भारत में ब्रेन ड्रेन की समस्या एवं उसका समाधान -
भारत में 'ब्रेन ड्रेन' (प्रतिभा पलायन) की स्थिति वर्तमान में दोहरी चुनौती बनी हुई है। एक ओर जहाँ कुशल पेशेवर और छात्र बेहतर अवसरों की तलाश में रिकॉर्ड संख्या में विदेश जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार इन्हें वापस लाने के लिए ब्रेन गेन की रणनीतियों पर काम करने के प्रयास कर रही है परन्तु सफलता नहीं मिल पा रही है।
भारत में ब्रेन ड्रेन की समस्या के आंकड़े - भारत से प्रतिवर्ष दूसरे देशों में बसने वाले लोगों की संख्या को हम दो मुख्य श्रेणियों में बाँट सकते हैं -
I. स्थायी रूप से बसने वाले (नागरिकता छोड़ने वाले)
II. शिक्षा या काम के लिए प्रवास करने वाले।
विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा संसद में साझा किए गए नवीनतम आंकड़ों (2025-26 तक) के आधार पर स्थिति इस प्रकार है:
1. भारतीय नागरिकता त्यागने वालों की संख्या - पिछले कुछ वर्षों में प्रतिवर्ष 2 लाख से अधिक भारतीय नागरिकता छोड़ रहे हैं। यह वे लोग हैं जो दूसरे देशों (जैसे अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया) के स्थायी निवासी बन चुके हैं:
वर्ष - नागरिकता छोड़ने की संख्या -
2021 - 1,63,370
2022 - 2,25,620 (रिकॉर्ड स्तर)
2023 - 2,16,219
2024 - 2,06,378
2025 - 2,00,000+ (अनुमानित/जारी डेटा) |
2. छात्रों का प्रवास - शिक्षा के लिए विदेश जाने वालों की संख्या में बहुत तेजी से वृद्धि हुई है। 2025 तक के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि -
I. 2023 में लगभग 13 लाख भारतीय छात्र विदेश में थे।
II. 2025 की रिपोर्टों के अनुसार, यह संख्या बढ़कर 18 लाख के पार पहुँच गई है। भारत अब दुनिया में अंतरराष्ट्रीय छात्रों का सबसे बड़ा स्रोत बन गया है।
3. कुल प्रवासी भारतीय (Indian Diaspora) - वर्तमान में लगभग 3.5 करोड़ (35 million) भारतीय नागरिक (NRIs) और भारतीय मूल के लोग (PIOs/OCIs) विदेशों में रह रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, भारत से हर साल औसतन 25 लाख (2.5 million) लोग किसी न किसी रूप में (स्थायी या अस्थायी) विदेश प्रवास करते हैं। यह दुनिया में किसी भी देश के मुकाबले सबसे अधिक है।
4. अमीर भारतीयों का पलायन -
हेनले प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट 2025 के अनुसार - 2025 में लगभग 3,500 करोड़पतियों के भारत छोड़कर विदेश में बसने का अनुमान है। हालांकि, यह संख्या 2023 (5,100) और 2024 (4,300) की तुलना में कम हुई है, जो दर्शाता है कि भारत में निवेश का माहौल सुधर रहा है।
प्रमुख गंतव्य (Top Destinations) -
भारतीयों के बसने के लिए शीर्ष 5 पसंदीदा देश:
I. अरब देश एवं संयुक्त अरब अमीरात (UAE) (सबसे अधिक कामकाजी भारतीय)
II. संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) (उच्च कुशल पेशेवर और नागरिकता त्यागने वालों की पहली पसंद)
III. कनाडा (पीआर और छात्रों के लिए)
IV. ऑस्ट्रेलिया
V. यूनाइटेड किंगडम (UK)
1. पलायन के चौंकाने वाले आंकड़े -
नागरिकता का त्याग - पिछले कुछ वर्षों में भारत में नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या में भारी उछाल आया है। 2022 से यह आंकड़ा प्रति वर्ष 2 लाख से अधिक बना हुआ है। 2024 में लगभग 2.06 लाख लोगों ने नागरिकता छोड़ी।
छात्रों का विदेश गमन - भारत अब दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय छात्र निर्यातक देश बन चुका है। 2016 में यह संख्या 6.85 लाख थी, जो 2025 तक बढ़कर लगभग 18 लाख होने का अनुमान है।
प्रतिभा असंतुलन - भारत से बाहर जाने वाले हर 28 छात्रों के मुकाबले केवल 1 छात्र पढ़ाई के लिए भारत आता है।
2. ब्रेन ड्रेन के कारण (Push & Pull Factors) -
उच्च शिक्षा में सीटों की कमी - उदाहरण के लिए, 2025 में NEET UG के 22 लाख आवेदकों के लिए केवल 1.8 लाख MBBS सीटें ही उपलब्ध थीं।
वेतन और जीवन स्तर - विकसित देशों (जैसे अमेरिका, कनाडा, यूके, ऑस्ट्रेलिया) में भारतीय तकनीकी पेशेवरों और डॉक्टरों को भारत की तुलना में कहीं अधिक वेतन और बेहतर क्वालिटी ऑफ लाइफ मिलती है।
R&D पर कम खर्च - भारत अपनी जीडीपी का केवल 0.64% अनुसंधान और विकास (R&D) पर खर्च करता है, जबकि चीन (2.7%) और अमेरिका (3.5%) खर्च कर इस क्षेत्र में बहुत आगे हैं।
3. आर्थिक और सामाजिक प्रभाव -
आर्थिक नुकसान - प्रतिभा पलायन के कारण भारत को हर साल लगभग $160 बिलियन का आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है, जिसमें टैक्स रिवेन्यू और सब्सिडी वाली शिक्षा पर खर्च किया गया निवेश शामिल है।
इनोवेशन में कमी - भारत के 60% टॉप AI स्टार्टअप्स के संस्थापक प्रवासी भारतीय हैं। यानी भारत का हुनर दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है।
ब्रेन ड्रेन को रोकने हेतु सुझाव - भारत से ब्रेन ड्रेन (प्रतिभा पलायन) को रोकने के लिए केवल सरकारी नीतियां ही काफी नहीं हैं, बल्कि एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की आवश्यकता है। इसे रोकने के लिए कुछ प्रमुख और व्यावहारिक उपाय निम्नलिखित हो सकते हैं:
1. अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश बढ़ाना - भारत वर्तमान में अपनी जीडीपी का बहुत कम हिस्सा अनुसंधान पर खर्च करता है।
I. बजट में वृद्धि: R&D खर्च को जीडीपी के कम से कम 2-3% तक ले जाना अनिवार्य है ताकि वैज्ञानिकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिल सकें।
II. निजी क्षेत्र की भागीदारी - कॉर्पोरेट घरानों को नवाचार और नई खोजों के लिए प्रोत्साहित करना।
2. शिक्षा प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन -
I. सीटों की संख्या में वृद्धि - मेडिकल और तकनीकी शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण संस्थानों और सीटों की संख्या बढ़ाना ताकि छात्रों को मजबूरी में विदेश न जाना पड़े। 18 लाख छात्रों को पढ़ाने के लिए प्रति 40 छात्र एक शिक्षक का अनुपात रखा जाए तो लगभग 45000 शिक्षकों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा अन्य रोजगार सृजन अलग से।
II. कौशल आधारित शिक्षा - पाठ्यक्रम को उद्योग की वर्तमान मांगों के अनुसार अपडेट करना ताकि डिग्री के बाद रोजगार की निश्चितता रहे।
3. 'रिटर्न टू इंडिया' को प्रोत्साहन -
I. टैक्स लाभ - विदेश से लौटने वाले विशेषज्ञों को शुरुआती कुछ वर्षों के लिए विशेष टैक्स छूट या आयात शुल्क में राहत देना।
II. नौकरशाही का सरलीकरण - सरकारी संस्थानों में अनुसंधान के लिए फंड मिलने की प्रक्रिया को जटिल लालफीताशाही से मुक्त करना।
4. स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा
भारत का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप ईकोसिस्टम होना एक सकारात्मक संकेत है।
I. इंक्यूबेशन सेंटर्स - टियर-2 और टियर-3 शहरों में अधिक स्टार्टअप इंक्यूबेटर खोलना ताकि छोटे शहरों की प्रतिभा वहीं रहकर काम कर सके।
II. आसान ऋण - युवा उद्यमियों को बिना किसी कठिन प्रक्रिया के कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराना।
5. जीवन की गुणवत्ता में सुधार - अक्सर लोग केवल पैसे के लिए नहीं, बल्कि बेहतर जीवन स्तर के लिए विदेश जाते हैं।
I. बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर - प्रदूषण मुक्त शहर, बेहतर सार्वजनिक परिवहन और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना।
II. सामाजिक सुरक्षा - सेवानिवृत्ति के बाद की सुरक्षा और स्वास्थ्य बीमा योजनाओं को और अधिक मजबूत बनाना।
4. सरकार के कदम - ब्रेन ड्रेन से ब्रेन गेन की ओर - सरकार अब वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को वापस लाने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है।
भारत-टैलेंट (Bharat-TALENT) फ्रेमवर्क - प्रवासियों को वापस लाने और उनके कौशल का उपयोग करने के लिए एक एकीकृत मिशन।
विशिष्ट योजनाएं - VAJRA, रामानुजन फेलोशिप और 'ब्रेन गेन भारत' जैसी पहल, जो NRI वैज्ञानिकों को IITs और अन्य संस्थानों में आकर्षक पदों और शोध अनुदान की पेशकश करती हैं।
1. वज्र योजना - Visiting Advanced Joint Research Faculty, VAJRA) - यह योजना विशेष रूप से प्रवासी भारतीय (NRI) और ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) वैज्ञानिकों के लिए है।
उद्देश्य - विदेश में काम कर रहे वैज्ञानिकों को भारतीय शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक वित्त पोषित अनुसंधान संस्थानों के साथ जुड़ने का अवसर देना।
विशेषता - इसके तहत विदेशी संकाय भारत में प्रति वर्ष 1 से 3 महीने बिता सकते हैं। उन्हें पहले महीने के लिए $15,000 और अगले महीनों के लिए $10,000 का मानदेय दिया जाता है।
2. रामानुजन फेलोशिप -
यह उन उत्कृष्ट भारतीय वैज्ञानिकों के लिए है जो विदेश से वापस आकर भारत में शोध करना चाहते हैं।
पात्रता - यह फेलोशिप उन वैज्ञानिकों को दी जाती है जिनके पास शानदार ट्रैक रिकॉर्ड है और जो भारत में किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान में काम करना चाहते हैं।
लाभ - इसमें एक आकर्षक मासिक वजीफा और प्रति वर्ष 7 लाख रुपये का रिसर्च ग्रांट दिया जाता है।
3. प्रधानमंत्री अनुसंधान फेलोशिप (PMRF) - यह योजना देश के भीतर ही सबसे प्रतिभाशाली छात्रों को रोकने के लिए डिज़ाइन की गई है।
उद्देश्य - IIT, IISc, NIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के मेधावी छात्रों को डॉक्टरेट (Ph.D.) प्रोग्राम के लिए प्रोत्साहित करना।
आर्थिक सहायता - इसके तहत चुने गए शोधकर्ताओं को 70,000 से 80,000 रुपये प्रति माह की फेलोशिप और सालाना 2 लाख रुपये का शोध अनुदान मिलता है।
4. इंस्पायर योजना (INSPIRE Innovation in Science Pursuit for Inspired Research) -
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा संचालित यह योजना स्कूली स्तर से ही प्रतिभाओं को पहचानने का काम करती है।
चरण - इसमें 10वीं से लेकर Ph.D. स्तर तक के छात्रों को स्कॉलरशिप और फेलोशिप दी जाती है ताकि वे विज्ञान के क्षेत्र में अपना करियर बनाने के लिए प्रेरित रहें और विदेश जाने के बजाय स्वदेश में शोध करें।
5. ग्लोबल प्रविश भारतीय वैज्ञानिक (VAIBHAV Fellowship) - 2023-24 में तेजी से उभरी इस पहल का उद्देश्य दुनिया भर के भारतीय मूल के वैज्ञानिकों को भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ जोड़ना है।
यह कार्यक्रम हाइब्रिड मोड में काम करता है, जिससे विदेशी विशेषज्ञ भारत के स्थानीय अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद करते हैं।
स्टार्टअप ईकोसिस्टम - भारत का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप ईकोसिस्टम बनना भी कई पेशेवरों को स्वदेश लौटने के लिए प्रेरित कर रहा है।
इन योजनाओं का प्रभाव (Expected Impact) -
ज्ञान का आदान-प्रदान - इन योजनाओं से भारत को ग्लोबल एक्सपोजर मिलता है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार - जब विदेशी विशेषज्ञ भारत आते हैं, तो यहाँ की प्रयोगशालाओं और अनुसंधान केंद्रों का स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सुधरता है।
स्वदेशी नवाचार - पेटेंट और नई खोजों की संख्या में वृद्धि होती है, जो अंततः 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को बल देती है।
निष्कर्ष -'ब्रेन ड्रेन' से 'ब्रेन सर्कुलेशन'
आज के वैश्वीकरण के युग में प्रतिभा के प्रवाह को पूरी तरह रोकना मुश्किल है, लेकिन हम इसे 'ब्रेन सर्कुलेशन' में बदल सकते हैं। इसका अर्थ है कि लोग बाहर जाएं, अनुभव प्राप्त करें और फिर भारत लौटकर अपनी विशेषज्ञता का लाभ देश को दें। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल भावनात्मक अपील या छोटे-मोटे प्रोत्साहन से ब्रेन ड्रेन नहीं रुकेगा। इसके लिए भारत को अपनी लिवेबिलिटी, जैसे बेहतर हवा, इंफ्रास्ट्रक्चर और सरल टैक्स व्यवस्था में सुधार करना होगा।
शमशेर भालू खां
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