4️⃣ आंध्र प्रदेश से संबंधित भूमि सुधार कानूनों को संरक्षण देने के लिए लाया गया।
👉 इस संशोधन से - 
⚖️सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना।
⚖️आदिवासी क्षेत्रों में  आर्थिक शोषण और भूमि हड़प को रोकना।

48.अड़तालीसवां
वर्ष - 1984
लागू - 26/08/1984
🔥 पंजाब में राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाई गई।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ पंजाब में लागू राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) की अवधि एक वर्ष से अधिक समय तक बढ़ाने की अनुमति दी गई।
2️⃣ अनुच्छेद 356 में अस्थायी अपवाद
सामान्यतः राष्ट्रपति शासन के अनुसार एक वर्ष से अधिक नहीं लगाया जा सकता में संशोधन अनुसार पंजाब को इस सीमा से अस्थायी रूप से मुक्त किया गया।
3️⃣  आंतरिक अशांति और आतंकवाद की स्थिति थी। राज्य में सामान्य संवैधानिक व्यवस्था संभव न होने के कारण यह संशोधन लाया गया।
✍️इस संशोधन से - 
पंजाब में राष्ट्रपति शासन अस्थायी रूप से बढ़ा जो केवल पंजाब राज्य में सीमित अवधि के लिए लागू किया गया।

49.उनचासवां 
वर्ष - 1984
लागू - 11/09/1984
1️⃣ पांचवीं अनुसूचित (पाँचवीं अनुसूची उन क्षेत्रों पर लागू होती है जहाँ आदिवासी जनसंख्या अधिक होती है।) से त्रिपुरा को बाहर किया गया।
2️⃣ त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्रों के लिए
अलग प्रकार की प्रशासनिक व्यवस्था लागू की गई जिसके बाद में त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (TTAADC) का गठन हुआ।
✍️इस संशोधन से - 
⚖️ त्रिपुरा को इस व्यवस्था से अलग किया गया कर वहां की विशिष्ट सामाजिक-राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप प्रशासनिक ढांचा बनाया गया।
⚖️जनजातीय और गैर-जनजातीय आबादी के बीच संतुलन बनाए रखना।

50.पचासवां 
वर्ष - 1984 
लागू - 11/09/1984
🔥राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कार्मिकों के मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध।
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 33 के अंतर्गत सशस्त्र बल, अर्धसैनिक बल, पुलिस, खुफिया एजेंसियाँ
और उनसे संबंधित सेवाओं के कर्मचारियों के मौलिक अधिकार सीमित/प्रतिबंधित किए जा सकते हैं।
2️⃣ जिन सेवाओं का कार्य राष्ट्र की संप्रभुता, अखंडता और सुरक्षा से जुड़ा है,
उनके लिए सामान्य नागरिकों जैसे सभी मौलिक अधिकार आवश्यक नहीं माने गए।
3️⃣ संसद को यह शक्ति दी गई कि वह यह निर्धारित कर सके किन सेवाओं पर कौन से मौलिक अधिकार लागू होंगे या नहीं।
✍️इस संविधान संशोधन से - 
⚖️ सुरक्षा बलों में अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और गोपनीयता बनी रहे।
⚖️ राष्ट्रीय सुरक्षा केंद्रित है न कि सामान्य नागरिक अधिकारों को समाप्त करने वाला।

51. इक्यावनवां 
वर्ष - 1984 - 
लागू - 16/06/1986
🔥अनुच्छेद 330 (लोकसभा में SC/ST हेतु आरक्षण) से संबंधित है।अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए लोकसभा सीटों में आरक्षण का प्रावधान किया गया।
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ मेघालय, अरुणाचल प्रदेश,मिजोरम, नागालैंड इन राज्यों में ST आबादी अधिक होने के बावजूद पहले लोकसभा में आरक्षण का स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान नहीं था।
✍️इस संशोधन से - 
⚖️जनजातीय बहुल राज्यों को उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना।
⚖️लोकतांत्रिक व्यवस्था में आदिवासी समुदाय की भागीदारी मजबूत करना।
⚖️पूर्वोत्तर राज्यों की विशिष्ट पहचान।

प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी - 
      (के कार्यकाल में 52 से लेकर 63 तक कुल 12 संशोधन किए गए)
52. बावनवां  
वर्ष - 1985   
लागू -  01/03/1985
🔥दलबदल कानून मंत्री, सांसद और विधायक—सभी पर समान रूप से लागू किया गया।
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ दलबदल विरोधी कानून की शुरुआत
संविधान में दसवीं अनुसूची जोड़ी गई।जिसका उद्देश्य राजनीतिक दलबदल पर रोक लगाना था।
2️⃣ किसी सांसद/विधायक की सदस्यता समाप्त हो सकती है यदि वह—स्वेच्छा से अपनी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता छोड़ दे, या पार्टी के व्हिप के विरुद्ध मतदान करे, या निर्दलीय सदस्य होकर किसी पार्टी में शामिल हो जाए, या नामांकित सदस्य 6 माह बाद किसी पार्टी में शामिल हो।
3️⃣ इस संबंध में  लोकसभा/ विधानसभा अध्यक्ष को निर्णय लेने का अधिकार दिया गया।
4️⃣ सरकारों को बार-बार गिरने से रोकना।
लोकतंत्र में स्थिरता और नैतिकता बनाए रखना।
5️⃣  एक-तिहाई सदस्यों के अलग होने को दलबदल नहीं माना जाता था
(इसे बाद में 91वें संशोधन, 2003 द्वारा समाप्त कर दिया गया)।
✍️इस संशोधन से - 
बार बार सरकारों को गिरने से बचाया गया एवं राजनीति में सुचिता को बनाए रखने के प्रयास किए गए।

53. तरेपनवां 
वर्ष - 1986 
लागू -   20/ 02/1987
🔥मिजोरम राज्य से संबंधित।
👉 मुझे बिंदु - 
1️⃣ संविधान में अनुच्छेद 371G जोड़ा गया जिससे मिज़ोरम की विधानसभा की विशेष संरचन में कम-से-कम 40 सदस्य होंगे।
2️⃣ धार्मिक व सामाजिक परंपराओं की सुरक्षा के अंतर्गत संसद का कोई भी कानून तब तक मिज़ोरम पर लागू नहीं होगा, जब तक—
📝वह मिज़ोरम के धार्मिक एवं सामाजिक आचारों, मिज़ो परंपरागत कानून, भूमि स्वामित्व व हस्तांतरण से संबंधित हो और
मिज़ोरम विधानसभा उसे स्वीकृति न दे।
3️⃣ मिज़ो जनजातियों की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक व्यवस्था को संवैधानिक संरक्षण मिला।
✍️इस संशोधन से - 
यह संशोधन मिज़ोरम समझौते (1986) के प्रावधानों को संवैधानिक दर्जा देने हेतु लाया गया।

54. चौवनवां  
वर्ष - 1986 
लागू -  01/04/1986
🔥राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, राज्यपाल, लोकसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, उच्चतम न्यायालय व उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के वेतन में वृद्धि।
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ संविधान की द्वितीय अनुसूची में संशोधिन कर मुद्रास्फीति के अनुरूप वेतन संरचना की गई।
✍️इस संशोधन से - 
संवैधानिक पदों पर कार्यरत व्यक्तियों के वेतन में बढ़ोतरी हुई।

55. पचपनवां
वर्ष - 1986  
लागू -  20/02/1987
🔥अरुणाचल प्रदेश से संबंधित।
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ संविधान में अनुच्छेद 371H को शामिल किया गया जिसमें राज्यपाल विशेष अधिकार व विवेक से अरुणाचल प्रदेश में मंत्रिपरिषद की अनुमति/अनुशंसा के बिना कानून-व्यवस्था के संबंध कर्तव्य का निर्वहन करे सके।
2️⃣ अरुणाचल प्रदेश की विधानसभा में
कम से कम 30 सदस्य होंगे।
✍️इस संशोधन से - 
सीमावर्ती व जनजातीय राज्य की सुरक्षा
प्रशासनिक स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित हुई।

56. छपनवां 
वर्ष - 1987 
लागू -  20/02/1987
🔥 गोआ, दमन और दीव से संबंधित।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ गोवा को केन्द्र शासित प्रदेश से हटा कर पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया।
2️⃣ अनुच्छेद 371I जोड़ा कर दमन और दीव को गोवा से पृथक कर अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया।
3️⃣ गोवा की विधानसभा में कम से कम 30 सदस्य निर्धारित किए गए।
4️⃣ गोवा की अलग सांस्कृतिक पहचान और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर यह संशोधन किया गया।
✍️इस संशोधन से 
⚖️ गोआ नया राज्य व दमन- दीव केन्द्र शासित प्रदेश बने।
⚖️राज्य पुनर्गठन की संवैधानिक व्यवस्था से भारत के संघीय ढांचे को और अधिक स्पष्ट व सुदृढ़ किया गया।

57. सतावनवां
वर्ष 1987 
लागू -  30/05/1987
🔥नागालैंड, मेघालय, मिज़ोरम और अरुणाचल प्रदेश से संबंधित जनजातीय क्षेत्रों से जुड़ा संशोधन।
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 332 में संशोधन कर अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए विधानसभा सीटों के आरक्षण से संबंधित व्यवस्था बदली गई।
2️⃣ जनसंख्या अनुपात के अनुसार
ST आरक्षण सीटों का पुनर्समायोजन किया गया।
✍️इस संशोधन से - 
⚖️राज्य विधानसभाओं में जनजातीय प्रतिनिधित्व  के आधार पर उनकी पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित की गई।
⚖️पूर्वोत्तर राज्यों की विशेष सामाजिक संरचना का सम्मान किया गया।
⚖️लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को सुदृढ़ किया गया।

58. अठावनवाँ 
वर्ष - 1987 
लागू -  09-12-1987
🔥 भारत के संविधान के हिंदी भाषा की देवनागरी लिपि में अनुवाद का प्रामाणिकरण। 
👉मुख्य बिंदु - 
संविधान के अनुच्छेद 394A में संशोधन कर यह स्पष्ट किया गया कि संविधान के हिंदी अनुवाद को भी आधिकारिक मान्यता प्राप्त होगी।
✍️इस संशोधन से - 
⚖️राष्ट्र भाषा हिंदी का सम्मान और स्पष्ट वैधानिक दर्जा मिला।
⚖️प्रशासन व न्यायिक उपयोग में सुविधा
हिंदी भाषी नागरिकों, प्रशासन और विधि छात्रों कोसंविधान समझने में सुविधा मिली।

59. उनसठवां 
वर्ष - 1987  
लागू - 30/08/1988
🔥पंजाब राज्य से संबंधित संशोधन
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ पंजाब में उग्रवाद और आंतरिक अशांति की स्थिति को ध्यान में रख कर राष्ट्रीय आपातकाल से जुड़े अनुच्छेद 352 में अस्थायी संशोधन करते हुए पंजाब में आंतरिक अशांति पर आपातकाल की अनुमति दी गई।
2️⃣ राष्ट्रीय सुरक्षा और एकता का उद्देश्य
राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और
राष्ट्र की अखंडता की रक्षा के लिए मौलिक अधिकारों को आपातकाल के दौरान
अनुच्छेद 19 (स्वतंत्रता के अधिकार) को
निलंबित किया जा सकता है।
✍️इस संशोधन से - 
सीमित क्षेत्र व सीमित अवधि के लिए यह व्यवस्था केवल पंजाब राज्य तक सीमित था जो बाद 64वें संविधान संशोधन 1990 द्वारा इसे समाप्त कर दिया गया।

60. साठवां 
वर्ष - 1988  
लागू - 20/12/1988
🔥 पेशेवर कर (Professional Tax) से संबंधित संशोधन। अनुच्छेद 276 में संशोधन।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले पेशेवर कर की अधिकतम सीमा ₹250 प्रति वर्ष से बढ़ाकर ₹2,500 प्रति वर्ष कर दी गई।
2️⃣ संविधान की सातवीं अनुसूची से सामंजस्य कर लगाने की शक्ति को
संघीय ढांचे के अनुरूप स्पष्ट किया गया।
✍️ इस संशोधन से - 
राज्यों के वित्तीय ढांचे में सुधार हुआ।

61. इकसठवां 
वर्ष - 1989 
लागू - 28/03/1989
🔥 मतदान हेतु व्यस्कता की आयु 21 से घटा कर 18 वर्ष की गई।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ मतदान हेतु मतदाता की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष करने हेतु अनुच्छेद 326 में संशोधन किया गया।
✍️ इस संशोधन से - 
मतदाता संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई,
जिससे लोकतंत्र और अधिक व्यापक हुआ।

   PM विश्वनाथ प्रताप प्रधानमंत्री 
(2 दिसम्बर 1989 से 10 नवंबर 1990) के कार्यकाल में एक 62वाँ, 63, 64 67, 69 पांच संविधान संशोधन हुए।
🛞 विशेष - जिस संशोधन को संसद पहले पारित कर देती है और राष्ट्रपति की मंज़ूरी पहले मिल जाती है — उसे छोटा नंबर मिलता है, भले ही वह लागू बाद में हो। 67 वाँ और 69 वाँ वी. पी. सिंह के समय हुए परन्तु वे विधेयक संसद में पहले पेश/पारित हो गए थे, लेकिन उनका प्रभाव या अधिसूचना बाद में हुई  जबकि कुछ दूसरे संशोधन बीच में जल्दी निपट गए।
62. बासठवां 
वर्ष - 1989  
लागू- 20/12/1989
🔥 अनुसूचित जाति व जनजाति आरक्षण की दस वर्ष अवधि बढ़ाई गई।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ आरक्षण की समय-सीमा से संबंधित
अनुच्छेद 334 में परिवर्तन किया गया।
राजनीतिक प्रतिनिधित्व की निरंतरता
SC/ST समुदायों के संसदीय व विधायी प्रतिनिधित्व को बनाए रखने हेतु यह संशोधन किया गया।
2️⃣ समानता और सामाजिक न्याय की
संवैधानिक प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाया गया।
3️⃣ अस्थायी प्रावधान की अवधि विस्तार
यह स्पष्ट किया गया कि आरक्षण व्यवस्था स्थायी नहीं, बल्कि समय-समय पर समीक्षा योग्य है।
✍️ इस संशोधन से - 
पिछले संशोधनों की परंपरा का अनुसरण
करते हुए इसी प्रकार अवधि बढ़ाने हेतु कई संशोधन किए जा चुके थे।

63. तिरसठवां
वर्ष - 1989 
लागू - 06/01/1990
🔥 पंजाब राज्य असाधारण कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखकर किया गया संशोधन।
✍️ मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 356 में संशोधन राष्ट्रपति शासन में विशेष प्रावधान जोड़ा गया। जिससे वहां राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाने की अनुमति दी गई।
2️⃣ सामान्यतः राष्ट्रपति शासन 1 वर्ष से अधिक नहीं होता, लेकिन इस संशोधन द्वारा पंजाब में विशेष और अस्थायी व्यवस्था के अंतर्गत इसे 3 वर्ष तक बढ़ाने की अनुमति दी गई।
✍️ इस संशोधन से- 
⚖️राष्ट्रीय सुरक्षा और अखंडता का उद्देश्य
उग्रवाद और गंभीर आंतरिक संकट से निपटने हेतु केंद्र सरकार को अतिरिक्त संवैधानिक शक्ति दी गई।
⚖️संघीय ढांचे में असाधारण अपवाद
यह संशोधन सामान्य संघीय सिद्धांत से हटकर विशेष परिस्थिति में किया गया अपवाद था।

64. चौसठवाँ 
वर्ष - 1990 
लागू - 16/04/1990
🔥 संवैधानिक व्यवस्था (Article 356) के अनुसार राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाने से संबंधित ।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 356 में बदलाव करके स्पष्ट किया गया कि कब और कैसे (संवैधानिक मशीनरी/सामान्य शासन प्रणाली) काम नहीं कर पा रही हो तो सख़्त शर्तों और प्रक्रियाओं के तहत राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।
अस्थायी प्रावधान:
2️⃣ यह संशोधन 1990 में लागू हुआ  जिसकी वैधता/प्रभाव विशिष्ट परिस्थितियों तक सीमित रहा।
✍️ इस संशोधन से 
पंजाब में राष्ट्रपति शासन की अवधि बधाई गई।

  PM चंद्र शेखर के कार्यकाल में
10 नवम्बर 1990 – 21 जून 1991
 65वाँ 66वाँ और 68वाँ तीन संशोधन
65. पैसठवां 
वर्ष - 1990   
लागू - 12/03/1992
🔥 (SC) (ST) वर्गों हेतु संवैधानिक दर्जे वाला राष्ट्रीय आयोग स्थापित करना।
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 338 में SC/ST के लिए केवल विशेष अधिकारी के प्रावधान को बदल कर उसकी जगह संवैधानिक दर्जा एवं अधिकार प्राप्त राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग की स्थापना की गई।
2️⃣ इस आयोग में - 
अध्यक्ष 01, उपाध्यक्ष 01,  राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त अन्य सदस्य
3️⃣ मुख्य कार्य - 
🚀SC/ST के लिए बने संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों की निगरानी
🚀उनके अधिकारों के उल्लंघन की शिकायतों की जांच
🚀केंद्र व राज्य सरकारों को सिफारिशें देना
🚀राष्ट्रपति को वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करना
3️⃣ राष्ट्रपति आयोग की रिपोर्ट को संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत कराते हैं।

66. छियासाठवां 
वर्ष - 1990 
लागू - 07/06/1990
🔥 भूमि सुधार से संबंधित कुछ राज्य कानूनों को न्यायिक समीक्षा से सुरक्षित करना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ नौवीं अनुसूची में संशोधन करते हुए इस संशोधन के द्वारा कुल 55 राज्य अधिनियमों को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया गया।
2️⃣ भूमि सुधार कानूनों का संरक्षण
ये सभी कानून - 
01. ज़मींदारी उन्मूलन
02. भूमि सीमा
03. अनुच्छेद 31-B से संरक्षण प्रदान करते हुए नौवीं अनुसूची में शामिल होने के कारण ये कानून मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर अदालत में चुनौती योग्य नहीं रहे।
3️⃣ प्रभावित राज्य आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, केरल आदि।
लागू होने का वर्ष
✍️ इस संशोधन से 
➡️ मज़बूती भूमि सुधार कानून
➡️ अदालती हस्तक्षेप से बचाव
➡️ और सामाजिक-आर्थिक न्याय 

67. सड़सठवां 
वर्ष - 1990 
लागू - 04/10/1990
🔥लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में (SC) व (ST) हेतु आरक्षण की अवधि बढ़ाना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ संविधान के अनुच्छेद 334 में SC/ST हेतु आरक्षित सीटों की समय-सीमा बढ़ा कर 1990 से 2000 तक किया गया।

68. अड़सठवां 
वर्ष - 1991
लागू - 12/03/1991
🔥पंजाब राज्य में राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ यह संशोधन राष्ट्रपति शासन की अधिकतम अवधि में सनसे जुड़ा था।
पंजाब के लिए विशेष प्रावधान
सामान्यतः राष्ट्रपति शासन 3 वर्ष से अधिक नहीं लगाया जा सकता।
लेकिन पंजाब में विशेष परिस्थितियों (आंतरिक अशांति और कानून-व्यवस्था) के कारण इसे गत दो वर्ष में एक वर्ष की अतिरिक्त वृद्धि करते हुए 3 वर्ष से आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई।
2️⃣ संवैधानिक शासन को बनाए रखने हेतु अस्थायी और पंजाब राज्य - विशेष संशोधन किया गया।
     प्रधानमंत्री PV नरसिंहराव 
   21 जून 1991 – 16 मई 1996
69 से 78वाँ कुल 10 संविधान संशोधन

69. उन्हतरवां
वर्ष - 1991
लागू - 01/02/1992
🔥 दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) का विशेष संवैधानिक दर्जा दे कर निर्वाचित सरकार की व्यवस्था करना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB जोड़ कर दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (National Capital Territory – NCT) घोषित किया गया।
2️⃣ दिल्ली में विधान सभा की स्थापना
दिल्ली के लिए निर्वाचित विधान सभा का प्रावधान किया गया। विधान सभा को राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषयों पर (कुछ अपवादों के साथ) कानून बनाने का अधिकार मिला।
3️⃣ मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद की व्यवस्था के साथ ही प्रशासक के रूप में उप-राज्यपाल (Lieutenant Governor (LG) का पद बना रहा।
4️⃣ कुछ विषयों पर अंतिम अधिकार उप-राज्यपाल/केंद्र सरकार के पास सुरक्षित रहेगा जिसमें पुलिस, भूमि लोक व्यवस्था के विषयों पर दिल्ली सरकार को अधिकार नहीं दिया गया।
5️⃣ अनुच्छेद 239AB जोड़ा गया जिससे यदि संवैधानिक व्यवस्था विफल हो जाए, तो राष्ट्रपति शासन जैसी व्यवस्था लागू की जा सकती है।
✍️ इस संशोधन से - 
➡️ दिल्ली राज्य परन्तु को पूर्ण राज्य नहीं
➡️ दिल्ली विशेष दर्जा प्राप्त केंद्र शासित प्रदेश भी
➡️ पुलिस, भूमि एवं व्यवस्था केंद्र के नियंत्रण में व शिक्षा, चिकित्सा, स्थानीय स्व शासन राज्य के नियंत्रण में।

PM - स्वर्गीय श्री P.V. नरसिम्हाराव

70. सत्तरवां 
वर्ष - 1992
लागू - 21/12-/1991
       - 01/06/1991
🔥 राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन मंडल में दिल्ली (NCT) और पुदुचेरी की विधान सभाओं को शामिल करना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ राष्ट्रपति के निर्वाचन से के अनुच्छेद 54 में बदलाव कर राष्ट्रपति के चुनाव में दिल्ली और पुदुचेरी की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य भी भाग लेने हेतु अधिकृत किया गया।
2️⃣ अनुच्छेद 239AA और 239A में बदलाव कर  दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) और पुदुचेरी में निर्वाचित विधानसभाओं को उन्हें राष्ट्रीय स्तर की चुनाव प्रक्रिया से जोड़ा गया।

71. इकहत्तरवां 
वर्ष - 1992
लागू - 31/08/1992 
🔥 भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में नई भाषाओं को शामिल करना।
👉 मुख्य बिंदु - 
आठवीं अनुसूची में नई भाषाओं को जोड़ा गया - 
🚀कोंकणी
🚀मणिपुरी/मैतेई 
🚀नेपाली

72. बहत्तरवां
वर्ष - 1992  
लागू - 05/12/1992
🔥त्रिपुरा में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाना।
👉 मुख्य बिंदु - 
अनुच्छेद 170 में संशोधन कर त्रिपुरा  विधानसभा की सदस्य संख्या बढ़ाई गई। 
✍️इस संशोधन से - 
त्रिपुरा विधानसभा में सदस्य संख्या 30 से बढ़कर 60

73. तेहत्तरवाँ 
वर्ष - 1992  
लागू -  24/04/1993
मुख्य उद्देश्य
🔥ग्रामीण भारत में पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा देते हुए
स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣  संविधान में नया भाग IX (अनुच्छेद 243 से 243-O) में पंचायत शीर्षक जोड़ा गया। जिसमें ग्राम पंचायत l, पंचायत समिति क्षेत्र पंचायत (खंड स्तर) जिला परिषद (जिला स्तर) (20 लाख से कम आबादी वाले राज्यों में दो-स्तरीय व्यवस्था संभव) की गई।
2️⃣ ग्राम सभा को संवैधानिक मान्यता
ग्राम सभा को लोकतंत्र की मूल इकाई माना गया। पंचायतों का नियमित चुनाव
प्रत्येक 5 वर्ष में चुनाव अनिवार्य समय से पहले भंग होने पर 6 महीने में पुनः चुनाव।
3️⃣ पंचायत चुनाव कराने के लिए
राज्य निर्वाचन आयोग का प्रावधान।
4️⃣ पंचायतों के वित्तीय संसाधनों की समीक्षा हेतु राज्य वित्त आयोग की व्यवस्था।
5️⃣ अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षण, महिलाओं के लिए कम से कम 1/3 सीटें आरक्षित जो घूर्णन(Rotation) के आधार पर ग्यारहवीं अनुसूची (11th Schedule) जोड़ी गई।
6️⃣ 29 विषयों की सूची (जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, सड़क आदि) को सौंपी गई।
7️⃣ पंचायत चुनावों में अदालतों के हस्तक्षेप पर प्रतिबंध।
✍️इस संशोधन से - 
(24 अप्रैल के दिन को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस माना जाता है)
➡️ सत्ता को नीचे तक पहुँचाने
➡️ ग्रामीण लोकतंत्र को मजबूत करने
➡️ और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए किया गया।

74. चौहत्तरवां
वर्ष - 1992
लागू -  01/06-1993
🔥शहरी क्षेत्रों में नगरपालिकाओं को संवैधानिक दर्जा देते हुए स्थानीय स्वशासन को सशक्त बनाना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ संविधान में नया भाग IX-A (अनुच्छेद 243P से 243ZG) नगरपालिकाएँ शीर्षक से जोड़ी गईं - 
तीन प्रकार की नगरपालिकाएँ
🚀नगर पंचायत/पालिका - संक्रमणशील क्षेत्र
🚀नगर परिषद (Municipal Council) – छोटे/मध्यम शहर 
🚀नगर निगम (Municipal Corporation) – बड़े शहर
इन नगर सभाओं के 
🎤नियमित चुनाव हर 5 वर्ष में चुनाव अनिवार्य
🎤समय से पहले भंग होने पर 6 महीने में पुनः चुनाव
2️⃣ नगर निकाय के चुनाव हेतु  राज्य निर्वाचन आयोग अधिकृत।
3️⃣ वित्तीय व्यवस्थाओं हेतु  राज्य वित्त आयोग अधिकृत।
4️⃣ (SC) और (ST) के लिए आरक्षण - 
📝 महिलाओं के लिए कम से कम 1/3 सीटें आरक्षित जो घूर्णन प्रणाली पर  आधारित होगा।
📝 नगरपालिकाओं को सौंपे जाने वाले
18 विषयों की सूची (शहरी नियोजन, जल आपूर्ति, सफाई, सड़क, सार्वजनिक स्वास्थ्य आदि) हेतु बारहवीं अनुसूची जोड़ी गई।
5️⃣ नगरपालिका चुनावों में अदालतों के हस्तक्षेप पर प्रतिबंध।
✍️इस संशोधन से - 
➡️ शहरी प्रशासन को संवैधानिक मजबूती
➡️ लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण
➡️ और नगर शासन में जनभागीदारी सुनिश्चित करता है।

75. पिचहतरवां 
वर्ष - 1993
लागू - 15/05/1994
🔥किराया नियंत्रण से जुड़े मामलों के
त्वरित निपटारे हेतु विशेष न्यायाधिकरणों की व्यवस्था।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 323-B में संशोधन से अन्य विषयों से संबंधित न्यायाधिकरणों की स्थापना।
2️⃣ संशोधन द्वारा किराया मामलों को भी इसमें शामिल किया गया।
3️⃣ किराया न्यायाधिकरण (Rent Tribunal) के गठन हेतु राज्यों को अधिकार दिया गया कि वे किराया विवादों के निपटारे के लिए न्यायाधिकरण स्थापित करें।
✍️इस संशोधन से - 
⚖️मकान मालिक–किरायेदार विवादों का
शीघ्र समाधान।
⚖️न्यायालयों पर भार कम हुआ।
⚖️सिविल अदालतों में लंबित किराया मामलों का बोझ घटाने का प्रयास।
⚖️राज्यों को यह शक्ति दी गई कि वे
किराया न्यायाधिकरणों की संरचना, अधिकार और प्रक्रिया तय कर सकें।

76. छियतरवां 
वर्ष - 1994
लागू - 31/08/1994
🔥तमिलनाडु (OBC), SC और ST के लिए 69% आरक्षण को वैधानिक संरक्षण देना।
👉 मुख्य बिंदु - 
तमिलनाडु का 69% आरक्षण कानून
संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया गया।
मंडल निर्णय से संरक्षण
सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी केस (1992) में आरक्षण की अधिकतम सीमा 50% तय की गई थी। यह संशोधन तमिलनाडु के 69% आरक्षण को न्यायिक चुनौती से बचाने के लिए किया गया।
नौवीं अनुसूची में शामिल होने से अनुच्छेद 31-B के तहत सुरक्षा यह कानून मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर चुनौती योग्य नहीं रहा।
✍️इस संशोधन से - 
तमिलनाडु के सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों को 69% अधिक अवसर मिले।

77. सत्ततरहवां 
वर्ष - 1995 
लागू - 17/06/1995
🔥सरकारी सेवाओं में (SC, ST) को
पदोन्नति में आरक्षण देना।
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ संविधान में नया अनुच्छेद 16(4A) शामिल कर राज्य को अधिकार मिला जिससे वह SC/ST को पदोन्नति में आरक्षण दे सके।
2️⃣ इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ (1992) में पदोन्नति में आरक्षण को असंवैधानिक माना गया था।
3️⃣ 77वें संशोधन ने इस निर्णय को SC/ST के संदर्भ में निष्प्रभावी कर दिया गया।
राज्यों के लिए पदोन्नति में आरक्षण 
4️⃣ अनिवार्य नहीं किया गया जिससे यह राज्यों का विशेषाधिकार रहा।
✍️इस संशोधन से - 
सरकारी सेवाओं के उच्च पदों पर SC/ST का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हुआ।

78. अट्ठतरवाँ 
वर्ष - 1995  
लागू-  30/08/1995
🔥विभिन्न राज्य भूमि सुधार कानूनों को
न्यायिक समीक्षा से संरक्षण देना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ इस संशोधन के द्वारा कुल 27 राज्य अधिनियमों को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया गया।
2️⃣ ये कानून मुख्य रूप से —
🚀ज़मींदारी उन्मूलन
🚀भूमि सीमा निर्धारण
🚀भूमि सुधार एवं वितरण
3️⃣ अनुच्छेद 31-B के तहत सुरक्षा - नौवीं अनुसूची में शामिल होने के कारण ये कानून मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के आधार पर अदालत में चुनौती योग्य नहीं रहे।
केंद्र और राज्यों के सुधार कानून से भूमि सुधार कानून शामिल जिससे गरीब किसानों और भूमिहीनों के हितों की रक्षा करना।
👉इस संविधान संशोधन से - 
➡️ भूमि सुधार कानूनों को
➡️ संवैधानिक संरक्षण देकर
➡️ सामाजिक और आर्थिक न्याय को मजबूती देता है।
      PM अटल बिहारी वाजपेयी
        मार्च 1998 – मई 2004
   (स्थिर कार्यकाल: 1999–2004)
   79वाँ संविधान संशोधन से 92वाँ 
             कुल 14 संशोधन

79. उन्नासीवां 
वर्ष - 1999  
लागू - 25/01/2000
🔥लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में (SC)  (ST) के लिए आरक्षण की अवधि बढ़ाना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 334 में निर्धारित SC/ST के लिए आरक्षित सीटों की समय-सीमा को बढ़ाया गया।
2️⃣ पहले आरक्षण की अवधि 2000 तक थी, को 10 वर्ष और बढ़ाकर 2010 तक कर दिया गया।
3️⃣ एंग्लो-इंडियन समुदाय के नामांकन की अवधि भी बढ़ाई गई।
✍️इस संशोधन से - 
SC/ST समुदायों के विधायी प्रतिनिधित्व को बनाए रखने हेतु आरक्षण की वैधानिक अवधि बढ़ी।

80. अस्सीवां 
वर्ष - 2000
लागू  - 09/062000
🔥(SC) और(ST) के लिए पदोन्नति में आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों को स्पष्ट करने हेतु राज्यों को अधिक अधिकार देना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ 77वें संशोधन के बाद बने अनुच्छेद 16(4A) को और स्पष्ट किया गया इससे यह सुनिश्चित किया गया कि राज्य सरकारें SC/ST को पदोन्नति में आरक्षण दे सकती हैं जिसे लागू करना अनिवार्य के स्थान पर वैकल्पिक।
2️⃣पदोन्नति में आरक्षण के मामले में अदालती बाधाओं को कम करने का प्रयास।

81.  इक्यासिवां 
वर्ष - 2000 
लागू - 09/06/2000
🔥सरकारी सेवाओं में (SC) (ST) हेतु पदोन्नति में आरक्षण को लागू करने को संवैधानिक रूप देना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 16(4A) का पुनर्विन्यास करते हुए 77वें व 80वें संशोधन में जोड़ा गया प्रावधान और अधिक स्पष्ट किया गया।
2️⃣ अब राज्यों को अधिकार है कि वे SC/ST वर्ग हेतु पदोन्नति में आरक्षण दे सकें।
2️⃣ यह संशोधन अदालतों के इंद्रा साहनी फैसले (1992) के प्रभाव को सीमित करता है।
3️⃣ इसके तहत SC/ST को सरकारी सेवाओं में समान अवसरों के साथ पदोन्नति में आरक्षण प्राप्त होता है।
4️⃣ राज्य यह तय कर सकते हैं कि किन पदों पर और कितनी दर से आरक्षण लागू होगा।यह अनिवार्य नहीं, पर अधिकार संवैधानिक रूप से सुरक्षित है।
✍️इस संशोधन से - 
➡️ SC/ST वर्ग के लिए पदोन्नति में आरक्षण को ओर अधिक स्पष्ट किया गया।
➡️ राज्यों को अधिक सुविधा व अधिकार।
➡️ सामाजिक न्याय की मजबूतो।

82. बियासिवां 
वर्ष - 2000 
लागू - 08/09/2000
1️⃣ सरकारी सेवाओं में SC/ST वर्ग के लिए पदोन्नति में आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों को और अधिक मजबूत करना।👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ 77वें, 80वें और 81वें संशोधन के बाद अनुच्छेद 16(4A) का विस्तार कर स्पष्ट किया गया।
2️⃣ राज्यों को अधिकार दिया गया कि वे SC/ST के लिए पदोन्नति में आरक्षण लागू कर सकें। राज्यों के लिए विकल्प, बाध्यता नहीं, यह संशोधन राज्यों को अधिक स्वतंत्रता देता है। आरक्षण लागू करना अनिवार्य नहीं, लेकिन विकल्प सुरक्षित है।
3️⃣ पदोन्नति में आरक्षण के मामलों में अदालती बाधाओं और विवादों को कम करने का प्रयास।
✍️ इस संशोधन से - 
➡️ SC/ST वर्ग के लिए पदोन्नति में आरक्षण के अधिकार को और स्पष्ट किया गया।

83. तिरासीवां 
वर्ष - 2000 
लागू - 08/09/2000
🔥 लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में (SC) (ST) हेतु आरक्षण की अवधि बढ़ाना।
👉 मुख्य बिंदु - 
अनुच्छेद 334 में संशोधन कर SC/ST के लिए आरक्षण की समय-सीमा को बढ़ा कर 2010 के स्थान पर 2020 तक किया गया।

84 चौरासीवां  
वर्ष - 2001  
लागू - 21/02/2002
🔥राज्यों में सरकारी सेवाओं में SC/ST वर्ग के लिए पदोन्नति में आरक्षण की वैधता को सुनिश्चित करना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 16(4A) में संशोधन कर पदोन्नति में आरक्षण के लिए 77वें, 80वें, 81वें और 82वें संशोधनों के प्रावधानों को और अधिक स्पष्ट किया गया।
2️⃣ राज्यों को अधिक स्वतंत्रता, राज्य यह तय कर सकते हैं कि किन पदों पर और कितनी दर से आरक्षण लागू होगा।
✍️इस संशोधन से - 
➡️ SC/ST वर्ग के लिए पदोन्नति में आरक्षण को और स्पष्ट और मजबूत बनाया गया।

85. पिचयासिवां
वर्ष - 2001
लागू - 17/06/1995
🔥SC/ST वर्ग के लिए पदोन्नति में आरक्षण को और मजबूत करना और पदोन्नति से जुड़े विवादों में न्यायिक हस्तक्षेप को सीमित करना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 16(4A) का पुनरावलोकन - 77वें, 80वें, 81वें, 82वें और 84वें संशोधन में बने प्रावधानों को और अधिक स्पष्ट किया गया।
2️⃣ राज्यों के लिए विकल्प - राज्य तय कर सकते हैं कि किन पदों पर और कितनी दर से आरक्षण लागू होगा। इसे लागू करना अनिवार्य नहीं, पर अधिकार सुरक्षित।
3️⃣ पदोन्नति में आरक्षण के मामलों में अदालती विवादों और चुनौती को कम किया गया।

86. छियासिवां 
वर्ष - 2002 
लागू - 01/04/2010
🔥प्राथमिक शिक्षा को मौलिक अधिकार कर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना।
👉 मुख्य बिंदु - 
अनुच्छेद 21-A जोड़ कर 6 से 14 वर्ष की आयु तक के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया गया।
अनुच्छेद 45 में संशोधन कर प्राथमिक शिक्षा पर राज्य का कर्तव्य स्पष्ट रूप से अंकित किया गया।
अनुच्छेद 51-A (k) में संशोधन कर माता-पिता और अभिभावकों पर बच्चों को शिक्षा दिलाने का कर्तव्य तय किया गया।
✍️इस संशोधन से - 
मूल अधिकार के रूप में शिक्षा - 6–14 वर्ष की आयु तक का शिक्षा का अधिकार राज्य द्वारा सुनिश्चित किया जाएगा।

87. सित्यासिवान
वर्ष - 2003
लागू - 22/06/2003
🔥प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के कार्यालय की कार्यकाल सीमा और पारिश्रमिक (Salary) से संबंधित प्रावधान में संशोधन
👉 मुख्य बिंदु - 
अनुच्छेद 75 में संशोधन कर प्रधानमंत्री और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के पद और वेतन संबंधी प्रावधान को संशोधित किया गया।
इसमें स्पष्ट किया गया कि पद छोड़ने पर उनका वेतन और भत्ते संवैधानिक रूप से सुरक्षित होंगे।
कार्यकाल और संवैधानिक सुरक्षा के संबंध में स्पष्ट किया गया।

88.  अट्ठासीवां 
वर्ष - 2003
लागू  - dete नहीं है
🔥राज्यपालों और केंद्र/राज्य सेवाओं में पदोन्नति और वित्तीय प्रावधानों से संबंधित संवैधानिक प्रावधानो में संशोधन।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 164 में संशोधन कर राज्य मंत्रिपरिषद के वेतन और भत्तों को संशोधित किया गया।
2️⃣ यह सुनिश्चित किया गया कि राज्यपाल द्वारा मान्यता प्राप्त वेतन संरचना लागू रहे।
अनुच्छेद 192 और 276 में बदलाव कर
विधायिका के सदस्यों और उनके वेतन/भत्ते संबंधी प्रावधानों को अद्यतन किया गया।
3️⃣ पदोन्नति और वित्तीय सुरक्षा - राज्यों और केंद्र में सेवाओं में पदोन्नति से जुड़े वेतन और भत्तों की संवैधानिक सुरक्षा सुनिश्चित की गई।

89.  नवासीवां 
वर्ष - 2003 
लागू - 19/02/2004
🔥 केन्द्रीय वित्त आयोग के सदस्यों के वेतन और भत्तों को संवैधानिक रूप से सुनिश्चित करना।
👉 मुख्य बिंदु - 
अनुच्छेद 279 में संशोधन कर वित्त आयोग के सदस्यों के वेतन, भत्ते और सेवा नियम को न्यायसंगत और स्थिर कर स्पष्ट किया गया।
केन्द्रीय वित्त आयोग की स्वतंत्रता और पारदर्शिता सुनिश्चित की गई। 

90.  नब्बवां 
वर्ष - 2003 
लागू - 28/09/2003
🔥संघ और राज्यों के वित्तीय अधिकारों और कराधान प्रावधानों को स्पष्ट करना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 268 में संशोधन कर केंद्रीय और राज्य कराधान के बीच अंतर और वितरण को सुनिश्चित किया गया।
2️⃣ विशेषकर राजस्व संग्रह और व्यय अधिकार को स्पष्ट किया गया।
3️⃣ अनुच्छेद 269 और 269A में बदलाव कर संघ और राज्य के बीच विशेष कराधान अधिकार और लेवी (Levy) को संवैधानिक रूप से स्पष्ट किया गया।
4️⃣ कराधान और वित्तीय स्वायत्तता हेतु राज्यों का कर संग्रह और वित्तीय संसाधनों पर नियंत्रण सुनिश्चित किया गया।
5️⃣ केंद्रीय सरकार और राज्यों के बीच वित्तीय विवादों को कम करने का प्रयास।

91. इक्यानववां 
वर्ष - 2003 
लागू - 01/01/2004
🔥लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सांसदों और विधायकों की संख्या, विशेषकर वित्तीय प्रावधानों व प्रतिनिधित्व में सुधार करना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ लोकसभा में सदस्यों की अधिकतम संख्या को 545 तक सीमित किया गया।
2️⃣ राज्यों में विधानसभाओं की सदस्यों की संख्या को निश्चित किया गया।
3️⃣ विशेष कर जनसंख्या अनुपात व वैधानिक सीमा को ध्यान में रखा गया।
4️⃣ संसद और राज्यों के सदस्यों के वेतन और भत्तों के संबंध में स्पष्ट प्रावधान किए गए।

92. बानववां 
वर्ष - 2003
लागू  - 07/01/2004
🔥संघ और राज्य वित्त आयोग के गठन और कार्यकाल से संबंधित प्रावधानों में संशोधन।
👉 मुख्य बिंदु - 
अनुच्छेद 280 में संशोधन कर केंद्र और राज्यों के वित्त आयोग के गठन, कार्यकाल और सिफारिशों को स्पष्ट किया गया।
आयोग के सदस्यों के वेतन और भत्तों का संवैधानिक आधार मजबूत किया गया।
वित्त आयोग का कार्यकाल 5 वर्ष या राष्ट्रपति द्वारा तय अवधि तक रहेगा।
आयोग की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं, पर उनकी प्रभावी कार्यवाही और पारदर्शिता सुनिश्चित की गई।

        प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 
   (22 मई 2004 – 26 मई 2014)
     93वाँ से 99वाँ संविधान संशोधन 
               कुल 07 संशोधन
93. तिरानववां 
वर्ष - 2005  
लागू  - 20/01/2006
🔥शिक्षा अधिकार से संबंधित प्रावधान।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 45 में संशोधन कर 6–14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को कानूनी रूप से मजबूत किया।
2️⃣ अनुच्छेद 15(5) जोड़ा कर निजी स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में सामाजिक और शैक्षिक पिछड़े वर्गों (SC/ST/OBC) के लिए आरक्षण की अनुमति।
3️⃣ 86वें संशोधन में जोड़ा गया मौलिक अधिकार अनुच्छेद 21-A प्राथमिक शिक्षा को और विस्तृत किया गया।
Right to Education 

94.  चौरानववां 
वर्ष - 2006 
लागू  - 12/06/2006
Right to Education) को और विस्तृत रूप से लागू करना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ 6–14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा को अधिक स्पष्ट करने हेतु अनुच्छेद 21-A का विस्तार किया गया।
2️⃣ केंद्र और राज्य दोनों को शिक्षा के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने का दायित्व।
3️⃣ माता-पिता और अभिभावकों पर बच्चों को शिक्षा दिलाने का संपूर्ण दायित्व लागू।
4️⃣ निजी और सरकारी स्कूलों में सभी बच्चों के लिए समान अवसर सुनिश्चित।

95.  पिचानववां 
वर्ष - 2009 
लागू  - 25/01/2010
🔥सरकारी सेवाओं में (SC) (ST) के लिए पदोन्नति में आरक्षण को और मजबूत करना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 16(4A) का पुनर्संशोधन कर राज्यों को अधिकार दिया गया कि वे SC/ST के लिए पदोन्नति में आरक्षण लागू कर सकें।
2️⃣ इंद्रा साहनी (1992) और संबंधित फैसलों के प्रभाव को सीमित कर, पदोन्नति में आरक्षण की संवैधानिक वैधता सुनिश्चित।

96.  छियानवेवां 
वर्ष 2011
लागू - 23/9/2011
🔥 राज्यों और केन्द्र के वित्तीय अधिकारों और संसदीय प्रतिनिधित्व को सुधारना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 81, 82 और 170 में संशोधन
2️⃣ लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सदस्यों की संख्या और जनसंख्या अनुपात को संतुलित किया गया।
3️⃣ केंद्रीय और राज्य कराधान और संसाधनों के वितरण के नियम को स्पष्ट किया।
4️⃣ राज्यों और केंद्र के बीच वित्तीय और प्रतिनिधित्व संबंधी विवाद कम करने का प्रयास।

97.  सितानवेवां 
वर्ष - 2011
लागू - 15/02/2012
🔥स्थानीय स्वशासन  पंचायत/नगरीय निकायों में महिलाओं के आरक्षण को संवैधानिक रूप दे कर लागू करना।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 243 और 243T में संशोधन
पंचायतों और नगर पालिकाओं में स्त्रियों हेतु आरक्षण को संविधान में जोड़ा गया जो
कुल सीटों का एक-तिहाई (33%) होगा।2️⃣ इसमें SC/ST वर्ग की महिलाएं भी शामिल हैं।

98.  इठानवेवाँ 
वर्ष - 2012 
लागू - 01/10/2013
स्थानीय निकाय  पंचायत/नगरीय निकायों में (SC) (ST) वर्ग के आरक्षण को संवैधानिक रूप देना।
👉  मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 243D और 243T में संशोधन करते हुए  पंचायतों और नगर पालिकाओं में SC/ST वर्ग आरक्षण को प्रतिनिधि संख्या में उनकी जनसंख्या के अनुपात में घूर्णन प्रक्रिया अनुसार लागू।

                PM नरेंद्र मोदी
  कार्यकाल 26 मई 2014 से लगातार
      अब तक 09 संविधान संशोधन 
           99 से 106 तक लागू 
       107 से 131 तक प्रक्रियाधीन 

*99. निनानवेवां 
वर्ष : 2014
लागू - 2014
विशेष - PIL के निस्तारण स्वरूप 2015 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निरस्त)
🔥 सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) ।
👉मुख्य बिंदु - 
1️⃣ कॉलेजियम प्रणाली को हटाने का प्रयास न्यायिक नियुक्तियों में नई व्यवस्था लाने का प्रयास।
2️⃣ NJAC की संरचना (6 सदस्य)
01. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)
02. सुप्रीम कोर्ट के 2 वरिष्ठतम न्यायाधीश
03. केंद्रीय कानून मंत्री
04. दो प्रतिष्ठित व्यक्ति (Eminent Persons)
न्यायाधीश का चयन
🚀प्रधानमंत्री, 
🚀CJI
🚀लोकसभा में विपक्ष के नेता द्वारा
❌ निरस्तीकरण (2015) सुप्रीम कोर्ट ने
NJAC को असंवैधानिक घोषित कर दिया।
🛞 कारण:
न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर प्रभाव
✔️ परिणाम
कॉलेजियम प्रणाली पुनः बहाल
लेकिन:
❗ संशोधन संख्या (99) रद्द नहीं हुई,
केवल उसका प्रभाव समाप्त हुआ।

100. सौवां
वर्ष - 2015    
लागू - 31/07/2015
🔥पंचतराज और नगर निकाय में महिलाओं के लिए आरक्षण की अवधि को और आगे बढ़ाना।
👉 मुख्य बिंदु- 
अनुच्छेद 243D(6) और 243T(3) में संशोधन करते हुए पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए 1/3 आरक्षण की संवैधानिक व्यवस्था की अवधि को आगे बढ़ाते हुए 2024 तक किया गया।

101 एकसौ एकवां 
वर्ष - 2016 
लागू -16/9/2016
🔥भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) लागू।
👉 मुख्य बिंदु - 
संविधान में अनुच्छेद 246A जोड़ा कर केंद्र और राज्यों में एक समान कराधान व्यवस्था लागू करने हेतु वस्तु एवं सेवा कर GST लगाने का अधिकार दिया गया।
अनुच्छेद 269A जोड़ कर राज्यों के बीच और केंद्र के लिए विशेष प्रकार के कर (Inter-State Supply Tax) का प्रावधान।
केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों से मिलकर कर नीति और दरें तय करने हेतु अनुच्छेद 279A जोड़ कर  GST परिषद का गठन किया गया। ।
✍️ इस संशोधन से - 
भारत में 1 जुलाई 2017 से GST लागू हुआ।

102. एकसौ दूसरा 
वर्ष - 2018
लागू -15/8/2018
🔥भारत में (SC) (ST) के अधिकार और उनके वर्गीकरण को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता।
👉  मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 342 में संशोधन कर (SC)(ST) की सूची व पहचान को स्पष्ट किया गया।
2️⃣ राष्ट्रीय स्तर पर वर्गीकरण एवं सूचीबद्ध करने का अधिकार और प्रक्रिया निर्धारित की गई।
3️⃣ अनुच्छेद 342A जोड़ कर राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की SC/ST की सूची में शामिल करने/हटाने का स्पष्ट प्रावधान  किया गया।
4️⃣ संसद और राज्य विधायिका को SC/ST सूची में बदलाव करने का संवैधानिक अधिकार।

103. एकसौ तीसरा
वर्ष - 2019
लागू -14/1/2019
🔥 आर्थिक आधार पर (EWS) वर्ग को शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण के संबंध में।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ अनुच्छेद 15(6) जोड़ कर केंद्र और राज्य के संस्थानों में अध्ययन/सरकारी नौकरियों में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों (EWS – Economically Weaker Section) के लिए आरक्षण लागू कर सकते हैं। जो SC/ST/OBC आरक्षण से अलग है।
2️⃣ अनुच्छेद 16(6) जोड़ कर सरकारी सेवाओं में EWS वर्ग हेतु 10% आरक्षण को संवैधानिक रूप से मान्यता।
3️⃣ EWS वर्ग की पात्रता - आर्थिक रूप से कमजोर, SC/ST/OBC से बाहर के लोग।
4️⃣ वार्षिक आय और संपत्ति मानदंड के आधार पर आरक्षण का लाभ जो शैक्षणिक संस्थान और सरकारी नौकरियों में लागू
✍️इस संशोधन से - 
आर्थिक आधार पर शैक्षणिक और रोजगार के अवसरों में समान अवसर प्रदान करने हेतु 10% आरक्षण लागू।

104. एकसौ चौथा 
वर्ष - 2019 
लागू -25/01/2020
🔥 मुख्य उद्देश्य - 
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में नॉमिनेटेड सदस्यों की संख्या और उनके प्रतिनिधित्व के प्रावधानों में संशोधन करना।
👉 मुख्य बिंदु - 
अनुच्छेद 334 में संशोधन कर संसद और राज्य विधानसभाओं में विशेष रूप से SC,ST और MINORITIES हेतु नॉमिनेटेड सदस्य रखने की अवधि का विस्तार। कर पूर्व निर्धारित अवधि 2019 को 10 वर्ष के लिए बढ़ा कर 2029 किया गया।

105. एकसौ पांचवां 
वर्ष - 2021
लागू -19/8/2021
🔥संसद और विधानसभाओं में SC/ST और अल्पसंख्यक सदस्यों की आरक्षित/नॉमिनेटेड सीटों की अवधि को बढ़ाना।
👉 मुख्य बिंदु - 
अनुच्छेद 334 में संशोधन कर संसद और राज्य विधानसभाओं में SC/ST व अल्पसंख्यकों हेतु आरक्षित/नॉमिनेटेड सदस्य रखने की संवैधानिक अवधि 2020 को बढ़ा बढ़ाकर 2030 किया गया।

106. एकसौ छवां 
वर्ष - 2023
लागू -28/09/2023
🔥संसद और राज्य विधानसभाओं SC*ST और अल्पसंख्यक सदस्यों के आरक्षण/नॉमिनेटेड सीटों की संवैधानिक अवधि को और बढ़ाना।
👉 मुख्य बिंदु - 
अनुच्छेद 334 में संशोधन कर संसद और राज्य विधानसभाओं में SC/ST और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित/नॉमिनेटेड सदस्य रखने की संवैधानिक अवधि 2030 से बढ़ा कर 2050 किया गया।

107 एक सौ सातवां 
वर्ष - 2023
लागू - 2023
🔥पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं, SC/ST और अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण की अवधि बढ़ाना।
👉मुख्य बिंदु - 
अनुच्छेद 334 में संशोधन कर महिला और SC/ST सदस्य आरक्षण की अवधि 2023 से बढ़ा कर 2030 कर दी गई।

108 एक सौ आठवां  - 
वर्ष - 1996
लागू - अभी नहीं
🔥राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने हेतु संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं हेतु 33% आरक्षण।
👉 मुख्य बिंदु - 
1️⃣ संविधान के अनुच्छेद 81, 170, 330, 332 में संशोधन कर महिलाओं के लिए 33% घूर्णन (Rotation) के आधार पर सीटें आरक्षित करने का प्रस्ताव।
2️⃣ इस संशोधन हेतु प्रयासों का इतिहास- 
1996 - पहली बार बिल पेश हुआ।
1998 - लोकसभा ने पारित किया, लेकिन राज्यसभा में फँस गया।
2008 - पुनः पेश किया गया।
2010 - राज्यसभा में लंबी बहस के बाद पास नहीं हो पाया।
3️⃣ बिल पास होने में मुख्य विवाद और बाधाएँ - 
🚀राजनीतिक दलों में असहमति:
🚀कुछ दल इसे राजनीतिक शक्ति संतुलन बिगाड़ने वाला मानते थे।
🚀अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आरक्षण से टकराव - SC/ST महिलाओं को शामिल करने और सीटों के घूर्णन को लेकर विरोध।
राज्य स्तर पर आरक्षण विवाद - कुछ राज्यों ने कहा कि उनका चुनावी सिस्टम अलग है, इसे लागू करना कठिन है।
4️⃣ अंतिम स्थिति - 
108वाँ संविधान संशोधन अधिनियम (Act) नहीं बना। यह केवल संशोधन बिल (Bill) के रूप में रहा। इसलिए संविधान में 108वाँ संशोधन अभी तक लागू नहीं हुआ। वर्तमान में भारत में महिलाओं के लिए संविधानिक आरक्षण केवल पंचायत और नगर निकाय तक सीमित है (107वें बिल/संशोधन प्रस्तावित है)।
108वाँ बिल: महिलाओं के लिए 33% आरक्षण संसद और विधानसभाओं में।
कारणों से पारित नहीं हो पाया।
लागू नहीं हुआ, इसलिए अभी तक 106वाँ संशोधन तक ही लागू है।
                **********


OTHER AMENDMENTS TO 
         CONSTITUTION 
      ACTS AND ORDERS
     संविधान में अन्य संशोधन 
          ऐक्ट्स एवं आदेश 

01. The Rajasthan and Madhya Pradesh 
राजस्थान एवं मध्यप्रदेश की सीमाओं का पुनर्निर्धारण 
(Transfer of Territories) Act. 1959 (47 of 1959) (01/10/1959)
02. The Andhra Pradesh and Madras 
आंध्र प्रदेश एवं मद्रास की सीमाओं का पुनर्निर्धारण 
(Alteration of Boundaries) Act, 1959 (56 of 1956) (01/04/1960)
03. The Bombay Re-organisation बॉम्बे प्रांत का पुनर्गठन Act, 1960 (11 of 1960) (01/05/1960)
04. The Acquired Territories (Merger) 
अधिग्रहित क्षेत्र का सम्मिलितीकरण Act, 1960 (64 of 1960) (w.e.f. 17/01/1961)
05. The State of Nagaland 
नागालैंड राज्य 
Act, 1962 (27 of 1962) (w.e.f. 1.12.1963)
06. The Punjab Re-organisation
पंजाब राज्य पुनर्गठन 
Act, 1966 (31 of 1966) (w.e.f. 01/11/1960)
07. The Bihar and Uttar Pradesh (Alteration of Bounddries) 
बिहार एवं उत्तर प्रदेश राज्य सीमा पुनर्निर्धारण 
Act. 1968 (24 of 1968) (we.f. 10/06/1968
08. The Andhra Pradesh and Mysore (Transfer of Territory)
आंध्रप्रदेश एवं मैसूर राज्य क्षेत्र अंतरण Act, 1968 (36 of 1968) (w.e.f. 01/10/1968
09. The Madras State (Alteration of Name) 
मद्रास राज्य का पुनर्नामांकन 
Act. 1968 (53 of 1968) (w.c.f. 14/01/1969) 
10. The West Bengal Legislative Council (Abolition)
पश्चिमी बंगाल राज्य विधान परिषद विघटन 
 Act. 1969 (20 of 1969) (w.e.f. 01/08/1969)
11. The Punjab Legislative Council (Abolition) 
पंजाब राज्य विधान परिषद विघटन 
Act. 1969 (46 of 1969) (w.e.f. 07/01/1970)
12. The Assam Re-organisation (Meghalaya) 
आसाम राज्य पुनर्गठन (मेघालय) 
Act, 1969 (55 of 1969) (w.e.f. 02/04/1970)
13. The State of Hemachal Pradesh 
हिमाचल प्रदेश राज्य
Act. 1970 (53 of 1970) (w.e.f. 25/11/1971)
14. The North-Eastern Areas (Reorganisation) 
उत्तर पूर्वी क्षेत्र पुनर्गठन 
Act. 1971 (81 of 1971) (w.c.f. 21/01/1972) 
15. The Government of Union Territories (Amendment) 
संघीय सरकार क्षेत्र (केंद्र शासित प्रदेश) (संशोधन)
Act. 1971 (83 of 1971) (w.e.f. 24/09/1971
16. The Mizoram District Councils (Miscellaneous Provisions)
मिजोरम जिला परिषद (अन्य प्रावधान) Order. 1972
17. The Mysore State (Alteration of Name) 
मैसूर राज्य नाम परिवर्तन 
Act. 1973 (31 of 1973) (w.c.f. 01/11/1973)
18. The Lacendive. Minicoy and Amindivi Islands (Alteration of Name) 
लक्कादीव, मिनिकॉय और अमिनदीवी द्वीपसमूह (नाम परिवर्तन) (लक्ष्यद्वीप नाम)
Act, 1973 (34 of 19 (w.e.f. 01/11/1973)
19. The Repealing and Amending 
निरसन (समाप्त करना) एवं संशोधन
Act, 1974 (56 of 1974) (w.e.f. 20/12/1974)
20. The Constitution Fifth Schedule to the Constitution (Amendment) 
संविधान की पांचवीं अनुसूची में संशोधन 
Act, 1976 (101 of 1976 (we.f. 7.9.1976)
21. The Haryana and Uttar Pradesh (Alteration of Boundaries) 
हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश सीमा निर्धारण 
Act, 1979 (31 of 1979) (w.e.f. 15/09/1983)
22. The State of Mizoram 
मिजोरम राज्य 
Act, 1986 (34 of 1986) (w.e. f. 20.2.1987)
23. The Tamil Nadu Legislative Council 
तमिलनाडु विधान परिषद 
Act. 1986 (40 of 1986) (w.e.f. 01/11/1986)
24. The State of Arunachal Pradesh 
अरुणाचल प्रदेश राज्य
Act, 1986 (69 of 1986) (w.e.f. 20/02/1987)
25. The Goa, Daman And Diu Re-organisation Act, 
गोआ दमन एवं दीव पुनर्गठन 
1987 (18 of 1987) (w.e.f. 30/05/1987)
26. The Sixth Schedule to the Constitution (Amendment) 
संविधान की छठी अनुसूची में संशोधन Act, 1988 (67 of 1988) (w.e.f. 16/12/1988)
27. The Sixth Schedule to the Constitution (Amendment)
संविधान की छठी अनुसूची में संशोधन Act, 1995 (42 of 1995) (w.e.f. 12/09/1995
28. The Madhya Pradesh Re-organisation 
मध्यप्रदेश राज्य पुनर्गठन 
Act, 2000 (28 of 2000) (w.e.f. 01/11/2000)
29. The Uttar Pradesh Re-organisation 
उत्तर प्रदेश राज्य पुनर्गठन 
Act, 2000 (29 of 2000) (w.e.f. 09/11/2000)
30. The Bihar Re-organisation
बिहार राज्य पुनर्गठन 
Act, 2000 (30 of 2000) (w.e.f. 15/11/2000)
31. The Sixth Schedule to the Constitution (Amendment)
संविधान की छठी अनुसूची में संशोधन 
Act, 2003 (44 of 2003) (w.e.f. 07/09/2003
32. The Andhra Pradesh Legislative Council 
आंध्र प्रदेश विधान परिषद 
Act, 2005 (1 of 2006) (w.e.f. 30/03/2007)
33. The Pondicherry (Alteration of Name) 
पांडिचेरी नाम परिवर्तन 
Act. 2006 (44 of 2006) (w.e.f 01/10/2006)
34. The Uttaranchal (Alteration of Name)
उत्तरांचल प्रदेश नाम परिवर्तन 
Act, 2006 (52 of 2006) (w.e.f. 01/01/2007)
35. The Tamil Nadu Legislative Council
तमिलनाडु राज्य विधान परिषद 
Act, 2010 (16 of 2010)
36. The Orissa (Alteration of Name)
उड़ीसा राज्य नाम परिवर्तन 
Act. 2011 (15 of 2011) (w.e.f. 01/11/2011)
37. The Andhra Pradesh Reorganisation
आंध्रप्रदेश राज्य पुनर्गठन 
Act, 2014 (6 of 2014) (w.c.f. 02/06/2014
38. The Jammu and Kashmir Reorganisation 
जम्मू कश्मीर राज्य पुनर्गठन
Act. 2019 (34 of 2019) (wef. 31/10/2019)
39. The Dadra and Nagar Haveli and Daman and Diu (Merger of Union Territories) 
दादरा एवं नगर हवेली और दमन व दीव केंद्र शासित प्रदेश विलय
Act (44 of 2019) (w.e.f. 26/01/2020)
शमशेर भालू खां 
9587243963

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